भारत मिडिल ईस्ट के संघर्ष को लेकर अलर्ट मोड पर है। सरकार ने क्रूड ऑयल, एलपीजी और एलएनजी के वैकल्पिक स्रोत तलाशने शुरू कर दिए हैं, ताकि अगर हालात 10-15 दिन से ज्यादा बिगड़े तो कोई दिक्कत न हो। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक सरकारी सूत्र के माध्यम से मंगलवार को ये जानकारी दी।
ईरान और ओमान के बीच का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज स्ट्रीट दुनिया के कुल तेल का करीब एक पांचवां हिस्सा और काफी गैस ले जाता है। लेकिन अब वहां जहाजों पर हमले होने से शिपिंग लगभग ठप हो गई है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ये कार्रवाई की। इससे तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ रहा है।
भारत अपनी रिफाइनरियों में रोजाना करीब 5.6 मिलियन बैरल क्रूड प्रोसेस करता है। इसमें से लगभग 40 फीसदी क्रूड इसी हॉर्मुज से होकर आता है। सरकार का कहना है कि वो स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और भरोसा है कि अगर एक रास्ता बंद हुआ तो दूसरा खुल जाएगा।
हालांकि, सरकार का दावा है कि क्रूड के लिए स्टॉक ठीक-ठाक है। देश के पास करीब 25 दिन की मांग पूरी करने लायक क्रूड का भंडार है। गैसोइल, पेट्रोल और एलपीजी का भी रिफाइनरियों के पास 25 दिन का स्टॉक है।
लेकिन नेचुरल गैस की स्थिति थोड़ी टाइट है। भारत का सबसे बड़ा सप्लायर कतर ने सोमवार को एलएनजी प्रोडक्शन रोक दिया। अब सिर्फ कुछ दिनों का एलएनजी स्टॉक बचा है। सूत्र ने कहा, “अगर कतर कुछ दिनों में दोबारा शुरू नहीं करता तो हमें अल्टरनेटिव ढूंढने पड़ेंगे और कुछ अलग कदम उठाने होंगे।”
इसके चलते सोमवार से ही कुछ इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को गैस की सप्लाई कम कर दी गई है। हालांकि, सूत्र ने ये नहीं बताया कि क्या रिफाइनरियां रूसी ऑयल ज्यादा खरीदेंगी। हाल के महीनों में अमेरिका के साथ ट्रेड डील और ट्रंप के टैरिफ के डर से रूसी ऑयल की खरीदारी कम की गई थी।
(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)