वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की घोषणा के बाद अब भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश आवक की चुनौतियां खत्म हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब साल भर पहले निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू किया था, तब भी भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत थी।
नए संसद भवन में अपने दफ्तर में बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने कहा, ‘बुनियादी वृहद आर्थिक संकेतक तब मजबूत थे, बाद में मजबूत रहे और अब भी मजबूत हैं। मगर निवेश की आवक के लिए कुछ और चाहिए। अगर आप दोनों देशों के प्रमुखों के बीच परसों फोन पर हुई बातचीत (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच 2 फरवरी की फोन वार्ता) पर प्रतिक्रिया देखें तो पता चल जाएगा कि मौसम कितना बदल गया है। बड़ें फंडों को देखिए.. और देखिए कि हवा अब कितनी बदल गई है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि देश में निवेश आएगा।’
सीतारमण ने कहा कि भारत जल्द ही सीमा शुल्क में सुधार का एक और दौर शुरू करेगा। इससे संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2027 के बजट में घोषित सीमा शुल्क में कटौती प्रस्तावित बड़ी कवायद की पहला किस्त थी। उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क की व्यवस्था में कई स्तर हैं, जिन्हें सरकार सुधारों को एक साथ पूरा करने के बजाय जानबूझकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से कर रही है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘मैं यह सब इस बजट में कर सकती थी। मगर जितने पर पूरा भरोसा था उसे किया गया। बाकी के लिए हम जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। कुछ बदलाव तृतीयक संशोधनों के जरिये भी लाए जा सकते हैं। या ऐसा कहें कि मेरे पास अभी कुछ और भी है, जिसे मैं बाद में एक साथ लाऊंगी। मगर जितनी जल्दी हो उतना अच्छा।’
वित्त वर्ष 2026 के बजट में सीमा शुल्क के स्लैब की संख्या 15 से घटाकर 8 करने के बाद वित्त मंत्री ने दुर्लभ खनिजों, स्वच्छ ऊर्जा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों सहित कई उत्पादों पर बुनियादी सीमा शुल्क में कटौती की थी। वित्त मंत्री ने कहा कि सीमा शुल्क में सुधार बुनियादी तौर पर आयकर से अलग है क्योंकि इसमें कई अलग-अलग पहलू शामिल होते हैं।
सीतारमण ने कहा कि सरकारी बैंकों का विलय बैंकिंग पर प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों का इंतजार किए बिना कभी भी हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘इसे मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी है।’
वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि वित्त वर्ष 2027 के लिए बजट में राजकोषीय घाटे को कम करने की गति थोड़ी धीमी है मगर वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में थोड़ी गुंजाइश बनाए रखना जरूरी था।