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तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 900 अंक चढ़ा

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आईटी सूचकांक के अलावा नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के सभी क्षेत्रीय सूचकांक बढ़त पर बंद हुए। आईटी सूचकांक में 0.6 फीसदी की गिरावट आई

Last Updated- March 05, 2026 | 10:08 PM IST
Stock Market today

प​श्चिम ए​शिया में जारी तनाव के बावजूद निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार के चलते बेंचमार्क सूचकांकों में आज तीन सत्रों की भारी गिरावट के बाद 1 फीसदी से अधिक की तेजी आई। पिछले सत्र में लगभग 11 महीनों के निचले स्तर पर बंद होने के बाद सेंसेक्स 900 अंक या 1.14 फीसदी बढ़त के साथ 80,016 पर पहुंच गया। निफ्टी 285 अंक या 1.2 फीसदी की तेजी के साथ 24,766 पर बंद हुआ।

पिछले तीन सत्रों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और महंगाई तथा आ​र्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ने से दोनों सूचकांकों में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आई थी। वॉल स्ट्रीट पर सकारात्मक रुख के बाद अधिकांश एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी तेजी आई।

हालांकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी व्यापक स्तर पर बना हुआ है। ईरान ने अमेरिकी हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तेज करने और अपने एक युद्धपोत के डूबने का बदला लेने की बात कही है। इस बीच प​श्चिम ए​शिया में टकराव छठे दिन में प्रवेश कर गया है।

आईटी सूचकांक के अलावा नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के सभी क्षेत्रीय सूचकांक बढ़त पर बंद हुए। आईटी सूचकांक में 0.6 फीसदी की गिरावट आई। बाजार में उठापटक मापने वाला सूचकांक इंडिया ‘विक्स’ 15 फीसदी नरम होकर 17.9 पर रह गया।

बेंचमार्क सूचकांकों ज्यादातर बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज की बदौलत आई। पिछले तीन सत्रों में लगभग 5 फीसदी गिरने के बाद रिलायंस का शेयर 3.3 फीसदी चढ़ गया। लार्सन ऐंड टुब्रो पिछले दो सत्रों में लगभग 10 फीसदी गिरावट के बाद आज 4 फीसदी बढ़त पर बंद हुआ।

विश्लेषकों ने कहा कि कई शेयरों में हालिया गिरावट के बाद दाम कम होने से लिवाली देखी गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 2,749 शेयर बढ़त में और 1,515 नुकसान में बंद हुए। कच्चे तेल का दाम 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा।

विशेषज्ञों ने कहा कि प​श्चिम ए​शिया में स्थिति अनिश्चित रहने के कारण बाजार में सुधार कमजोर बनी हुई है। निवेशकों को आगे और उठापटक के लिए तैयार रहना पड़ सकता है क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान वैश्विक महंगाई और ब्याज दर के परिदृश्य को जटिल बना सकता है।

कच्चे तेल के दाम बढ़ना भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह अपनी ऊर्जा जरूरत का करीब 80 फीसदी आयात करता है। इनमें से आधे से अधिक की आपूर्ति प​श्चिम एशिया से होती है। भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष 10 आपूर्तिकर्ताओं में 6 इसी क्षेत्र के हैं। तेल के अलावा कतर और संयुक्त अरब अमीरात एलएनजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। कतर द्वारा अपने सबसे बड़े गैस प्लांट को बंद करने की खबरों के बाद चिंता और बढ़ गई है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य कार्या​धिकारी और उप-प्रमुख प्रतीक गुप्ता ने कहा, ‘युद्ध जैसी स्थिति में अनिश्चितता के समय निवेशक आम तौर पर पूंजी को सुरक्षित संप​त्तियों, खासकर विकसित देशों की ओर ले जाते हैं। नतीजतन उभरते बाजारों में बिकवाली का दबाव होता है।’ विश्लेषकों ने यह भी कहा कि शिपिंग फर्में, तेल उत्पादक और बीमाकर्ता क्षेत्र में जहाजों के क्षतिग्रस्त होने की खबरों के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।

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First Published - March 5, 2026 | 10:06 PM IST

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