facebookmetapixel
Advertisement
भारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधालाठीचार्ज और पुलिस हिंसा की जांच करेगी 3 सदस्यीय समिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देशपायलटों की आकस्मिक ड्रग जांच 25% करने की मांग, डीजीसीए से एफआईपी की अपीलभारत के समुद्री व्यापार का नया गेटवे बना विझिंजम, 57 लाख टीईयू क्षमता की ओर बढ़ा बंदरगाह

सोना-चांदी में फिर तेजी: बिकवाली के बाद लौटी चमक, 1979 के बाद सबसे अच्छे वर्ष की राह पर

Advertisement

मौद्रिक नीति में ढील, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ईटीएफ में बढ़ती हिस्सेदारी के कारण इस वर्ष सोने की कीमतों में 66 फीसदी की वृद्धि हुई है

Last Updated- December 30, 2025 | 9:18 PM IST
Gold and Silver Price today

पिछले सत्र में हुई भारी बिकवाली से उबरते हुए सोने और अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में मंगलवार को उछाल आई क्योंकि ध्यान एक बार फिर लगातार बने रहने वाले वैश्विक जोखिमों पर केंद्रित हो गया, जिन्होंने सोने को चार दशकों से अधिक समय में अपने सबसे मजबूत सालाना प्रदर्शन तक पहुंचाया है।

हाजिर सोना 11.27 बजे (जीएमटी) पर 1.3 फीसदी बढ़कर 4,387.29 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सोमवार को इसमें दो महीने से अधिक समय में सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की गई। यह शुक्रवार के रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,549.71 डॉलर से नीचे आ गई। विश्लेषकों ने इसका कारण मुनाफावसूली बताया। अमेरिकी सोना वायदा 1.3 फीसदी की बढ़त के साथ 4,401.90 डॉलर पर रहा।

ओएंडा के मार्केटपल्स के विश्लेषक जेन वावडा ने कहा, सोमवार की बिकवाली में नए साल से पहले मुनाफावसूली के लक्षण दिखाई दिए। खरीदार संभवतः वापस लौट रहे हैं क्योंकि इस तेजी के संरचनात्मक हालात (कमजोर अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता) अभी भी बनी हुई हैं।

मौद्रिक नीति में ढील, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ईटीएफ में बढ़ती हिस्सेदारी के कारण इस वर्ष सोने की कीमतों में 66 फीसदी की वृद्धि हुई है जो 1979 के बाद से इसमें सालाना सबसे बड़ी वृद्धि है। फेडरल रिजर्व मंगलवार को दिसंबर की बैठक की कार्यवाही जारी करेगा। कारोबारी फिलहाल अगले साल दो बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। कम ब्याज दर वाले माहौल में नॉन यील्डिंग संपत्तियों का प्रदर्शन अच्छा रहता है।

भू-राजनीतिक मोर्चे की बात करें तो रूस ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के आवास पर हमले की कोशिश का आरोप लगाया और जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, जिससे शांति समझौते की संभावनाओं को झटका लगा।

उधर, चांदी की कीमत 3.5 फीसदी बढ़कर 74.78 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। सोमवार को यह 83.62 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद इसमें अगस्त 2020 के बाद की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की गई। सोसियाते जेनराली के विश्लेषकों ने शुक्रवार को सीएमई समूह द्वारा चांदी वायदा के लिए प्रारंभिक मार्जिन जरूरत बढ़ाने के कदम की ओर भी इशारा किया।

सीएमई ग्रुप ने कॉमेक्स सिल्वर फ्यूचर्स के लिए ट्रेडरों द्वारा एक्सचेंज के पास रखी जाने वाली सिक्योरिटी रकम को 13.6 फीसदी बढ़ाकर 22,000 डॉलर प्रति अनुबंध से 25,000 डॉलर कर दिया है।

अमेरिकी महत्त्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल होने, आपूर्ति में कमी और औद्योगिक और निवेशकों की रुचि में वृद्धि के कारण चांदी की कीमतों में इस वर्ष 159 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

Advertisement
First Published - December 30, 2025 | 9:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement