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Economic Survey 2026: सर्विस सेक्टर पर रहेगा भारत की वृद्धि का दारोमदार

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भारत के सेवा क्षेत्र ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि को बुनियादी मदद देना जारी रखा है

Last Updated- January 29, 2026 | 11:20 PM IST
Service Trade

भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि का आधार बना हुआ है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार सेवाओं को उच्च स्तर पर ले जाने वाली तीव्र तकनीकी प्रगति कंपनी और श्रमिक स्तर पर अनुकूलन की गति से अब आगे निकल रही है। इससे कौशल की कमी और व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं।

समीक्षा में यह भी कहा गया है कि सख्त आव्रजन, डेटा संरक्षा, स्थानीयकरण मानदंड और प्रेषण नियमों के साथ, ‘स्थिरता लाने वाली शक्ति’ होने का वादा अब चुनौती के घेरे में आ गया है। भारत के सेवा क्षेत्र ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि को बुनियादी मदद देना जारी रखा है। सेवा निर्यात भारत के बाह्य क्षेत्र का केंद्रीय स्तंभ और वृद्धि का प्रमुख कारक बन गया है।

वित्त वर्ष 23-25 के दौरान सेवा क्षेत्र की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में औसतन हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत थी जबकि यह महामारी से पहले के दौर में 7.4 प्रतिशत थी। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण वैश्विक वस्तु व्यापार में आई सुस्ती के बीच सेवा निर्यात ने महत्त्वपूर्ण सहारा प्रदान किया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में यह भूमिका और भी मजबूत हुई है। इस क्रम में जीडीपी में सेवा निर्यात की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही के 9.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही 10.0 प्रतिशत हो गई है।

समीक्षा में यह बात सामने आई कि एआई वैश्विक सेवा व्यापार को तेजी से आकार दे रहा है। इसमें विशेष रूप से डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं को आकार दे रहा है। सेवाओं पर एआई के प्रभाव का आकलन करने के लिए की गई समीक्षा में यह भी कहा गया कि एआई के प्रसार के चरण के बाद एआई प्रधान सेवाओं का निर्यात अधिक बढ़ा है जबकि एआई से कम प्रभावित सेवाओं का निर्यात कम बढ़ा है। एआई-प्रधान सेवाओं में सॉफ्टवेयर, व्यवसाय और वित्तीय सेवाओं आती हैं।

सर्वेक्षण में विनिर्माण के ‘सेवाकरण’ पर भी चर्चा की गई है। ‘विनिर्माण अधिक प्रौद्योगिकी और डेटा का उपयोग कर रहा है। ऐसे में आईसीटी, वित्त, अनुपालन व बिक्री-पश्चात सहायता जैसी सेवाएं मूल्य सृजन में बढ़ती हिस्सेदारी निभा रही हैं। अंतराष्ट्रीय अनुभव से पता चलता है कि यह एकीकरण मूल्यवर्धन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार बढ़ाने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है।’

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First Published - January 29, 2026 | 11:00 PM IST

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