facebookmetapixel
Advertisement
4000 लोगों की जा सकती है नौकरी! JLR बड़ी छंटनी की तैयारी में, बढ़ते खर्च से कंपनी परेशानसुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें: CBI ने दर्ज की FIR, फर्जी कागज दिखाकर ₹1,322 करोड़ के फ्रॉड का आरोपएक शेयर पर ₹60 का मोटा डिविडेंड! पावर ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सNPS में ‘नो मिनिमम इन्वेस्टमेंट’ का क्या है सच? एक्सपर्ट से समझें, किसे मिलेगा फायदा और किसे नहींटाटा मोटर्स खरीदेगी इटली की मशहूर इवेको ग्रुप, €3.82 अरब की डील से ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा दबदबामोटी कमाई का चांस! अगले हफ्ते लगभग 150 कंपनियां देंगी डिविडेंड, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकाजन्माष्टमी पर बाजारों में बंपर खरीदारी की उम्मीद, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के व्यापार का अनुमान18 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 37.5 अरब डॉलर खर्च, फिर भी ट्रंप ने ईरान युद्ध को बताया ‘छोटी बात’लाइट, कैमरा और एक्शन: कैसे साल 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय सिनेमा का पूरा कारोबार बदल दिया?भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों और शहरों को खुद जुटाना होगा फंड: भार्गव दासगुप्ता

मैन्युफैक्चरिंग PMI अक्टूबर में 8 माह के निचले स्तर पर: S&P Global

Advertisement

S&P Global के सर्वेक्षण के मुताबिक अक्टूबर में नए ऑर्डर के बावजूद प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ने से वृद्धि में सुस्ती रही।

Last Updated- November 01, 2023 | 10:01 PM IST
manufacturing PMI

भारत में विनिर्माण गतिविधियां अक्टूबर में आठ महीने के निचले स्तर पर रहीं। यह गिरावट नए ऑर्डर में नरमी और उपभोक्ता सामान के उपक्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि में कमी से आई। एसऐंडपी के बुधवार को जारी नवीनतम सर्वेक्षण के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमई) अक्टूबर में लगातार दूसरे माह गिरकर 55.5 पर आ गया। यह सितंबर में 57.5 था।

सर्वेक्षण के मुताबिक अक्टूबर में नए ऑर्डर के बावजूद प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ने से वृद्धि में सुस्ती रही। इस क्रम में वैश्विक बिक्री की वृद्धि ऐतिहासिक रूप में मजबूत रहने के बाद भी अक्टूबर में इसकी बढ़त चार महीने के निचले स्तर पर आ गई।

अक्टूबर के पीएमआई आंकड़े में लगातार 28वें महीने 50 से ऊपर रहा जो संकुचन से विस्तार को अलग करने का संकेत है। पीएमआई सूचकांक का 50 से ऊपर होने का मतलब विस्तार है जबकि 50 से नीचे होना संकुचन को दर्शाता है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, ‘तीसरी तिमाही के शुरू में आउटपुट बढ़ा। इससे दो वर्षों से जारी विस्तार कायम रहा। मार्केट की सकारात्मक स्थितियों और नए ऑर्डर बढ़ने के कारण कंपनियों की बढ़त जुड़ी रही। हालांकि प्रतिस्पर्धा बढ़ने और कुछ क्षेत्रों में मांग कम होने से वृद्धि आठ महीने के निचले स्तर पर रही। आंकड़ों पर बारीक नजर डालने से जानकारी मिलती है कि उपभोक्ता सामान क्षेत्र में खासतौर पर सुस्ती आई।’

एसऐंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में अर्थशास्त्र की एसोसिएट निदेशक पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक वातावरण होने के बावजूद पर्याप्त वृद्धि हासिल की।

उन्होंने कहा, ‘नया ऑर्डर सूचकांक एक साल के निचले स्तर पर फिसल गया। कुछ कंपनियों ने अपने उत्पादों की मौजूदा मांग को लेकर चिंता जाहिर की है। उपभोक्ता सामान में सबसे ज्यादा सुस्ती दर्ज हुई। उपभोक्ता सामान की बिक्री, उत्पादन, निर्यात, इनपुट इनवेंटरी और खरीदारी के स्तर पर खासी सुस्ती रही।

नौकरियों की बात की जाए तो नए कारोबार में नियुक्तियां बढ़ी। सर्वेक्षण के मुताबिक चार प्रतिशत से भी कम कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों को काम पर रखा और 95 प्रतिशत ने कार्यबल संख्या अपरिवर्तित रही। रोजगार सृजन की दर मामूली रूप से अप्रैल के बाद से सबसे धीमी है।

कीमतों की बात करें तो लागत दबाव बढ़ा है, जबकि ‘आउटपुट’ मूल्य मुद्रास्फीति कम हो गई। पूंजीगत सामान निर्माताओं ने वृद्धि को नेतृत्व प्रदान किया जिससे पूरे विनिर्माण क्षेत्र को गति मिली। पूंजीगत सामान निर्माताओं को नए ऑर्डर मिले और उन्होंने विस्तार से त्वरित वृद्धि हासिल की।

Advertisement
First Published - November 1, 2023 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement