facebookmetapixel
Advertisement
ओपनएआई का AI एजेंट टेस्टिंग में बेकाबू, हैकिंग घटना ने साइबर सुरक्षा पर बढ़ाई चिंताAI स्किल्स को IT कंपनियों में सबसे ज्यादा तवज्जो, कैंपस भर्ती और वेतन रणनीति में बड़ा बदलावRBI Economy Report: विदेशी निवेश में लौटा भरोसा, मजबूत मांग से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहाराट्रंप के जेनेरिक दवा शुल्क प्रस्ताव से भारतीय फार्मा पर दबाव, उत्पादन अमेरिका ले जाना आसान नहींMutual Fund लाइसेंस की कतार बढ़ी, तीन नए आवेदक; SEBI की मंजूरी का इंतजार कर रहीं 9 कंपनियांकमजोर डॉलर से सोने में जोरदार तेजी, दो हफ्ते के हाई पर पहुंचा भाव 3 अगस्त से बदलेगा शेयर बाजार का क्लोजिंग सिस्टम, Closing Auction के लिए एक्सचेंज तैयारQ1 नतीजों के बाद Bandhan Bank पर दबाव, शेयर 17% टूटे; कमजोर RoA गाइडेंस से निवेशकों को झटकापश्चिम एशिया संकट गहराया, कच्चा तेल 2% की बढ़त के साथ छह हफ्ते के हाई पर दो महीने के निचले स्तर के करीब रुपया, डॉलर के मुकाबले 96.57 के स्तर पर फिसला

RTI कानून की दोबारा हो समीक्षा- इकोनॉमिक सर्वे, संभावित बदलावों के दिये सुझाव

Advertisement

Economic Survey 2026: सर्वे में कहा गया है कि गोपनीय रिपोर्टों, ड्राफ्ट और आंतरिक नोट्स को सार्वजनिक करने की बाध्यता शासन प्रक्रिया प्रभावित होती है।

Last Updated- January 29, 2026 | 5:00 PM IST
Economic survey 2026 RTI
Representational Image

Economic Survey 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 लोकसभा में पेश कर दिया। इकोनॉमिक सर्वे ने करीब दो दशक पुराने सूचना का अधिकार (RTI) कानून की दोबारा समीक्षा करने की जोरदार पैरवी की है। सर्वे में कहा गया है कि गोपनीय रिपोर्टों, ड्राफ्ट टिप्पणियों और आंतरिक नोट्स को सार्वजनिक करने की बाध्यता शासन प्रक्रिया को सीमित करती है।

सर्वे में स्पष्ट किया गया कि आरटीआई अधिनियम, 2005 को न तो बेकार की जिज्ञासा पूरी करने के लिए बनाया गया था और न ही सरकार को बाहर से माइक्रो-मैनेज करने के लिए। इसका मकसद कहीं अधिक व्यापक है, जो कानून में साफ तौर पर लिखा गया है। इस कानून का मकसद सरकारी संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, भ्रष्टाचार को रोकना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी को मजबूत करना है।

सर्वे में कहा गया कि करीब 20 साल बाद अब आरटीआई कानून की समीक्षा की जरूरत हो सकती है। इसके मूल मकसद को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि इसे दुनियाभर की बेहतरीन प्रथाओं के अनुरूप बनाने और अब तक मिले अनुभवों को इसमें शामिल करने के लिए है।

RTI में क्या हो सकते हैं बदलाव

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, कुछ संभावित बदलावों पर विचार किया जा सकता है, जैसे ब्रेनस्टॉर्मिंग नोट्स, वर्किंग पेपर्स और ड्राफ्ट टिप्पणियों को तब तक आरटीआई के दायरे से बाहर रखना, जब तक वे अंतिम निर्णय का हिस्सा न बन जाएं। सर्विस रिकॉर्ड, तबादले और गोपनीय स्टाफ रिपोर्ट्स को ऐसे आरटीआई आवेदनों से बचाना, जिनका जनहित से बहुत कम संबंध हो।

एक सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित मंत्रालयी वीटो अधिकार, जो संसद की निगरानी में हो, ताकि ऐसे खुलासों से बचा जा सके जो शासन को अनुचित रूप से बाधित करें। सर्वे ने कहा कि ये सुझाव अंतिम फैसले नहीं हैं, बल्कि बहस के लिए रखे गए विचार हैं, ताकि कानून प्रभावी बना रहे और निर्णय प्रक्रिया की गरिमा भी सुरक्षित रहे।

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, आरटीआई कानून को अपने आप में लक्ष्य नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम समझा जाना चाहिए। सबसे बेहतर रास्ता यही है कि नागरिकों को फैसलों के लिए जवाबदेही मांगने का अधिकार मिले, लेकिन साथ ही अधिकारियों को खुलकर और ईमानदारी से विचार-विमर्श करने की जगह भी मिले।

दुनिया के कई देशों में है कानून

सर्वे में यह भी बताया गया कि नागरिकों का ‘जानने का अधिकार’ केवल भारत तक सीमित नहीं है। स्वीडन ने 1766 में दुनिया का पहला फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन कानून बनाया। अमेरिका ने 1966 में और ब्रिटेन ने 2000 में ऐसे कानून लागू किए। दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने बाद में माना कि उन्हें यह कानून लाने का अफसोस हुआ, क्योंकि गोपनीय चर्चा के बिना सरकार चलाना मुश्किल हो जाता है।

इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, वैश्विक मानकों के हिसाब से भारत का आरटीआई कानून काफी व्यापक है। अमेरिका, ब्रिटेन और स्वीडन जैसे देशों में नीति निर्माण, आंतरिक दस्तावेज और गोपनीय रिपोर्ट्स को आरटीआई से बाहर रखा गया है, जबकि भारत में ऐसी सामान्य छूट नहीं है।

सर्वे ने चेतावनी दी कि अगर हर ड्राफ्ट या टिप्पणी के सार्वजनिक होने का डर रहेगा, तो अधिकारी खुलकर विचार रखने से बचेंगे। इससे प्रभावी शासन के लिए जरूरी स्पष्टता और साहस कम हो सकता है। हालांकि सर्वे ने साफ किया कि यह गोपनीयता की वकालत नहीं है, बल्कि संतुलन की बात है-
जहां निर्णय लेने से पहले स्वतंत्र चर्चा हो सके और फैसले के बाद जवाबदेही तय की जा सके।

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 5:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement