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ट्रंप के एक फैसले से ‘टूटा’ तेल: ईरान पर हमले रुकने की खबर से 10% गिरे दाम, भारत के लिए बड़ी राहत

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ईरान पर अमेरिकी हमले रुकने से कच्चे तेल के दाम गिर गए हैं, जिससे भारत को एलपीजी आपूर्ति और होर्मुज जलमार्ग में फंसे टैंकरों को लाने में बड़ी राहत मिली है

Last Updated- March 23, 2026 | 10:56 PM IST
crude oil
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा सोमवार को ईरान के विरुद्ध सैन्य हमले पांच दिनों के लिए रोकने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई है। अमेरिका के मुताबिक दोनों देशों के बीच ‘सार्थक बातचीत’ के बाद ये हमले रोके जा रहे हैं।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखी एक पोस्ट में कहा, ‘मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि अगले पांच दिनों तक ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर कोई सैन्य हमला नहीं किया जाए बशर्ते कि हमारी चल रही चर्चाओं की कामयाबी बनी रहे।’

उनकी घोषणा के बाद मानक ब्रेंट क्रूड की दरों में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट आई और यह 20 मार्च के 106.88 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर भारतीय समयानुसार शाम 7.30 बजे 96.06 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। हालांकि बाद में यह दोबारा 101 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत मार्च में औसतन 119 डॉलर प्रति बैरल रही है। यह पिछले महीने के 60 डॉलर प्रति बैरल से बहुत अधिक है।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई तब रोकी गई है जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो उसकी ऊर्जा अधोसंरचना पर हमला किया जाएगा।

ईरान और ओमान के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट  बंद होने के बावजूद, भारतीय ध्वज वाले दो तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) टैंकर जग वसंत और पाइन गैस इस जलमार्ग को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ये दोनों टैंकर 92,000 टन (एमटी) एलपीजी लेकर आ रहे हैं। जहाज़ों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं। ये 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारत पहुंच सकते हैं।

इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट में रुके जहाजों में से दो एलपीजी टैंकर और कच्चे तेल का एक कार्गो भारत पहुंच चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक एलपीजी टैंकरों को भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) ने चार्टर किया है। कच्चे तेल की खेप इंडियन ऑयल (आईओसीएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (आरआईएल) और पीजीएन इंटरनेशनल से जुड़ी है, जबकि एलएनजी जहाज पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा चार्टर किया गया है। सिन्हा ने कहा कि सरकार रेफर कंटेनरों (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर) की स्थिति पर भी नजर रख रही है, जिनका उपयोग खराब हो सकने लायक वस्तुओं और ताप संवेदी चिकित्सा सामान के लिए किया जाता है। भारत के नौवहन नियामक ने पिछले सप्ताह उद्योग को बताया कि संकट के बीच कंटेनरों की वापसी में देरी आगे चलकर कमी का कारण बन सकती है।

सिन्हा ने कहा कि इन जहाजों के नाविकों के पास पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य आवश्यक राशन उपलब्ध हैं। इस अखबार ने शनिवार को रिपोर्ट किया था कि कुछ जहाजों ने ताजे पानी और राशन की गंभीर कमी की सूचना दी थी।

आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए भारत ने अमेरिका से एलपीजी खरीद बढ़ा दी है। समुद्री खुफ़िया फर्म केप्लेर के अनुसार, वर्तमान में 13 टैंकर लगभग 3,50,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर आ रहे हैं। पहली बार भारत ने अर्जेंटीना से भी एक एलपीजी खेप बुक की है, जिसमें 19,486 टन एलपीजी है और इसके मार्च के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है।

इस बीच, पश्चिम एशिया से एलपीजी आपूर्ति संघर्ष के कारण तेजी से घटी है। वर्तमान में केवल 11 टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं और इनमें 1,92,734 टन एलपीजी है। इनमें से अधिकांश खेप संघर्ष शुरू होने से पहले रवाना हुई थी।

एलपीजी की कमी के बीच सरकार ने उपभोक्ताओं से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने का आग्रह किया है। मार्च के पहले तीन सप्ताह में गैस कंपनियों ने 3.5 लाख से अधिक घरेलू और वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शन जारी किए हैं।

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First Published - March 23, 2026 | 10:56 PM IST

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