facebookmetapixel
Advertisement
5 महीने बाद खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? ट्रंप बोले: शांति समझौते के पैरामीटर्स तय, हमले पर लगाई रोकपश्चिम एशिया में तनाव चरम पर, ईरान बोला: अमेरिका ने और हमला किया तो खाड़ी देशों के तेल ठिकाने होंगे राखHDFC Bank ने FCNR डिपॉजिट पर बढ़ाया ब्याज, RBI स्वैप स्कीम के बीच NRI निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदाDividend Stocks: एक शेयर पर ₹270 का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सजुलाई में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23.66 बिलियन ट्रांजैक्शन के साथ डिजिटल पेमेंट ने भरी ऐतिहासिक उड़ानजुलाई में GST कलेक्शन में जोरदार उछाल, आयात-घरेलू मांग के दम पर ₹2.11 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ाDividend Stocks: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! अगले हफ्ते 98 कंपनियां बांटेगी डिविडेंड, ₹270 तक पाने का मौकाRBI की स्वैप स्कीम से बैंकों ने जुटाए 41 अरब डॉलर के विदेशी फंड, 2 महीने में टूटा 2013 का रिकॉर्ड1991 के सुधारों ने बदली ऑटो सेक्टर की तस्वीर: कैसे मुट्ठी भर कंपनियों से दुनिया का बड़ा हब बना भारत‘यूरिया के दाम स्थिर, DAP पर नजर जरूरी’, FAI अध्यक्ष एस. शंकरसुब्रमण्यन ने बताया फर्टिलाइजर सेक्टर का हाल

समावेशी आर्थिक विकास अभी भी एक सपना है? अर्थशास्त्रियों ने की चर्चा

Advertisement

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि समावेशी आर्थिक विकास के लिए रोजगार, उद्यमिता और पूंजीगत व्यय की जरूरत

Last Updated- November 28, 2023 | 5:02 PM IST
BS BFSI

बिज़नेस स्टैंडर्ड के BFSI इनसाइट समिट में सोमवार को अर्थशास्त्रियों ने कहा कि भारत के लिए समावेशी आर्थिक वृद्धि हासिल करने में रोजगार, उद्यमिता और पूंजीगत व्यय में वृद्धि के साथ-साथ वृहद आर्थिक स्थिरता भी जरूरी है।

क्या समावेशी आर्थिक विकास अभी भी महज एक सपना है, इस विषय पर चर्चा के दौरान विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने कहा कि समावेशिता वैश्विक चिंता है और भारत ने इस दिशा में बीते चार से पांच वर्षों के दौरान कई सारे संरचनात्मक परिवर्तन किए हैं।

इन चीजों का सकारात्मक पक्ष रखते हुए भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि पिछले दस वर्षों के दौरान 29 राज्यों में प्रति व्यक्ति आय से पता चलता है कि सबसे बड़े और सबसे छोटे राज्यों के बीच मौजूद असमानता कम हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुल आयकरदाताओं में से 13.6 फीसदी पांच लाख रुपये से नीचे की सीमा से ऊपर उठकर अधिक की सीमा में चले गए।

घोष ने कहा, ‘कमजोर तबके के लोग भी ऋण प्रणाली में शामिल हो रहे हैं। फिलहाल जो अच्छी बात दिख रही है वह यह है कि जमा को औपचारिक बनाए जाने से उधारी भी उसी रफ्तार से औपचारिक होती जा रही है।’

सिटी रिसर्च के प्रबंध निदेशक और मुख्य अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती ने कहा कि जब देश में उच्च सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि देखी जाती है तो आय असमानता का बिगड़ना बिल्कुल स्वाभाविक था। वैश्विक महामारी कोरोना जैसे आपूर्ति पक्ष के झटके भी आय की असमानता बढ़ाते हैं।

आय असमानता के कुछ कारणों को समझाते हुए चक्रवर्ती ने कहा कि कोरोना के पहले के स्तरों की तुलना में विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार 15 फीसदी कम हो गया है, जबकि निर्माण क्षेत्र में यह बढ़ गया है, जो विनिर्माण की तुलना में कम भुगतान वाला है।

नोमुरा में भारत और एशिया (जापान को हटाकर) की प्रबंध निदेशक और मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना था कि समावेशी विकास हासिल करने का एक तरीका अधिक उद्यमिता बढ़ाना है जो न केवल रोजगार पैदा करने में मदद करती है बल्कि किसी को समय के साथ-साथ अधिक रोजगार और संपत्ति बनाने में भी सक्षम बनाती है।

HDFC बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा, ‘मेरा सरकार को सुझाव है कि घरेलू उद्योग को बढ़ाने के लिए सुरक्षा का उपयोग करने जैसे अल्पकालिक सुधारों के प्रलोभन में न आएं। इसको लेकर हमारा इतिहास काफी अप्रिय रहा है।’

Advertisement
First Published - October 30, 2023 | 9:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement