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क्या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके ऑनलाइन खर्च या लाइफस्टाइल नजर रखता है? सरकार ने दिया जवाब

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ITD ने स्पष्ट किया कि बड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग सिर्फ कानून के पालन करने के लिए की जाती है और आम नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों या खर्चों पर कोई निगरानी नहीं की जाती

Last Updated- January 05, 2026 | 6:03 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के बीच सरकार ने साफ किया है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (ITD) लोगों की निजी डिजिटल गतिविधियों, ऑनलाइन खर्चों या लाइफस्टाइल की आदतों पर नजर नहीं रखता। इंस्टाग्राम पर ‘bingewealth’ नाम के एक अकाउंट की हालिया पोस्ट में दावा किया गया था कि ईमेल, सोशल मीडिया, ट्रेडिंग ऐप्स और निजी अकाउंट्स जैसी व्यक्तिगत डिजिटल गतिविधियों पर टैक्स अधिकारी निगरानी रख सकते हैं। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इसे गलत और भ्रामक बताया है।

डिजिटल गतिविधियों पर कोई निगरानी नहीं

ITD के पास व्यक्तिगत खर्चों या ऐप आधारित लेन-देन पर नजर रखने का कोई तरीका नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 285BA के तहत स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस (SFT) के जरिए बड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग होती है, जो सिर्फ सामान्य अनुपालन (कानून का पालन) का हिस्सा है। ये रिपोर्ट बैंक, रजिस्ट्रार और अन्य तय संस्थाओं से आती हैं। इसमें लोगों का प्रोफाइल बनाना या उनकी ऑनलाइन आदतों पर नजर रखना शामिल नहीं है।

सेक्शन 247 की ताकत: सिर्फ खास मामलों में, सामान्य नहीं

1 अप्रैल 2026 से कुछ खबरों में कहा गया था कि ITD निजी डिजिटल जगहों तक पहुंच बना सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स एक्ट 2025 की सेक्शन 247 सिर्फ सर्च और सर्वे ऑपरेशंस के दौरान लागू होती है। ये अधिकार गंभीर टैक्स चोरी के मामलों में ही इस्तेमाल होते हैं और आम मूल्यांकन या ईमानदार नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं।

Also Read: Revised ITR की डेडलाइन निकल गई: AY 2025-26 में अब भी इन तरीकों से मिल सकता है रिफंड

  • डॉक्यूमेंट जब्त करने की पुरानी व्यवस्था इनकम टैक्स एक्ट 1961 में भी थी, जो अब भी सिर्फ जांच के दौरान सीमित है।
  • बिना ठोस सबूत के औपचारिक सर्च शुरू किए ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट्स या ट्रेडिंग ऐप्स तक पहुंच नहीं बनाई जा सकती।

टैक्सपेयर्स को क्या जानना चाहिए?

  • रोजमर्रा के लेन-देन, ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल खरीदारी पूरी तरह निजी रहती हैं।
  • SFT के तहत रिपोर्ट होने वाले बड़े लेन-देन सिर्फ अनुपालन के लिए हैं।
  • नियम मानने वाले नागरिकों पर कोई निगरानी या व्यवहार ट्रैकिंग नहीं होती।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर घूम रही गलत बातों को दूर करने के लिए ऐसे स्पष्टीकरण जरूरी हैं, खासकर जब डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ITD की ताकतें काले धन और बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी से लड़ने तक सीमित हैं, न कि आम लोगों के रोजाना खर्चों पर।

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First Published - January 5, 2026 | 6:03 PM IST

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