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कमजोर मांग नहीं, नीतिगत खामियां रोक रहीं ई-बाइक की राह, नीति आयोग से OEM ने की शिकायत

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इसके अलावा उत्पाद की सीमाएं और नीतिगत कमियां जैसी कई संरचनात्मक बाधाएं भी हैं

Last Updated- January 05, 2026 | 10:18 PM IST
NITI Aayog
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं ने कुछ महीने पहले आयोजित एक बैठक के दौरान नीति आयोग को बताया कि भारत में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों (ई-बाइक) की न के बराबर मौजूदगी का कारण कमजोर मांग नहीं है, बल्कि फाइनैंसिंग की ऊंची लागत और चार्जिंग की खराब व्यवस्था है। इसके अलावा उत्पाद की सीमाएं और नीतिगत कमियां जैसी कई संरचनात्मक बाधाएं भी हैं। इसी तरह की वजहें कंपनियों को मॉडल लॉन्च करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए हतोत्साहित कर रही हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड को मामले से अवगत सूत्रों से यह जानकारी मिली है।  सरकारी अधिकारियों और उद्योग के प्रतिनिधियों के अनुसार बैठक में हीरो मोटोकॉर्प, एथर एनर्जी, ओला इलेक्ट्रिक, रॉयल एनफील्ड, मैटर मोटर, रैप्टी.एचवी, ओडिसीईवी और ग्रेवटन मोटर्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया।

इन ओईएम मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) ने बैठक के दौरान कहा कि फाइनैंस तक पहुंच इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि बड़े बैंक अभी भी ऐसे वाहनों के लिए रिटेल लोन देने से हिचकिचाते हैं जबकि छोटे ऋणदाता 21 प्रतिशत तक की भारी-भरकम ब्याज दर वसूलते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की शुरुआती लागत काफी बढ़ जाती है।

आपूर्ति का जिक्र करते हुए निर्माताओं ने कार्यशील पूंजी की किल्लत बताई और कहा कि मौजूदा इनेसेंटिव फ्रेमवर्क (जैसे पीएलआई) बड़ी स्थापित कंपनियों के पक्ष में हैं। इस कारण स्टार्टअप और छोटे ओईएम शोध एवं विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन के मामले में नुकसान में रहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार समर्थित ओईएम कंसोर्टिया और मांग एवं आपूर्ति दोनों के लिए ज्यादा न्यायसंगत वित्तीय योजनाएं इन कमियों को दूर करने में मदद कर सकती हैं। चर्चा के दौरान चार्जिंग का इन्फ्रास्ट्रक्चर एक और बड़ी बाधा के तौर पर सामने आया।

ओईएम ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों को पब्लिक फास्ट चार्जर के ‘घने’ नेटवर्क तक पहुंच की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा सार्वजनिक चार्जिंग शुल्क की दर लगभग 25 रुपये प्रति यूनिट है। इससे पेट्रोल-डीजल वाली मोटरसाइकलों की तुलना में ई-बाइक खरीदना व्यावहारिक नहीं होता।

टेक्नोलजी और उत्पाद के मसले पर दोपहिया कंपनियों ने नीति आयोग को बताया कि रेंज की उम्मीदों को पूरा करने के लिए सिर्फ बैटरी का आकार बढ़ाना टिकाऊ समाधान नहीं है क्योंकि इसमें लागत और वजन की बाधा है।

निर्माताओं ने शोध एवं विकास प्रोत्साहन ढांचे को लेकर भी चिंता जताई। हालांकि अनुसंधान नैशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के तहत योजनाएं प्रारंभिक चरण के अनुसंधान में मदद करती हैं, लेकिन ओईएम का कहना है कि इनसे व्यावसायीकरण और कारोबार बढ़ाने में सीमित सहायता मिलती है।

उन्होंने तर्क दिया कि नए इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल प्लेटफॉर्म विकसित करने वाली कंपनियों की विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना तक पहुंच होना चाहिए जिससे कि प्रयोगशाला में विकसित और बाजार में उतरने को तैयार वाहन के बीच अंतर पाटा जा सके।  कम उपभोक्ता जागरूकता को एक और बड़ी बाधा के रूप में बताया गया, खासकर डीलरों के स्तर पर, जहां इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों के बारे में गलत धारणाएं बनी हुई हैं।

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First Published - January 5, 2026 | 10:18 PM IST

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