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समुद्री क्षेत्र को रफ्तार देने की कोशिश: सागरमाला फाइनैंस ने सरकार से मांगा ₹2,000 करोड़ का समर्थन

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नाम बदलकर शुरू की गई इस इकाई को शुरुआत दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और यह आक्रामक रूप से उधारी को योजना बना रही है

Last Updated- January 05, 2026 | 9:53 PM IST
Sagarmala Finance
फोटो क्रेडिट: X@SDCL_India

भारत में समुद्री क्षेत्र को पहले ऋण देने वाले सागरमाला फाइनैंस कॉरपोरेशन (एसएमएफसीएल) ने बीते मंगलवार को 4,300 करोड़ के ऋण वितरण की घोषणा करके जबरदस्त शुरुआत की। इस सरकारी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी ने अपनी शुरुआत के दो महीनों में इतनी राशि वितरित कर दी।

नाम बदलकर शुरू की गई इस इकाई को शुरुआत दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और यह आक्रामक रूप से उधारी को योजना बना रही है।

एसएमएफसीएल के प्रबंध निदेशक एलवीएस सुधाकर बाबू ने बिजनेस स्टैंडर्ड को साक्षात्कार में बताया, ‘अभी चुनौती यह है कि हमारी कुल संपत्ति सीमित है। हमें भारतीय रिजर्व बैंक के चुनिंदा मानदंडों को पूरा करना है। जैसे पूंजी से जोखिम भारित परिसंपत्ति के अनुपात और जोखिम के मानडंडों जैसे कुछ नियामक मानदंडों का पालन करना होगा।’

कंपनी प्रत्येक व्यक्तिगत रूप से ऋण लेने वाले को 25 प्रतिशत या समूह को 40 प्रतिशत से अधिक ऋण नहीं दे सकती है। 

बाबू ने कहा, ‘यह मुश्किल खड़ी कर रहा है। अभी अच्छा संभावित कारोबार उपलब्ध है। हम इन बंदिशों के कारण ऋण नहीं दे सकते हैं। लिहाजा हमने सरकार से अधिक धन मुहैया कराने का लिखित अनुरोध किया है। वे संभवत: अगले वित्तीय वर्ष तक कर दें। हमें न्यूनतम 2,000 करोड़ रुपये की उम्मीद कर रहे हैं।’

समुद्री क्षेत्र को ऋण मुहैया कराने के लिए नए नाम से सागरमाला डेवलमेंट कारपोरेशन बनाई गई थी। यह वित्तीय क्षेत्र को धन मुहैया कराएगी।

 दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते बजट भाषण में पानी के जहाज के निर्माण और मजबूत पारिस्थितिकीतंत्र बनाने की घोषणा की थी। बाबू ने बताया , ‘कोई बकाया या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां नहीं हैं। इसलिए हमारी लागत कम होगी। हम मौजूदा  बाजार दर से लगभग 20-30 आधार अंक कम ब्याज दर पर ऋण दे सकते हैं।’ एनबीएफसी की जहाज निर्माण क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर प्रवेश करने की योजना है।

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First Published - January 5, 2026 | 9:48 PM IST

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