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Economic Survey में अनुमान: वित्त वर्ष 2027 में 7.2% तक जा सकती है भारत की GDP रफ्तार

समीक्षा में कहा गया है, घरेलू कारकों की प्रमुख भूमिका और व्यापक आर्थिक स्थिरता मजबूत होने के साथ वृद्धि से जुड़े जोखिमों का संतुलन मोटे तौर पर समान बना हुआ है

Last Updated- January 29, 2026 | 10:27 PM IST
GDP
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्थिक समीक्षा ने वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है  क्योंकि अनिश्चित आर्थिक माहौल के बीच घरेलू मांग और निवेश में मजबूती की उम्मीद है।

समीक्षा में कहा गया है, घरेलू कारकों की प्रमुख भूमिका और व्यापक आर्थिक स्थिरता मजबूत होने के साथ वृद्धि से जुड़े जोखिमों का संतुलन मोटे तौर पर समान बना हुआ है। इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वैश्विक अनिश्चितता के बीच स्थिर वृद्धि का दृष्टिकोण है, जिसके लिए सावधानी की जरूरत है, न कि निराशा होने की।

समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता इस साल समाप्त होने की उम्मीद है और इससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता घटाने में मदद मिल सकती है। समीक्षा में जोर देकर कहा गया है कि घरेलू अर्थव्यवस्था स्थिर है, लेकिन बाहरी अनिश्चितताओं को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय और नीतिगत विश्वसनीयता बनाए रखना अहम है।

वित्त वर्ष 2026 को असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा गया कि इस दौरान दंडात्मक टैरिफ ने निर्यातकों के लिए दबाव पैदा किया, कारोबारी भरोसे को प्रभावित किया। लेकिन सरकार ने जीएसटी को तर्कसंगत बनाया और नियमन में ढील जैसे सुधारों को बढ़ावा दिया। सर्वेक्षण ने वित्त वर्ष 2027 को समायोजन का वर्ष बताया।

समीक्षा में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में घरेलू मांग और निवेश आर्थिक विकास को मजबूती देते रहेंगे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 6.5 फीसदी थी। ये अनुमान लगातार बाहरी चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाते हैं।

समीक्षा के अनुसार पिछले तीन वर्षों में सुधारों की गति के साथ-साथ कॉरपोरेट और वित्तीय क्षेत्र की मजबूत बैलेंस शीट और रोजगार के औपचारिकरण में वृद्धि ने भारत की मध्यम अवधि की संभावित वृद्धि को 7 फीसदी तक बढ़ा दिया है।

समीक्षा में कहा गया है कि केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर क्रियान्वयन और समन्वय इस उच्च विकास दर को बनाए रखने और इसे और भी आगे ले जाने के लिए अहम होगा।

राज्यों में राजकोषीय अनुशासन में सुधार

आर्थिक समीक्षा के अनुसार राज्य-स्तरीय ऋण और घाटे में उभरते रुझान निरंतर समायोजन की जरूरत बताते हैं, साथ ही ये रुझान कुछ राज्यों द्वारा बिना शर्त नकद हस्तांतरण कार्यक्रमों पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता जताते हैं।

सर्वेक्षण में राजकोषीय सख्ती को कम करने के लिए बेहतर लक्ष्य, आवधिक समीक्षा और परिणाम-उन्मुख तरीकों की सिफारिश की गई। इसमें स्थायी खर्च वाली प्रतिबद्धताएं खड़ी करने के बजाय उत्पादक क्षमता विस्तार और आय वृद्धि वाली राजकोषीय नीति की बात कही गई है।  समीक्षा में कहा गया है, 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें केंद्र-राज्य के राजकोषीय संबंधों को आकार देने, संसाधन हस्तांतरण की मात्रा और संरचना को प्रभावित करने और इस प्रकार राज्य-स्तरीय राजकोषीय परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

First Published - January 29, 2026 | 10:24 PM IST

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