facebookmetapixel
जयशंकर-रुबियो में व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चापीएम मोदी 7–8 फरवरी को मलेशिया दौरे पर, व्यापार से रक्षा तक द्विपक्षीय सहयोग की होगी समीक्षापूर्व सेना प्रमुख नरवणे के ‘संस्मरण’ पर संसद में तीसरे दिन भी गतिरोधएसआईआर को लेकर ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, वैध मतदाताओं के नाम काटने का लगाया आरोपछात्रों के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहरकई राज्यों के कर्ज पर नियंत्रण रखने में विफल एफआरएलPMAY-शहरी 2.0 योजना के तहत गरीबों के आवास का सालाना लक्ष्य 350% बढ़ानिजी जीवन बीमाकर्ताओं के क्रेडिट लाइफ कारोबार में सुधार, माइक्रोफाइनेंस दबाव घटने से दिखी तेजीरूसी तेल नहीं खरीदने पर भारत ने जताई प्रतिबद्धता: व्हाइट हाउस का दावा, रूस बोला—योजना में कुछ नया नहींयेस बैंक की वृद्धि बहाली की कमान विनय टोंसे को, नए एमडी-सीईओ पर अगले चरण की जिम्मेदारी

वेदांत को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत, सरकार की अपील खारिज, अब तेल ब्लॉक्स की आय से भुगतान में कर सकेगा कटौती

दिल्ली हाई कोर्ट ने वेदांत को राजस्थान के तेल ब्लॉक्स से राजस्व हिस्सेदारी में कटौती जारी रखने की अनुमति देकर सरकार की अपील खारिज कर दी।

Last Updated- July 11, 2025 | 10:16 PM IST
Vedanta
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें वेदांत को राजस्थान तेल एवं गैस क्षेत्रों में मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या से प्राप्त राजस्व हिस्सेदारी से भुगतान में कटौती करने से रोकने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने अपने अंतरिम आदेश में वेदांत को 2023 के मध्यस्थता फैसले को लागू करने से रोकने के सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया। अब तक, वेदांत ने 2023-24 की दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही के लिए अनंतिम राजस्व अनुमानों से लगभग 3,235 करोड़ रुपये का समायोजन किया है और अभी 1,347 करोड़ रुपये का समायोजन करना बाकी है। वेदांत अब तब तक अपनी कटौती जारी रख सकता है जब तक कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा अंतिम भुगतान की मात्रा निर्धारित नहीं कर दी जाती।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, उपरोक्त कारणों से यह न्यायालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा लिए गए फैसले के गुण-दोषों का पुनर्मूल्यांकन या उसमें कोई परिवर्तन नहीं करेगा, खासकर जब मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने एक सुविचारित आदेश पारित किया हो और अपीलकर्ता के दोबारा समायोजन के अधिकार को सुरक्षित रखा हो। मुझे इस आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। इसलिए यह अपील निराधार है और तदनुसार खारिज की जाती है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2023-2024 की दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में देनदारियां तय होने तक (30 करोड़ डॉलर से अधिक) अनंतिम अनुमानों में समायोजन करके वेदांत को 2023 के मध्यस्थता न्यायाधिकरण को लागू करने से रोकने की मांग की थी।

यह विवाद राजस्थान तेल एवं गैस ब्लॉकों के लिए केंद्र सरकार, शेल (जिसे बाद में वेदांत ने अधिग्रहीत कर लिया) और ओएनजीसी के बीच 1995 के उत्पादन साझेदारी अनुबंध के संबंध में था। बाड़मेर ब्लॉक में तेल और गैस की खोज और उत्पादन के लिए मूल लाइसेंस 14 मई, 2020 को समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार ने 10 साल का विस्तार देने की पेशकश की, लेकिन तेल और गैस का अधिक हिस्सा और लागत वसूली को लेकर 5,651 करोड़ रुपये के विवाद का समाधान मांगा। सरकार का दावा ब्लॉक में विभिन्न क्षेत्रों के बीच सामान्य लागतों के पुनर्वितरण और पाइपलाइन से संबंधित खर्चों की अस्वीकृति के इर्द-गिर्द घूमता था।

First Published - July 11, 2025 | 10:07 PM IST

संबंधित पोस्ट