फसलों की कीमतों में गिरावट से बुरी तरह प्रभावित हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी से काफी सहारा मिला है। इससे कई कृषि उपकरण सस्ते हो गए, जिससे इनकी बिक्री में वृद्धि हुई। अब उम्मीद की जा रही है कि सभी वस्तुओं की खपत बढ़ सकती है। बीते नवंबर में जारी नैशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर ऐंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के आठवें दौर के ‘रूरल इकनॉमिक कंडीशंस ऐंड सेंटीमेंट्स सर्वे’ के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में पिछले वर्ष अधिक खपत देखने को मिली, जो इस समय मासिक घरेलू आय का 67.3 प्रतिशत है। यह पिछले सितंबर 2024 में सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से सबसे अधिक है।
नाबार्ड के सर्वेक्षण से पता चला है कि नवंबर 2025 में लगभग 42.2 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी है, जो सभी सर्वेक्षण के मुकाबले सबसे अच्छा प्रदर्शन है। केवल 15.7 प्रतिशत परिवार ही ऐसे रहे, जिनकी आय गिरी। लगभग 76 प्रतिशत परिवार मानते हैं कि अगले वर्ष भी उनकी आय में वृद्धि होगी।
सर्वेक्षण में कृषि विकास पर मिश्रित तस्वीर सामने आई है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) कुल 3.5 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 4.1 प्रतिशत था। नॉमिनल के मामले में वित्त वर्ष 26 की जुलाई–सितंबर तिमाही में कृषि जीवीए केवल 1.8 प्रतिशत बढ़ा है, जो एक साल पहले 7.6 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है। इसका मुख्य कारण मुद्रास्फीति में तेज गिरावट रही है। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए नॉमिनल जीवीए की वृद्धि 3.2 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 25 की इसी अवधि में 7.5 प्रतिशत थी।
कृषि मंत्रालय के 12 दिसंबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि मक्का, रागी, मूंगफली और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की औसत मंडी कीमतें उनके न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) से लगभग 20 से 30 प्रतिशत कम रहे हैं। इससे खाद्य मुद्रास्फीति बहु-वर्ष के निचले स्तर पर आ गई, लेकिन इस कारण कृषि आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार पर असर पड़ा है।
अक्सर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाने वाली दोपहिया वाहनों की बिक्री अप्रैल से नवंबर के दौरान सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत बढ़कर 1.43 करोड़ यूनिट हो गई, जबकि एक साल पहले यह 1.39 करोड़ यूनिट थी। आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर से पहले वाहन बिक्री की वृद्धि धीमी थी, लेकिन जीएसटी दरों में कटौती के बाद इसमें तेज वृद्धि हुई। अकेले नवंबर में ही दोपहिया वाहनों की बिक्री में लगभग 21.2 प्रतिशत बढ़ी। इसमें सबसे ज्यादा मोटरसाइकलों की बिक्री में 17.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
ग्रामीण खपत के प्रमुख संकेतक ट्रैक्टर की बिक्री भी मजबूत बनी हुई है। इक्रा ने हाल ही में वित्त वर्ष 26 के थोक वॉल्यूम वृद्धि के आउटलुक को पहले के 8 से 10 प्रतिशत के अनुमान से बढ़ाकर 15 से 17 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 25 में यह 7 प्रतिशत थी। एजेंसी ने नवंबर 2025 में थोक वॉल्यूम में 30.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि और वित्त वर्ष 26 के पहले आठ महीनों में 19.2 प्रतिशत की संचयी वृद्धि सहित मजबूत प्रदर्शन का हवाला दिया। टैक्स में कटौती से हॉर्सपावर खंडों में ट्रैक्टर की कीमतें लगभग 40,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक कम हो गई हैं।
ग्रामीण बाजार को आधार देने वाले उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की वृद्धि जुलाई-सितंबर तिमाही में 7.7 प्रतिशत तक धीमी हुई है, लेकिन एनआईक्यू के अनुसार ग्रामीण एफएमसीजी वृद्धि ने लगातार सातवीं तिमाही में शहरी बाजार को पीछे छोड़ दिया। एनआईक्यू इंडिया में ग्राहक सफलता-एफएमसीजी के प्रमुख शारंगपाणि पंत कहते हैं, ‘भारतीय एफएमसीजी क्षेत्र लचीला बना हुआ है, जबकि शहरी बाजार में यह गति पकड़ रहा है। इसमें खासकर शीर्ष आठ महानगरों में ई–कॉमर्स प्रमुख भूमिका निभा रहा है।’
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्य की मांग नवंबर 2025 में लगातार पांचवें महीने गिर गई। 1 दिसंबर को शाम 7.35 बजे दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष नवंबर की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत कम परिवारों ने काम की तलाश की। वित्त वर्ष 26 में केवल मई और जून में वित्त वर्ष 25 के संबंधित महीनों की तुलना में कार्य मांग में मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
सीमित आंकड़ों के कारण ग्रामीण वेतन रुझानों का आकलन करना थोड़ा मुश्किल है। फिर भी वित्त वर्ष 25 में नॉमिनल के मामले में सामान्य कृषि श्रमिकों के औसत वार्षिक ग्रामीण वेतन में 6.78 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 7.81 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
(साथ में मुंबई से शार्लीन डिसूजा)