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मझोले और भारी वाहनों की बिक्री में लौटी रफ्तार, वर्षों की मंदी के बाद M&HCV सेक्टर में तेजी

ब्रोकरों का कहना है कि सुधार अभी भी माल भाड़े की दरों पर निर्भर है, लेकिन पिछली दिखावटी शुरुआत की तुलना में यह अब ढांचागत रूप से ज्यादा मजबूत हो रही है

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सोहिनी दास   
Last Updated- January 04, 2026 | 10:34 PM IST

भारत की मझोली और भारी वाणिज्यिक वाहन (एमएचसीवी) की श्रेणी कई वर्षों की टेढ़ी-मेढ़ी वृद्धि के बाद तेजी के नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है। इसे बेहतर माल भाड़ा दरों, पुराने होते बेड़े, अनुकूल नियामकीय परिस्थितियों और जीएसटी के कारण पैदा हुई विकृतियां दूर हो जाने से मदद मिली है। ब्रोकरों का कहना है कि सुधार अभी भी माल भाड़े की दरों पर निर्भर है, लेकिन पिछली दिखावटी शुरुआत की तुलना में यह अब ढांचागत रूप से ज्यादा मजबूत हो रही है। ऐसा अब उद्योग के अधिकारी भी मानने लगे हैं। 

बिक्री (419,000 वाहन) का आंकड़ा एमएचसीवी के लिए वित्त वर्ष 2019 के ऊंचे स्तर से कम है, जो दिखाता है कि मंदी कितनी गहरी और लंबी रही है। लेकिन जमीनी हालात सुधर रहे हैं। नोमूरा ने इस सेक्टर पर अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा है कि एमएचसीवी उद्योग तेजी के शुरुआती दौर में प्रवेश कर रहा है। इसकी  बिक्री वृद्धि वित्त वर्ष 2026 में करीब 8 फीसदी तथा 2027 में 10 फीसदी रहने का अनुमान है, क्योंकि उपयोगिता में सुधार आया है और रीप्लेसमेंट मांग यानी पुराने वाहन निकालकर नए वाहनों की खरीदारी तेज हुई है। नोमूरा ने अनुमान जताया है कि एमएचसीवी की बिक्री वित्त वर्ष 2026 में 4,04,000 वाहन, वित्त वर्ष 2027 में 4,44,000 और वित्त वर्ष 2028 में 4,66,000 वाहन रह सकती है। 

सबसे बड़े बदलावों में से एक फ्लीट ऑपरेटरों की लाभ की स्थिति में हुआ है। जीएसटी कटौती के बाद गाड़ियों की शुरुआती लागत कम होने से (लगभग 8 फीसदी अनुमानित) ईएमआई का बोझ कम हुआ है, जबकि कई वर्षों की ओवरसप्लाई के बाद मालभाड़ा दरें स्थिर हो गई हैं। इससे ट्रांसपोर्टरों, खासकर छोटे और मझोले ऑपरेटरों के नकदी प्रवाह में सुधार हुआ है, जो काफी हद तक बाजार से दूर थे।

टाटा मोटर्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ गिरीश वाघ ने कंपनी के दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद एक बातचीत में इस बदलाव को स्वीकार किया। वाघ ने कहा, ‘हम एमएचसीवी बाजार में स्थिरता के शुरुआती संकेत देख रहे हैं। बेड़े का उपयोग बेहतर हुआ है और ऑपरेटरों का नकदी प्रवाह एक साल पहले की तुलना में बेहतर है। रीप्लेसमेंट या प्रतिस्थापन मांग को वापस लाने के लिए यह महत्त्वपूर्ण है।’

विशेष रूप से, प्रतिस्थापन मांग प्रमुखता से उभर रही है। नोमूरा का अनुमान है कि भारतीय सड़कों पर ट्रकों की औसत आयु लगभग 10 वर्ष है, जो 7-7.5 वर्षों के ऐतिहासिक मानदंड से काफी अधिक है। जीएसटी और उत्सर्जन मानकों में बदलाव से पहले 2015-2017 की अवधि में खरीदे गए कई वाहन अब अपने आर्थिक जीवन के अंत के करीब हैं।

अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक और सीईओ शेनु अग्रवाल ने कंपनी के वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के परिणामों की घोषणा के बाद अपनी टिप्पणियों में इस दृष्टिकोण के बारे में बताया। अग्रवाल ने कहा, ‘हम मानते हैं कि एमएचसीवी चक्र निचले स्तर के करीब करीब है। प्रतिस्थापन मांग धीरे-धीरे वापस आ रही है क्योंकि बेड़ों के ऑपरेटरों को बेहतर माल ढुलाई उपलब्धता और परिचालन ढांचे में सुधार दिखाई दे रहा है।’

First Published : January 4, 2026 | 10:34 PM IST