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ट्रंप टैरिफ से संकट में आई चीनी कंपनियों की भारत से उम्मीद, निर्यातकों को दिया US ऑर्डर पूरा करने का प्रस्ताव

निर्यात ऑर्डर्स में यह वृद्धि ऐसे समय पर हो रही है जब भारत सरकार ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार समझौते को लेकर अपनी बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है।

Last Updated- April 28, 2025 | 10:15 AM IST
US and China

अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से प्रभावित कुछ चीन आधारित कंपनियां अब भारतीय निर्यातकों से संपर्क कर रही हैं ताकि वे उनके अमेरिकी ग्राहकों के लिए ऑर्डर पूरे कर सकें और ग्लोबल ट्रेड वॉर के चलते वैश्विक व्यापार में आए भारी झटकों के बीच अपने ग्राहकों को बनाए रख सकें। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। गुआंगझोउ में चल रहे कैंटन फेयर (जो दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार मेला है) में कई भारतीय कंपनियों से चीनी कंपनियों ने संपर्क किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने एक इंटरव्यू में बताया कि चीनी कंपनियों ने भारतीय फर्मों से उनके अमेरिकी ग्राहकों को माल सप्लाई करने का प्रस्ताव दिया है। इसके बदले में भारतीय कंपनियां बिक्री से होने वाले मुनाफे का एक कमीशन चीनी कंपनियों को देंगी।

भारतीय निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद

अमेरिका में भेजे जाने वाले अधिकांश चीनी निर्यातों पर अब 145% का टैरिफ लगाया जा रहा है। इसके मुकाबले, भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर फिलहाल 10% टैक्स लगाया जाता है, जिसे जुलाई में बढ़ाकर 26% किया जा सकता है अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपनी रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी को 90 दिन की रोक के बाद लागू करते हैं।

ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब चीनी निर्यातकों को टैरिफ का सामना करना पड़ा था, तब कई कंपनियों ने वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का रुख किया था। कुछ ने वहां फैक्ट्रियां स्थापित कीं तो कुछ ने थाईलैंड जैसे देशों के जरिए अपना माल अमेरिका भेजा। हालांकि इस बार ट्रंप ने वियतनाम जैसे देशों पर भी 46% का जवाबी टैरिफ लगा दिया है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के पास यह अवसर है कि अमेरिका के लिए भेजे जाने वाले और ज्यादा ऑर्डर अब उनकी ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

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को-ब्रांडिंग के जरिए माल सप्लाई करें

हालांकि दक्षिण-पूर्व एशिया के विपरीत, भारत सरकार ने चीनी निवेश पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिससे चीन की कंपनियों के लिए भारत में फैक्ट्रियां स्थापित करना या भारत के जरिए अमेरिका में सामान भेजना मुश्किल हो जाता है। अजय सहाय ने बताया कि कैंटन फेयर में भारतीय फर्मों से संपर्क कर चीनी कंपनियों ने प्रस्ताव दिया कि वे अमेरिकी कंपनियों को उनके ब्रांड के तहत या भारतीय कंपनियों के साथ को-ब्रांडिंग के जरिए माल सप्लाई करें।

सहाय के अनुसार, ज्यादातर पूछताछ (queries) हैंड टूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज जैसे क्षेत्रों से आई। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि कुछ अमेरिकी ग्राहक भविष्य में सीधे भारतीय सप्लायर्स से बातचीत शुरू कर सकते हैं। सहाय ने यह भी बताया कि चीनी कंपनियों को दिया जाने वाला कमीशन बायर्स और सप्लायर्स के बीच बातचीत के जरिए तय किया जाएगा।

जालंधर स्थित OayKay Tools, जो ड्रॉप फोर्ज हैमर और कोल्ड स्टैम्प मशीन जैसे हैंड टूल्स का निर्माण करती है, अमेरिका के बाजार में सप्लाई के लिए चीन आधारित अमेरिकी कंपनियों और चीनी कंपनियों दोनों के साथ बातचीत कर रही है। OayKay Tools के एक्सपोर्ट ऑफिसर सिद्धांत अग्रवाल ने कहा, “करीब चार से पांच कंपनियों ने हमसे संपर्क किया है। उनके पास अपना एक ब्रांड नेम है, जिसे बनाए रखना है, इसलिए उन्हें अपने ग्राहकों को सर्विस देनी ही पड़ेगी।”

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भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब

निर्यात ऑर्डर्स में यह वृद्धि ऐसे समय पर हो रही है जब भारत सरकार ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार समझौते को लेकर अपनी बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है। भारत को उम्मीद है कि यह समझौता उसे अमेरिका के हाई टैरिफ से बचाने में मदद करेगा। पिछले हफ्ते भारत दौरे पर आए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों देशों के बीच सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का आह्वान किया। उन्होंने अपने दौरे के दौरान इस बात को रेखांकित किया कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर महत्वपूर्ण प्रगति कर चुके हैं, जिसे इस साल के अंत तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य है।

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इस बीच अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर टकराव बना हुआ है। बीजिंग ने इन ऊंचे टैरिफ दरों को “निर्थक” करार दिया है। ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन चीन के साथ व्यापार पर बातचीत कर रहा है, जबकि बीजिंग ने किसी भी बातचीत के होने से इनकार किया है और अमेरिका से सभी एकतरफा टैरिफ वापस लेने की मांग की है।

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका भारतीय कंपनियों को चीनी कंपनियों के छोड़े गए बाजार में कितनी जगह देगा, क्योंकि अमेरिका अब भी चीन पर दबाव बनाए रखना चाहता है ताकि वह कुछ रियायतें दे सके।

इस महीने की शुरुआत में जब कैंटन फेयर शुरू हुआ, तो वहां अमेरिकी उपस्थिति काफी कम नजर आई, लेकिन लगभग हर बातचीत का केंद्र बिंदु नए टैरिफ ही थे। ट्रंप द्वारा दी गई 90 दिनों की राहत ने भी चीनी कंपनियों को दक्षिण-पूर्वी एशिया में अपने निवेश को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर सकें।

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भारतीय कंपनियों के पास बिजनेस बढ़ाने का अवसर

विक्टर फोर्जिंग्स (Victor Forgings) उन भारतीय कंपनियों में से एक है जिसे अमेरिका और चीन के बीच जारी टकराव के बीच अपना कारोबार बढ़ाने का अवसर नजर आ रहा है। यह कंपनी 1954 से प्लायर, हैक्सॉ और हैमर जैसे हैंड टूल्स का निर्माण कर रही है। जालंधर (पंजाब) स्थित विक्टर फोर्जिंग्स के मैनेजिंग पार्टनर अश्वनी कुमार ने कहा, “हमसे न केवल चीनी सप्लायर्स ने अमेरिकी ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने के लिए संपर्क किया है, बल्कि उन अमेरिकी कंपनियों ने भी संपर्क किया है जिनके चीन में प्लांट हैं लेकिन ऊंचे टैरिफ के कारण अब वे सप्लाई नहीं कर पा रही हैं।”

कुमार ने बताया कि कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपना विस्तार करने और दो और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारतीय फर्मों के साथ अपना तकनीकी ज्ञान (टेक्निकल नो-हाउ) साझा करने के लिए तैयार हैं ताकि वे दक्षिण एशियाई बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत कर सकें।

First Published - April 28, 2025 | 9:53 AM IST

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