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घाटे में चल रही क्विक कॉमर्स कंपनियों के IPO पर बवाल, AICPDF ने SEBI से की हस्तक्षेप की मांग

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यह मांग ऐसे समय की गई है जब हाल में जेप्टो ने अपने 1.22 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए सेबी के पास गोपनीय तरीके से आवेदन सौंपा है

Last Updated- December 31, 2025 | 2:53 PM IST
quick commerce
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वितरकों के संगठन अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक संघ (एआईसीपीडीएफ) ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के आईपीओ के संबंध में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को पत्र लिखा है। पत्र में उसने घाटे वाली क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के आईपीओ आवेदनों के खिलाफ नियामकीय हस्तक्षेप की मांग की है।

यह मांग ऐसे समय की गई है जब हाल में जेप्टो ने अपने 1.22 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए सेबी के पास गोपनीय तरीके से आवेदन सौंपा है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने संगठन का पत्र देखा है। इसमें कहा गया है, ‘हमारे सदस्यों को भारी डिस्काउंट, जान बूझकर कम की गई कीमतों और नकदी झोंककर बाजार कब्जाने की रणनीति की वजह से बाजार में लगातार और गंभीर उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है और उनके इस कारोबार को बार-बार के निजी पूंजी निवेश की मदद से पूरी तरह फंड किया गया है।’

पत्र में यह भी कहा गया है कि उनकी इस तोड़फोड़ वाली बाजार कब्जाने की रणनीति के कारण आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधा का सामना करना पड़ा है और इसे भी बार-बार निजी पूंजी के निवेश से फंडिंग दी गई है, जिससे व्यापार को नुकसान हुआ है।

एआईसीपीडीएफ ने अपने पत्र में यह भी बताया कि स्विगी ने पहले ही अपना आईपीओ और बिक्री पेशकश (ओएफएस) पूरा कर लिया है, जिसमें शुरुआती निवेशकों को बड़े पैमाने पर बाहर निकलने का मौका मिला और जोमैटो भी इसी कदम पर चली है।  

पत्र में कहा गया है, ‘जेप्टो ने अब औपचारिक रूप से आईपीओ के लिए आवेदन कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि बहुत ज्यादा नकदी खर्च करने वाली एक और क्विक-कॉमर्स कंपनी जल्द ही सार्वजनिक बाजार में आ सकती है जबकि इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा की जांच अभी भी जारी है।’

हालांकि, सूत्रों ने पुष्टि की कि कंपनी के खिलाफ सीसीआई में कोई जांच लंबित नहीं है। एक सूत्र ने कहा, ‘सीसीआई में कोई मामला लंबित होना आईपीओ के लिए कोई बाधा नहीं है। कुछ दूसरी कंपनियों के खिलाफ भी ऐसी शिकायतें थीं, लेकिन अब वे लिस्टेड हैं।’

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First Published - December 30, 2025 | 10:15 PM IST

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