facebookmetapixel
दूध के साथ फ्लेवर्ड दही फ्री! कहानी क्विक कॉमर्स की जो बना रहा नए ब्रांड्स को सुपरहिटWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड की लहर! IMD ने जारी किया कोहरा-बारिश का अलर्ट67% चढ़ सकता है सिर्फ ₹150 का शेयर, Motilal Oswal ने शुरू की कवरेज; BUY की दी सलाहअमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Today: वेनेजुएला संकट के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटा

Budget 2024: खपत की निगरानी प्राथमिकता नहीं- वित्त और व्यय सचिव टीवी सोमनाथन

बजट के आंकड़े वास्तविक हैं और विनिवेश, कल्याणकारी योजनाओं और पूंजीगत व्यय को लेकर सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

Last Updated- February 02, 2024 | 10:06 PM IST
Budget 2024: Companies will provide employment, government support; Finance Secretary discussed the budget in detail in the interview Budget 2024: कंपनी रोजगार देंगी, सरकार सहारा; वित्त सचिव ने Interview में की बजट पर विस्तार से चर्चा

Budget 2024: बजट के आंकड़े वास्तविक हैं और विनिवेश, कल्याणकारी योजनाओं और पूंजीगत व्यय को लेकर सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह बात बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त और व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने रुचिका चित्रवंशी और असित रंजन मिश्र के साथ बातचीत में कही। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-

वे कौन से सिद्धांत हैं, जिन्होंने अंतरिम बजट को आकार देने वाले विचारों को दिशा दी?

विकास की गति को पाने, भारत को 2047 तक विकसित बनाने जैसे दूरगामी लक्ष्यों पर काम करने और विवेकपूर्ण राजकोषीय रास्ता बनाए रखने जैसे तीन प्रमुख विचार रहे, जिन्होंने बजट को दिशा देने में प्रमुख भूमिका निभाई।

वित्त वर्ष 2024 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बजट अनुमान 5.9 प्रतिशत से घटाकर 5.8 प्रतिशत रखा है। इसका प्रमुख कारण?

गैर-कर राजस्व उम्मीद से बेहतर रहा है। खर्च पर भी नियंत्रण रखा गया है। राजस्व व्यय बहुत अधिक नहीं बढ़ा है। अवशोषण क्षमता के कारण पूंजी व्यय में कुछ बचत हुई है। पूंजीगत व्यय पूर्व के 100 फीसदी अनुमान से घटकर 95 प्रतिशत पर आ जाएगा। राजस्व के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। लिहाजा राजकोषीय घाटा बजट अनुमान से थोड़ा कम रखा गया है।

ऐसा दिख रहा है कि वित्त वर्ष 2024 में 37 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से 26 में कटौती कर दी गई?

इसे कटौती नहीं कहेंगे। यह पूरी धनराशि खर्च नहीं कर पाने की वजह है। संशोधित अनुमान में कटौती इस आधार पर नहीं है कि वे मांग तो रहे थे, लेकिन हमने उन्हें पर्याप्त धन देने से मना कर दिया। ये सरकारी वित्त के नियमों के तहत मामले होते हैं। यदि सरकार निर्धारित खर्च करने में नाकाम रहती है तो उसे संसद को सूचित करना पड़ता है।

यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो यह ऑडिट का मुद्दा बन जाएगा। यदि पूरी धनराशि खर्च नहीं कर पा रहे हैं, तो हमें इस बारे में पहले ही बता देना होगा। इनमें से कुछ मामलों में पूरी राशि खर्च नहीं होने की वजह शायद यह रही हो कि राज्य सरकारों से उनके हिस्से की राशि उपलब्ध न हुई हो या योजना को लागू करने में कुछ देर हो रही हो।

क्या वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी के अनुपात के अनुसार कुल व्यय में कमी के जरिये राजकोषीय मजबूती का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है?

हां, पूरी तरह संभव है। मैंने इसे जांचा तो नहीं है, लेकिन यदि ऐसा हो रहा है, तो यह हो रहा है। ये लक्ष्य वास्तविकता पर आधारित हैं और इन्हें हासिल किया जा सकता है।

वैश्विक उतार-चढ़ाव की दशा में जब मांग बढ़ाने की जरूरत हो, तो क्या यह मांग पर दबाव नहीं है?

मेरा मानना है कि हमारा काम गरीबों व कमजोर तबकों के लिए काम करना है। हम ऐसे खर्च भी करते हैं, जिनसे विकास को गति मिले। लेकिन गरीबों के अलावा अन्य उपभोक्ता मांग को बनाए रखना हमारा काम नहीं।

क्या आपका मतलब यह है कि महामारी के बाद खर्च अधिक रहा और अब हमें इसे नियंत्रित करना है?

महामारी के दौरान सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह मांग को बनाए रखे, क्योंकि आर्थिक गतिविधियां लगभग बंद हो गई थीं। अब हालात सामान्य हैं और ऐसे समय खपत की निगरानी करना सरकार की प्राथमिकता नहीं है।

वास्तव में हमारा ध्यान निवेश और बचत पर होना चाहिए। यदि आप धन को हस्तांतरित करते हैं तो क्या यह इस्तेमाल हो जाता है या बचाया जाता है, यह नागरिकों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। मैं नहीं सोचना कि इस मामले में सरकार कुछ करे।

क्या सरकार विनिवेश पर पुनर्विचार कर रही है? विशेष लक्ष्य नहीं तय करने के पीछे क्या कारण रहे?

निश्चित रूप से राजकोषीय संसाधन के स्रोत के रूप में विनिवेश को नहीं देखा जा रहा है। हम अब विनिवेश को कम समय में संसाधन जुटाने के तरीके के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों का अधिक से अधिक महत्त्व बढ़ाने के अवसर के तौर पर देख रहे हैं। इसलिए लघु अवधि में धन जुटाने और दूरगामी महत्व बढ़ाने के बीच कभी-कभी विवाद होता है। हमने ऐसा नहीं करने का निश्चिय किया है।

कुल सब्सिडी में 8 प्रतिशत की कमी के पीछे क्या गणित है?

खाद्य सब्सिडी में थोड़ी कमी की गई है। उर्वरक सब्सिडी में मामूली कटौती हुई है। ये दो प्रमुख तत्व हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तो वित्त वर्ष 2025 तक पूरी तरह मुफ्त कर दी गई?

यह इस वर्ष भी मुफ्त ही थी। इसलिए ऐसा नहीं कह सकते कि यह क्रमिक बढ़ोतरी है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो इसमें कमी देखने को मिलती। हमें वह कमी दिख रही है। यह मौजूदा दर पर स्थिर है।

वित्त वर्ष 2025 के लिए बजट में खाद्य सब्सिडी घटा दी गई?

ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पिछले वर्ष के कुछ बकाया इस साल चुकाए गए हैं। यह इस वर्ष बढ़ोतरी दर्शाता है, अन्यथा यह स्थिर है।

यदि उर्वरक कीमतें बढ़तीं हैं तो क्या आप अधिक सब्सिडी देंगे?

हां, संभवत: ऐसा किया जाएगा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने जा रहा है।

First Published - February 2, 2024 | 10:06 PM IST

संबंधित पोस्ट