प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
GST में बदलाव के बाद छोटी कारें सस्ती हो गईं, लेकिन भारत के यूज्ड कार बाजार में SUV का जलवा बरकरार है। इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, SUV की इन्वेंट्री तेजी से घूम रही है और उनकी रीसेल वैल्यू भी हैचबैक की तुलना में ज्यादा मजबूत बनी हुई है।
यूज्ड कार प्लेटफॉर्म्स से मिले डेटा बताते हैं कि GST बदलाव के बाद भी खरीदारों की पसंद में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। SUV पहले की तरह ही बाजार पर छाई हुई हैं। हैचबैक कारों की कीमतों में करीब 21 फीसदी की कमी आई, जबकि SUV की कीमतें लगभग 29 फीसदी तक गिरीं, लेकिन फिर भी SUV की डिमांड ज्यादा मजबूत बनी रही।
कारवाले के यूज्ड कार डिवीजन के प्रेसिडेंट अभिषेक पटोडिया कहते हैं, “खरीदारों को आज भी बड़ी गाड़ियां ज्यादा पसंद आ रही हैं। वजह साफ है – जगह, आराम और सड़क पर अच्छा प्रजेंस।” उनके अनुसार, ज्यादा कीमत होने के बावजूद SUV सेकेंडरी मार्केट में जल्दी बिक रही हैं।
जानकारों का मानना है कि SUV में खरीदारों को महत्वाकांक्षा और व्यावहारिकता दोनों का मिश्रण मिलता है। जो गाड़ियां अब रीसेल मार्केट में आ रही हैं, वे ज्यादातर नई-नई और फीचर्स से भरपूर हैं। इससे लोग कम कीमत में प्रीमियम सुविधाएं पा लेते हैं। नतीजा यह कि SUV और प्रीमियम सेडान की रीसेल वैल्यू मजबूत बनी हुई है, जबकि हैचबैक को बिक्री बनाए रखने के लिए कीमतें ज्यादा घटानी पड़ीं।
पटोडिया ने आगे कहा, “SUV की इन्वेंट्री तेजी से घूम रही है और रीसेल वैल्यू भी अच्छी बनी हुई है। इससे साफ पता चलता है कि ज्यादा कीमत पर भी खरीदारों का भरोसा बरकरार है।”
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कीमतों का खेल इलाके के हिसाब से भी अलग है। कारवाले के डेटा के अनुसार, टॉप 30 शहरों में कीमतें औसतन 28 फीसदी तक घटी हैं, जबकि छोटे बाजारों में यह गिरावट सिर्फ 17 फीसदी के आसपास रही। इसका मुख्य कारण डिमांड का अलग स्वरूप है, कोई बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं।
सर्टिफाइड यूज्ड कारें और वारंटी वाली गाड़ियां खासकर बड़े शहरों में SUV की बिक्री को और तेज कर रही हैं। इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ता है।
खरीदारों की बात करें तो उम्र और इलाके के हिसाब से पसंद थोड़ी अलग है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिर है। युवा खरीदार अब ज्यादा असर डाल रहे हैं। बड़े शहर यूज्ड कार ट्रैफिक का करीब 80 फीसदी हिस्सा संभाल रहे हैं। 25 से 35 साल के खरीदार ज्यादातर नई-नई गाड़ियां ले रहे हैं, जिनमें आधुनिक फीचर्स हों। वहीं टियर-2 और टियर-3 शहरों में जरूरत ज्यादा प्रैक्टिकल है – यहां परिवार और बिजनेस के लिए मजबूत SUV और एमपीवी ज्यादा चलती हैं।
GST में कमी का असर नई और पुरानी गाड़ियों के बीच कॉम्पिटिशन पर भी पड़ा है। स्पिनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड हनिश यादव बताते हैं कि सबसे ज्यादा फर्क 8 से 12 लाख रुपये की नई कारों वाले सेगमेंट में दिखा, जो सीधे 5 से 9 लाख की यूज्ड गाड़ियों से टकराती हैं। “मिडिल प्राइस बैंड में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन नई कारों की तरफ बड़ा शिफ्ट नहीं हुआ,” वे कहते हैं। एंट्री लेवल यूज्ड कारें मजबूत बनी हुई हैं और प्रीमियम यूज्ड सेगमेंट तो लगभग अप्रभावित है।
कुल मिलाकर यूज्ड कारों की कीमतें 5 से 7 फीसदी तक घटी हैं, जो नई कारों की कीमतों में आई गिरावट से मेल खाती है। इंडस्ट्री वाले इसे अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रीसेट मान रहे हैं। अब गाड़ी बदलने का औसत समय 6.5 से 7 साल हो गया है। बेहतर रिलायबिलिटी, आसान फाइनेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से लोग जल्दी अपग्रेड कर रहे हैं, जिससे सप्लाई बढ़ रही है।
लक्जरी यूज्ड कार डीलरों को भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। बिग बॉय टॉय्ज के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन अहुजा कहते हैं कि GST बदलाव के बाद आए त्योहारी सीजन में तीन महीने में सबसे अच्छी बिक्री हुई। प्री-ओन्ड लक्जरी कारों की डिमांड बढ़ी क्योंकि लोग अच्छी वैल्यू और जल्दी डिलीवरी चाहते हैं।
इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि अगर टैक्स कट की वजह से नई कारों की बिक्री ऊपर बनी रही, तो लंबे समय में पुरानी गाड़ियों की सप्लाई और डिमांड दोनों अपने आप बढ़ जाएंगी।