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Economic Survey 2026: मैन्युफैक्चरिंग को राष्ट्रीय मिशन बनाने पर जोर, जीवीसी एकीकरण से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

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मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि यह सेक्टर रोजगार, उत्पादकता, तनकीकी शिक्षण, निर्यात और रणनीतिक मजबूती का केंद्र है

Last Updated- January 29, 2026 | 10:31 PM IST
India Manufacturing PMI June 2026

आर्थिक समीक्षा में प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार और वैश्विक मूल्य श्रृंखला (जीवीसी) से गहरे एकीकरण वाली विनिर्माण नीति की जरूरत पर जोर दिया गया है। भूराजनीतिक अस्थिरता और तेज तकनीकी बदलाव को देखते हुए समीक्षा में विनिर्माण को रणनीतिक राष्ट्रीय संपदा करार दिया गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि यह सेक्टर रोजगार, उत्पादकता, तनकीकी शिक्षण, निर्यात और रणनीतिक मजबूती का केंद्र है और ऐसे में इसे मिशन के रूप में लेने की जरूरत है।

हाल में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के महत्त्व का उल्लेख करते हुए आर्थिक समीक्षा की प्रस्तावना में नागेश्वरन ने कहा है, ‘मुद्रा की दीर्घकालिक स्थिरता और ताकत बनाए रखने के लिए विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात महत्त्वपूर्ण है। जब तक आवश्यक वस्तुओं और विनिर्माण वस्तुओं की आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती है, तब तक विनिर्माण क्षेत्र बहुत रणनीतिक महत्त्व का है।’

सीईए ने कहा कि नवाचार, कौशल, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और एमएसएमई को उच्च उत्पादकता वाले विनिर्माण केंद्र के रूप में बनाए जाने पर प्रतिस्पर्धात्मकता निर्भर है। समीक्षा में कहा गया है कि विविधीकरण और क्षमता में वृद्धि करके रणनीतिक लचीलापन लाने की जरूरत होगी, जिसे शोध एवं विकास में निजी क्षेत्र के निवेश, तकनीक अपनाने, कौशल और गुणवत्ता व्यवस्था में वृद्धि का समर्थन हो।
इसमें निर्यात से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में एमएसएमई के महत्त्व का भी उल्लेख किया गया है।

समीक्षा में कहा गया है कि करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये भुगतान में देरी के कारण फंसा हुआ है, जिससे कार्यशील पूंजी पर असर पड़ता है और इससे एमएसएमई की वृद्धि प्रभावित होती है।

जीवीसी के गहन एकीकरण के लिए समीक्षा में क्लस्टर मॉडल को नए सिरे से परिकल्पित करने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें बेहतर तरीके से जुड़े ब्राउनफील्ड स्थलों में बड़े व उच्च क्षमता के क्षेत्र चिह्नित करना और गिफ्ट सिटी में आईएफएससीए जैसे संस्थागत तंत्र को सशक्त बनाना शामिल है, जिससे कि नियामकीय निश्चितता और लचीलापन सुनिश्चित हो सके।

साथ ही इसके मास्टरप्लान में निजी डेवलपरों को शामिल करने प्रमुख बुनियादी ढांचा तैयार करने व उनके परिचालन, बाजार की प्रतिक्रिया और कुशलता सुनिश्चित करने का प्रस्ताव किया गया है। समीक्षा में विकसित विनिर्माण को भारत के लिए उत्पादकता बढ़ाने व निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के अवसर के रूप में चिह्नित किया गया है। इसे राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन रणनीति में एक अतिरिक्त साधन बताया गया है।

सीईए ने उल्लेख किया कि वैश्विक विनिर्माण के मामले में पैमाना और एकीकृत औद्योगिक व्यवस्था के हिसाब से चीन अभी भी केंद्र में है, जिसे देखते हुए उत्पादन के क्षेत्र में पूंजी की लागत कम किए जाने और पूंजी केंद्रित इनपुट के प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है, जिससे कारोबार के स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता पैदा हो सके।

समीक्षा में खासकर इंटरमीडिएटरीज और पूंजीगत वस्तुओं पर शुल्क में कमी करने का पक्ष लिया गया है, जिससे लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है और डीवीसी का एकीकरण गहन हो सकता है।

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First Published - January 29, 2026 | 10:11 PM IST

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