facebookmetapixel
Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा अब ‘सर्जिकल मास्क’ वाली! AQI 500 के करीब; GRAP IV लागूTrump Tariffs: ग्रीनलैंड पर ट्रंप का अल्टीमेटम, डेनमार्क को टैरिफ की खुली धमकीWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड का डबल अटैक; घना कोहरा, बारिश और बर्फबारी का अलर्टCorporate Action Next Week: अगले हफ्ते बाजार में हलचल, स्प्लिट-बोनस के साथ कई कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड1485% का बड़ा डिविडेंड! Q3 में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद हाल में लिस्ट हुई कंपनी ने निवेशकों पर लुटाया प्यार300% का तगड़ा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को गिफ्ट, रिकॉर्ड डेट भी फिक्सICICI Bank Q3 Results: मुनाफा 4% घटकर ₹11,318 करोड़ पर, NII में 7.7% की बढ़ोतरीX पर लेख लिखिए और जीतिए 1 मिलियन डॉलर! मस्क ने किया मेगा इनाम का ऐलान, जानें पूरी डिटेलChatGPT में अब आएंगे Ads, अमेरिका के यूजर्स के लिए ट्रायल शुरूलक्ष्मी मित्तल के पिता मोहन लाल मित्तल का निधन, उद्योग और समाज में गहरा शोक

SMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शीतकालीन सत्र में लोकसभा में एसएमसी विधेयक पेश किया और इसे संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया है

Last Updated- January 05, 2026 | 11:10 PM IST
SEBI

अब जबकि प्रतिभूति बाजार संहिता (एसएमसी) विधेयक संसदीय समिति के पास जांच के लिए पहुंच गया है तो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्व चेयरमैन एम. दामोदरन ने सेबी के निवेशक संरक्षण फोकस से हटने पर चिंता जताई है। उन्होंने बाजार नियामक के जरूरत से ज्यादा भारी होने और नाजुक विधेयक पर निर्भर रहने की संभावनाओं को लेकर आगाह किया है।

हालांकि उन्होंने विभिन्न तीन अधिनियमों के एकीकरण की सराहना की है, जिसमें अवधारणा से जुड़े भ्रम और एक दूसरे के दखल को खत्म किया गया है। उन्होंने संहिता में सरलीकरण, ईमानदारी से कामकाज के संचालन और प्रक्रिया और वास्तविक खामियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करने का स्वागत किया। पूर्व चेयरमैन ने बिल के कई पहलुओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत बताई।

उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस फर्म एक्सीलेंस इनेबलर्स के न्यूज़लेटर में टिप्पणी की, सेबी अधिनियम, 1992 की प्रस्तावना में ज्यादा फोकस था क्योंकि इसमें निवेशकों के हितों की रक्षा, बाजार के नियमन और बाजार के विकास का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि इसे धारा 11(1) में स्थानांतरित कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, इस प्रमुख उद्देश्य को प्रस्तावना से हटाकर मात्र एक अनुच्छेद में शामिल करना अनुचित प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा, नियम बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अधिनियम में निहित वास्तविक शक्तियां कहीं नियमों में न चली जाएं। हाल के समय में कई कानूनों में बहुत अधिक सबआर्डिनेट लेजिसलेशन एक बड़ा मसला रहा है। इस तरह के विधेयक किसी विधेयक की कमियां दूर करने का साधन नहीं होते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शीतकालीन सत्र में लोकसभा में एसएमसी विधेयक पेश किया और इसे संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया है। विधेयक में सेबी बोर्ड के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव है जिससे चेयरमैन के अतिरिक्त कम से कम पांच पूर्णकालिक सदस्य हो जाएंगे और छह स्वतंत्र निदेशक होंगे।

उन्होंने कहा, सेबी के मौजूदा आकार को देखते हुए यह संभावना है कि यह शीर्श स्तर पर भारी भरकम संगठन होगा, जिसके परिणामस्वरूप रिपोर्टिंग संरचनाओं में जटिलताएं पैदा होंगी। दामोदरन ने इस बात पर जोर दिया कि सालाना प्रदर्शन की समीक्षा किस प्रकार होगी, इसे बाद में बनाए जाने वाले नियमों और विनियमों पर छोड़ने के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए।

मसौदा संहिता में एक या अधिक सेबी अधिकारियों को लोकपाल के रूप में नामित करने के प्रस्ताव पर सेबी के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि बाजार नियामक के पास निवेशकों की शिकायतों से निपटने के लिए पहले से ही काफी विस्तृत तंत्र मौजूद है। उन्होंने कहा, अगर यह माना जाता है कि मौजूदा व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही है तो तार्किक कदम लोकपाल के रूप में नई संस्था बनाने के बजाय मौजूदा व्यवस्था में ही कुछ बदलाव या सुधार करना होता।

संहिता में कहा गया है कि जांच अधिकारी को जांच 180 दिन के भीतर पूरी की जानी चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि के भीतर पेश नहीं की जाती है तो जांच अधिकारी को बोर्ड को जांच की स्थिति से अवगत कराना होगा और देरी के कारणों का विवरण देना होगा। साथ ही पूर्णकालिक सदस्य से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करना होगा।

दामोदरन ने कहा, यह अजीब लगता है कि स्टेटस रिपोर्ट बोर्ड के सामने पेश की जाए और संबंधित पूर्णकालिक सदस्य को समय विस्तार देने का अधिकार दिया जाए। निश्चित रूप से, स्टेटस का पता लगाने और आवश्यकता पड़ने पर विस्तार देने का यह पूरा मामला संबंधित पूर्णकालिक सदस्य पर छोड़ा जा सकता था।

पूर्व प्रमुख ने कहा कि एक दिलचस्प प्रावधान धारा 11(3) में है, जिसमें कहा गया है कि बोर्ड अपने प्रदर्शन और कामकाज की समीक्षा करेगा, जिसमें इस संबंध में बनाए गए नियमों की आनुपातिकता और प्रभावशीलता भी शामिल है। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि संगठन के प्रदर्शन की समीक्षा और नियमों के नियामकीय प्रभाव के आकलन को एक ही प्रावधान में शामिल कर दिया गया है।

First Published - January 5, 2026 | 10:40 PM IST

संबंधित पोस्ट