facebookmetapixel
Advertisement
आतंकवाद के खिलाफ BRICS देश एकजुट, आतंकियों की फंडिंग रोकने पर सहमति; पहलगाम हमले की निंदा कीBRICS ने एकतरफा व्यापारिक कदमों पर जताई चिंता, बातचीत और कूटनीति को बताया अहम रास्ता‘BRICS किसी के खिलाफ नहीं’, बोले PM मोदी: ग्लोबल साउथ अब नियम पालन नहीं नियम बनाने वाला बनेअचानक आई मेडिकल इमरजेंसी में क्यों डगमगा जाती है मध्यम वर्ग परिवारों की सालों की मेहनत की बचत?सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, PM मोदी से मुलाकात में LAC, व्यापार और रिश्तों पर होगी बड़ी चर्चानिवेशकों की बल्ले-बल्ले! अगले हफ्ते 180 से अधिक कंपनियां बांटेंगी डिविडेंड, एक शेयर पर ₹50 पाने का मौका‘संकट न होता तो धीरे होते सुधार’, 1991 की उदारीकरण नीति पर पूर्व योजना आयोग सचिव ने किए कई खुलासेशी चिनफिंग की भारत यात्रा से भारत-चीन संबंधों को मिलेगा नया मोड़, PM मोदी से मुलाकात होगी अहमRBI सितंबर में बेचेगा 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बॉन्ड, बैंकिंग सिस्टम की नकदी घटाने की तैयारीSBI बना रहा नया लोन मॉडल, GST के बिना छोटे कारोबारों को UPI लेनदेन के आधार पर मिलेगा कर्ज

Economic Survey 2026: सर्विस सेक्टर पर रहेगा भारत की वृद्धि का दारोमदार

Advertisement

भारत के सेवा क्षेत्र ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि को बुनियादी मदद देना जारी रखा है

Last Updated- January 29, 2026 | 11:20 PM IST
Service sector

भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि का आधार बना हुआ है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार सेवाओं को उच्च स्तर पर ले जाने वाली तीव्र तकनीकी प्रगति कंपनी और श्रमिक स्तर पर अनुकूलन की गति से अब आगे निकल रही है। इससे कौशल की कमी और व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं।

समीक्षा में यह भी कहा गया है कि सख्त आव्रजन, डेटा संरक्षा, स्थानीयकरण मानदंड और प्रेषण नियमों के साथ, ‘स्थिरता लाने वाली शक्ति’ होने का वादा अब चुनौती के घेरे में आ गया है। भारत के सेवा क्षेत्र ने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वृद्धि को बुनियादी मदद देना जारी रखा है। सेवा निर्यात भारत के बाह्य क्षेत्र का केंद्रीय स्तंभ और वृद्धि का प्रमुख कारक बन गया है।

वित्त वर्ष 23-25 के दौरान सेवा क्षेत्र की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में औसतन हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत थी जबकि यह महामारी से पहले के दौर में 7.4 प्रतिशत थी। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण वैश्विक वस्तु व्यापार में आई सुस्ती के बीच सेवा निर्यात ने महत्त्वपूर्ण सहारा प्रदान किया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में यह भूमिका और भी मजबूत हुई है। इस क्रम में जीडीपी में सेवा निर्यात की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही के 9.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही 10.0 प्रतिशत हो गई है।

समीक्षा में यह बात सामने आई कि एआई वैश्विक सेवा व्यापार को तेजी से आकार दे रहा है। इसमें विशेष रूप से डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं को आकार दे रहा है। सेवाओं पर एआई के प्रभाव का आकलन करने के लिए की गई समीक्षा में यह भी कहा गया कि एआई के प्रसार के चरण के बाद एआई प्रधान सेवाओं का निर्यात अधिक बढ़ा है जबकि एआई से कम प्रभावित सेवाओं का निर्यात कम बढ़ा है। एआई-प्रधान सेवाओं में सॉफ्टवेयर, व्यवसाय और वित्तीय सेवाओं आती हैं।

सर्वेक्षण में विनिर्माण के ‘सेवाकरण’ पर भी चर्चा की गई है। ‘विनिर्माण अधिक प्रौद्योगिकी और डेटा का उपयोग कर रहा है। ऐसे में आईसीटी, वित्त, अनुपालन व बिक्री-पश्चात सहायता जैसी सेवाएं मूल्य सृजन में बढ़ती हिस्सेदारी निभा रही हैं। अंतराष्ट्रीय अनुभव से पता चलता है कि यह एकीकरण मूल्यवर्धन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार बढ़ाने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है।’

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 11:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement