facebookmetapixel
Advertisement
भारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

FY26 में फिस्कल डेफिसिट पर सरकार की मजबूत पकड़, 4.4% से बेहतर रह सकता है आंकड़ा: PwC

Advertisement

FY26 में GDP ग्रोथ अनुमान घटने के बावजूद सरकार 4.4% के फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य को हासिल करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

Last Updated- January 11, 2026 | 2:49 PM IST
fiscal deficit
Representative Image

सरकार वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.4 प्रतिशत के फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को पूरा करने की स्थिति में है। इतना ही नहीं, यह लक्ष्य तय अनुमान से भी बेहतर रह सकता है। PwC के पार्टनर और इकोनॉमिक एडवाइजरी सर्विसेज प्रमुख रनेन बनर्जी ने कहा कि यह स्थिति वैश्विक निवेशकों के लिए भारत की मजबूत वित्तीय अनुशासन की प्रतिबद्धता का सकारात्मक संकेत देगी।

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नाममात्र GDP वृद्धि दर के अनुमान को 10.1 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत किए जाने के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि सरकार के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि PwC का मानना है कि इस संशोधन के बावजूद कुल GDP के आंकड़े बजट अनुमानों के करीब ही हैं, यानी गणना का आधार (डिनॉमिनेटर) कमजोर नहीं हुआ है।

रनेन बनर्जी के अनुसार, इसी वजह से सरकार के लिए 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करना आसान रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वित्त वर्ष (FY25) में सरकार ने 4.9 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले 4.8 प्रतिशत का घाटा दर्ज कर पहले ही बेहतर प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा, “सरकार के पास इस बार भी अतिरिक्त गुंजाइश है। आंकड़ों के लिहाज से राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत तक भी आ सकता है, जो यह दिखाएगा कि भारत न केवल वित्तीय सुधार के रास्ते पर है, बल्कि तय लक्ष्यों से बेहतर नतीजे दे रहा है।”

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में FY26 के लिए राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रुपये या GDP का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान पेश किया था।

PwC के मुताबिक, नाममात्र GDP वृद्धि में कमी की एक बड़ी वजह थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में नरमी है, खासकर खाद्य और तेल कीमतों में गिरावट। इससे GDP डिफ्लेटर कम हुआ और वास्तविक व नाममात्र वृद्धि के बीच का अंतर घटा।

हालांकि, कम नाममात्र वृद्धि का असर कर संग्रह पर पड़ सकता है। अनुमान है कि सकल कर राजस्व में करीब 1.9 ट्रिलियन रुपये की कमी आ सकती है। GST मुआवजा उपकर को समायोजित करने के बाद यह कमी लगभग 75 हजार करोड़ रुपये तक सीमित रह सकती है।

इसके बावजूद केंद्र सरकार के पास GST मुआवजा उपकर के अप्रयुक्त फंड से करीब 50 हजार करोड़ रुपये का बफर मौजूद है। वहीं, खर्च के मोर्चे पर राजस्व व्यय बजट अनुमान से करीब 2 प्रतिशत कम रहने की संभावना है, जबकि पूंजीगत व्यय लगभग तय लक्ष्य के अनुरूप रहने का अनुमान है।

कुल मिलाकर, कर राजस्व में संभावित कमी को खर्च में बचत से संतुलित किया जा सकता है। इसी कारण FY26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य न केवल हासिल होने की उम्मीद है, बल्कि इसके अनुमान से बेहतर रहने की संभावना भी बनी हुई है।

-भाषा इनपुट के साथ

Advertisement
First Published - January 11, 2026 | 2:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement