facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

वित्त मंत्रालय ने दी चेतावनी: महंगाई के ऊपरी जोखिम से नजरें न हटाएं, भारत के लिए सतर्क रहने का समय

वित्त मंत्रालय ने आगाह किया कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत को तेल कीमतों और महंगाई के जोखिम के बीच आर्थिक वृद्धि का संतुलन बनाए रखने की आदत डालनी होगी।

Last Updated- June 27, 2025 | 10:33 PM IST
Economy Growth
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ईरान और इजरायल के बीच हाल में हुए अल्पावधि के युद्ध के बाद देश की आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय स्थिति से जुड़ा जोखिम भले ही कम हो गया हो लेकिन वित्त मंत्रालय का कहना है कि भारत को आने वाले कुछ समय तक संतुलन साधने की आदत डालनी होगी। वित्त मंत्रालय ने कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक संघर्षों को महंगाई के लिए ऊपरी जोखिम बताया है।

Also Read:  GDP का 1.3% अधिशेष: सेवा निर्यात ने बढ़ाया दम, चालू खाते में भारत को $13.5 अरब का अधिशेष

आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग के अधिकारियों ने मई 2025 के मासिक आर्थिक समीक्षा  में लिखा, ‘शुक्र है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम हो गया है और तेल की कीमतें तेजी से गिरी हैं। तेल की वैश्विक आपूर्ति पर्याप्त है लेकिन बीमा लागत और रणनीतिक समुद्री मार्गों के संभावित रूप से बंद होने का अनुमानित जोखिम, भारत के लिए तेल कीमतें बढ़ा सकता है। भारत के लिए इसमें जोखिम की स्थिति बन सकती है।’वित्त मंत्रालय ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच सतर्क और आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखते हुए कहा कि भारत कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है और भू-राजनीति ने देश को ऐसे अवसर दिए हैं जो पहले मुश्किल लगते थे।

Also Read: SEBI ने RPT के लिए कंपनियों की सूचना प्रक्रिया में किया बदलाव, बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही

समीक्षा में कहा गया है, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक समय हो सकता है।’ समीक्षा में निर्माण सामग्री और वाहन बिक्री जैसे क्षेत्रों में नरमी के संकेत की बात भी दर्ज की गई। मई की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है, जो मजबूत घरेलू मांग, मुद्रास्फीति के कम होते दबाव, एक लचीले बाहरी क्षेत्र और स्थिर रोजगार के हालात के समर्थन से एक अशांत वैश्विक वातावरण के बीच सामान्य बने रहने की क्षमता दिखा रहा है।’वित्त वर्ष 2025 में, भारत की वास्तविक जीडीपी 6.5 प्रतिशत बढ़ी, जो दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुरूप है। समीक्षा में कहा गया है कि यह सकारात्मक रुझान वित्त वर्ष 2026 में भी जारी रहने की संभावना है, जिसमें शुरुआती उच्च-आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गतिविधि सामान्य बनी हुई है।

 

First Published - June 27, 2025 | 10:26 PM IST

संबंधित पोस्ट