प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वेनेजुएला में हुई गंभीर उठापटक से भारतीय सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के कामकाज पर खास असर पड़ने की आशंका नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला में भारतीय आईटी कंपनियों की काफी कम मौजूदगी है, जिससे असर भी मामूली या न के बराबर ही हो सकता है। इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों की वेनेजुएला में इस समय कोई इकाई नहीं है। भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेस (टीसीएस) के लिए लैटिन अमेरिका जरूर मायने रखता है मगर इसकी भी वेनेजुएला में कोई खास मौजूदगी नहीं है।
अनअर्थ इनसाइट्स के सीईओ एवं संस्थापक गौरव वासु ने कहा, ‘वेनेजुएला के मौजूदा अस्थिरता वाले हालात का कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है। इसकी वजह यह है कि उस देश में भारतीय आईटी सेवा कंपनियों का कोई कार्यालय या आपूर्ति केंद्र (डिलीवरी सेंटर) नहीं हैं। वे वेनेजुएला से राजस्व नहीं हासिल करती हैं।’
यानी वेनेजुएला में क्या चल रहा है, इससे भारतीय आईटी कंपनियों की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह स्थिति लगभग वैसी ही है जैसी लगभग चार वर्ष पहले यूक्रेन युद्ध छिड़ने के समय उभर कर आई थी। आईटी कंपनियों की रूस में मौजूदगी बहुत कम थी, इसलिए उन्हें कारोबार संचालन बंद करने में कोई परेशानी नहीं हुई। लैटिन अमेरिका की अभी भी आईटी कंपनियों के राजस्व में मामूली हिस्सेदारी है। पिछले वित्त वर्ष में टीसीएस के राजस्व में लैटिन अमेरिका की हिस्सेदारी 1.9 प्रतिशत या लगभग 60 करोड़ डॉलर रही थी और स्थिर मुद्रा पर इसमें 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन्फोसिस लैटिन अमेरिका से अपने राजस्व को अलग से नहीं बताती है जबकि विप्रो अमेरिकाज 1 के तहत अपने राजस्व को दर्शाती है।
वासु ने आगे कहा,‘मौजूदा घटनाक्रम से संचालन, उपभोक्ता तक सेवा आपूर्ति या वित्तीय प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा है। मोटे तौर पर वेनेजुएला की घटना आईटी सेवा उद्योग के लिए समग्र मांग पर असर नहीं डाल रही है। आईटी कारोबार में मांग वैश्विक स्थितियों, ग्राहक बजट और तकनीक जैसी प्राथमिकताओं पर निर्भर करती है। ऐसी घटनाएं अधिक मायने नहीं रखती हैं, जिनसे परिचालन या राजस्व को कोई जोखिम नहीं रहता है।’
लैटिन अमेरिका में मेक्सिको, ब्राजील और चिली जैसे देशों से राजस्व आता है। इन देशों में इन कंपनियों के उत्तरी अमेरिका में अपने ग्राहकों को सेवा देने के लिए नियर-शोर सेंटर हैं। उत्तरी अमेरिका जरूर भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है। टीसीएस के लिए लैटिन अमेरिका अहम है, क्योंकि वहां नौ देशों में इस कंपनी के 26,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी इस क्षेत्र में 400 ग्राहकों को सेवाएं देती है। वहीं एचसीएलटेक के लिए मेक्सिको महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। कंपनी कोस्टा रिका, पेरू, ब्राजील और ग्वाटेमाला में भी कारोबार कर रही है।