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BFSI Summit: भारत का वित्तीय क्षेत्र सबसे मजबूत स्थिति में, सरकार और आरबीआई ने दी जिम्मेदार वृद्धि की नसीहत

बैंकिंग क्षेत्र में आत्मसंतुष्टि, ऋण गुणवत्ता और साइबर सुरक्षा शीर्ष चुनौतियां हैं: नागराजू

Last Updated- October 29, 2025 | 11:47 PM IST
BFSI

बिज़नेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट 2025 आज शानदार तरीके से शुरू हुआ, जिसमें वित्त और बैंकिंग जगत की प्रमुख हस्तियों ने अस्थिर वैश्विक पृष्ठभूमि में भारत की विकास गाथा पेश की। मुंबई में आयोजित तीन दिन के इस कार्यक्रम के पहले दिन शीर्ष अधिकारियों, बैंकरों, अर्थशास्त्रियों और विचारकों ने करीब 15 सत्रों में अपने महत्त्वपूर्ण विचार साझा किए।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत का वित्तीय सेवा क्षेत्र इस समय अब तक की सबसे मजबूत स्थिति में है लेकिन इस क्षेत्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि मौजूदा मजबूती और स्थिरता के कारण बैंकिंग क्षेत्र में आत्ममुग्धता और ऋण अंडरराइटिंग की समस्या न हो।

नागराजू ने आज कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले साल अभी तक का सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया था और शेयरधारकों को उन्होंने रिकॉर्ड लाभांश भी दिया है। नागराजू ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के एके भट्टाचार्य के साथ बातचीत में कहा, ‘बीएफएसआई क्षेत्र की वित्तीय मजबूती प्रावधान कवरेज अनुपात से पता चलती है जो 94 फीसदी से अधिक है जबकि 2014-15 में यह 48 से 49 फीसदी था।’

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का वित्तीय और परिचालन सुधार हाल के वर्षों में भारतीय वित्तीय क्षेत्र की मुख्य उपलब्धि रही है और अब वे समूचे बीएफएसआई क्षेत्र के लिए मानक स्थापित कर रहे हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आ​स्तियां (एनपीए) उनकी कुल परिसंपत्ति का केवल 2.2 फीसदी रह गई थीं जो कुछ साल पहले दो अंक में थीं। इसी तरह सरकारी बैंकों की शुद्ध एनपीए भी घटकर महज 0.5 फीसदी रह गई है जो अभी तक सबसे कम है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में नागराजू ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बढ़ रही है। उन्होंने कहा, ‘सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातार 6.5 फीसदी के आसपास रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत चमकता सितारा बना हुआ है।’

बीएफएसआई उद्योग के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर नागराजू ने कहा कि देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि मौजूदा मजबूती और स्थिरता बैंकिंग क्षेत्र में आत्मसंतुष्टि का कारण न बने। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने द्वारा बनाए गए संस्थानों को संरक्षित करना होगा और फिर उनका विस्तार करने का प्रयास करना होगा। यह पहला मूलभूत सिद्धांत है। हमें अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को ऋण देने का प्रयास करना चाहिए।’

बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को शिक्षा ऋण मिल आसानी से सके। उन्होंने कहा, ‘छात्रों को ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि वे आर्थिक रूप से सक्षम बन सकें और जल्दी से कर्ज चुका सकें।’ उन्होंने आगे कहा कि बैंकों की प्राथमिकता जन शिकायतों और साइबर सुरक्षा का समाधान भी होना चाहिए।

सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आयकर और वस्तु एवं सेवा कर में राहत की घोषणा से चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। उन्होंने, ‘ साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी शुल्क को लेकर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को लेकर चिंता थी मगर अब लोग सोच रहे हैं कि वृद्धि दर 7 फीसदी या उससे ज्यादा रहेगी।’

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने वित्तीय क्षेत्र को बढ़ते साइबर अपराध के प्रति आगाह करते हुए कहा कि डिजिटल अरेस्ट के जरिये कई बुजुर्गों की गाढ़ी कमाई लूट ली जाती है। ऐसे में बैंकों का दायित्व है कि वे इन मामलों पर तत्काल और संवेदनशीलता के साथ ध्यान दें।

सीईए ने कहा, ‘यह बैंकों का दायित्व है और खुद अपनी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है कि वे डिजिटल अरेस्ट के मामले में काफी गंभीरता से ध्यान दें। अगर ऐसा नहीं किया गया तो लोग अपनी जमा रकम को बैंक से निकालकर गद्दे के नीचे रखने जैसी प्रवृत्ति को अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इससे नकदी का प्रचलन बढ़ने और मध्यस्थ के तौर पर बैंकों की भूमिका कम होने की आशंका है। डिजिटल अरेस्ट के प्रति गंभीरता दिखाना बैंकिंग समुदाय के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे बैंकिंग प्रणाली की बुनियाद कमजोर हो सकती है।’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि वह पहले भी कई बार कह चुकी हैं कि भारत 6.5 फीसदी की दर से अच्छी वृद्धि कर रहा है। इस साल के लिए 6.8 फीसदी वृद्धि का अनुमान है, लेकिन केवल वही हमारी मंजिल, क्षमता अथवा आकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘नीतिगत पहल करने की गुंजाइश बरकरार है लेकिन वह समय एवं परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। राजकोषीय नीति ने वृद्धि को काफी सहारा दिया है। ऐसा मुख्य तौर पर दो चैनलों- कर प्रणाली में निरंतर सुधार और राजस्व व्यय से पूंजीगत व्यय की ओर खर्च में निर्णायक बदलाव- के जरिये हुआ है।’

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने ऋण वितरण के बारे में कहा कि आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि इसमें दो अंकों में वृद्धि हो रही है जो उचित भी है। शेट्टी ने एक फायरसाइड चैट में कहा, ‘एमएसएमई क्षेत्र में ऋण वितरण तेजी से बढ़ रहा है। आज एमएसएमई को उधार देने के लिए बैंकों में काफी आत्मविश्वास है क्योंकि आंकड़े उपलब्ध होने से उनका कारोबारी मॉडल बिल्कुल स्पष्ट है। कृषि क्षेत्र से भी ऋण की काफी मांग आ रही है। दोनों क्षेत्रों में 16 से 17 फीसदी वृद्धि दिख रही है।’

जियो फाइनैंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक केवी कामत ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने वित्तीय प्रणाली को काफी सहज बना दिया है। इससे बचत विभिन्न प्रकार के निवेश, जमा एवं खपत चैनलों में जा रही है।

कामत ने एक फायरसाइड चैट में कहा, ‘अब भारत में आम आदमी पूछ रहा है कि क्या इस प्रकार की गतिविधियों के लिए बैंक ही एकमात्र ढांचा हैं। लोग अपनी बचत को निवेश योजनाओं में लगा रहे हैं जो जोखिम एवं कर को समायोजित करने के साथ-साथ अधिकतम रिटर्न दे रहे हैं। इस बदलाव पिछले 4-5 वर्षों में रफ्तार पकड़ी है। इसमें पेंशन प्रणाली, बीमा और म्युचुअल फंड उद्योग जैसे ढांचागत एनेबलर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूंजी बाजार अब बैंकिंग प्रणाली के समानांतर काम कर रहा है। इससे ग्राहकों को अधिक विकल्प मिल रहे हैं।’

First Published - October 29, 2025 | 11:42 PM IST

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