मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई चेन में आई रुकावटों का असर अब भारतीय बाजार पर दिखने लगा है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) ने औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाले डीजल यानी ‘इंडस्ट्रियल डीजल’ की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली में इंडस्ट्रियल डीजल के दाम 87.67 रुपये प्रति लीटर से सीधे उछलकर 109.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। यह करीब 22 रुपये प्रति लीटर यानी 25 फीसदी से भी ज्यादा की एकमुश्त बढ़ोतरी है। हालांकि, आम वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में आए इस जोरदार उछाल का सबसे ज्यादा असर उन उद्योगों पर पड़ेगा जो थोक में ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में ईंधन लागत बढ़ने से उत्पादन और परिवहन का खर्च बढ़ना तय है। जानकारों का मानना है कि जब सामान बनाने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने का खर्च बढ़ेगा, तो अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ेगा और बाजार में विभिन्न उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
ईंधन की कीमतों में इस आग की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में आई अस्थिरता को माना जा रहा है। मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने दुनिया भर की तेल सप्लाई को जोखिम में डाल दिया है। विशेष रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में उपजे संकट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छूने के बाद फिलहाल 108 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।
सिर्फ इंडस्ट्रियल डीजल ही नहीं, बल्कि प्रीमियम श्रेणी के पेट्रोल के दामों में भी इजाफा हुआ है। दिल्ली में 95-ऑक्टेन वाले प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 101.89 रुपये हो गई है, जो पहले 99.89 रुपये थी। हालांकि, सरकार का कहना है कि प्रीमियम पेट्रोल की कुल खपत देश में मात्र 2 से 4 फीसदी ही है, इसलिए इसका असर बहुत बड़े वर्ग पर नहीं होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आम आदमी के इस्तेमाल वाले सामान्य पेट्रोल (91-92 ऑक्टेन) और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं।
देश में सामान्य पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां कच्चा तेल महंगा होने पर नुकसान खुद सहती हैं और सस्ता होने पर पिछला घाटा पूरा करती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, तेल कंपनियां स्वतंत्र रूप से कीमतें तय करने के लिए अधिकृत हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता फिलहाल उपभोक्ताओं को बड़े झटकों से बचाना है। पिछले वित्त वर्ष में तेल कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया था, जिसकी बदौलत वे फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार के इस दबाव को झेलने की स्थिति में हैं। सरकार बाजार पर पैनी नजर रख रही है, लेकिन जब तक कच्चे तेल की कीमतों में कोई बहुत बड़ा विस्फोट नहीं होता, तब तक सामान्य खुदरा कीमतों में बदलाव की कोई तत्काल योजना नहीं दिख रही है।