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‘अगले 5 साल में राजस्व करेंगे दोगुना’, Godrej Aerospace का निवेश से लेकर भविष्य तक का क्या है प्लान

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप में कार्यकारी उपाध्यक्ष और बिजनेस हेड मानेक एडी बेहरामकामदिन ने बेंगलूरु में ​पिछले दिनों भास्वर कुमार के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की थी।

Last Updated- March 02, 2025 | 10:28 PM IST
Godrej Consumer

जीई, रोल्स रॉयस, बोइंग, हनीवेल और सेफ्रान जैसी वैश्विक एरोस्पेस कंपनियों को पहले से ही आपूर्ति करने वाले गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एरोस्पेस डिवीजन ने हाल में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह बड़े सैन्य टर्बोफैन इंजन का निर्माण करने वाली एकमात्र भारतीय निजी कंपनी बन गई। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप में कार्यकारी उपाध्यक्ष और बिजनेस हेड (एरोस्पेस डिवीजन) मानेक एडी बेहरामकामदिन ने बेंगलूरु में ​पिछले दिनों एरो इंडिया 2025 के अवसर पर भास्वर कुमार के साथ साक्षात्कार में कई मुद्दों पर बातचीत की थी। प्रमुख अंश:

क्या आप एरोस्पेस इंजन निर्माण में अपने सफर के बारे में कुछ बता सकते हैं?

हमारा एरोस्पेस व्यवसाय वर्ष 1985 में शुरू हुआ और तब शुरुआत में हम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को छोटे थ्रस्टर कम्पोनेंट की आपूर्ति करते थे। बाद में हमने ‘विकास’ लिक्विड-फ्यूल रॉकेट इंजन का निर्माण शुरू किया, जो इसरो के प्रक्षेपण वाहनों को शक्ति प्रदान करता है। हम इसरो के नए सीई-20 क्रायोजेनिक इंजन के पहले चैंबर का निर्माण भी करते हैं। इंजनों के प्रति हमारे जुनून ने हमें 2014 में निर्यात के लिए प्रोत्साहित किया जो अब हमारे एरोस्पेस कारोबार का 40 प्रतिशत है। आज हम सीएफएम इंटरनैशनल के लीप और रोल्स रॉयस के ट्रेंट इंजन के लिए कलपुर्जे बनाते हैं। 

कावेरी डेरिवेटिव इंजन (केडीई) के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ अपने 2022 के सौदे के बारे में हमें बताएं?

केडीई परियोजना हमारे पहले किसी भी प्रोजेक्ट से ज्यादा जटिल है। जब डीआरडीओ के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (जीटीआरई) ने इन इंजनों के निर्माण के लिए एक निजी फर्म की तलाश की, तो हमने प्रतिस्पर्धा की और छह इंजनों और उनके सभी आठ मॉड्यूल के लिए टेंडर जीत लिया।  केडीई एक नॉन-आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है जो कावेरी परियोजना से लिया गया है, जो मूल रूप से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के तेजस लड़ाकू जेट के लिए बनाया गया था। यह लगभग 49 किलोन्यूटन का ड्राई थ्रस्ट पैदा करता है और इसका उद्देश्य भारत के मानव रहित लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करना है।

क्या आप ऐसी एकमात्र भारतीय निजी कंपनी हैं जो कम्पलीट हाई-ग्रेड इंजन बना रही है?

अभी तो, हां। एचएएल के अलावा कोई भी भारतीय कंपनी इस आकार के गैस टरबाइन इंजन के सभी मॉड्यूल नहीं बनाती है। अब हम विस्तृत डिजाइन ड्राइंग पर निर्भर रहने के बजाय मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) की जरूरतों के अनुसार निर्माण कर सकते हैं। हमने अपनी घरेलू डिजाइन टीम 2022 में तैयार कर ली थी।

इंजन के अलावा, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप रक्षा क्षेत्र में और क्या काम कर रहा है?

हमने एयरो इंडिया में एक्ट्यूएटर की एक श्रृंखला प्रदर्शित की है। 11 फरवरी को हमने भारत के पहले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के लिए एक्ट्यूएटर विकसित करने वास्ते एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के साथ समझौता किया है। हमारे कम्पोनेंट पहले से ही हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके-1 में इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन एएमसीए परियोजना इससे कहीं ज्यादा बड़ा अवसर है। तेजस एमके-1ए के लिए हमारे द्वारा डिजाइन किए गए कम्पोनेंट ने 2024 में महत्त्वपूर्ण डिजाइन समीक्षा में सफलता हासिल कर ली और अब इसका परीक्षण चल रहा है। राष्ट्रीय रक्षा परियोजनाओं पर सहयोग करने के लिए हमने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। 

मौजूदा और आगामी निवेश के बारे में बता सकते हैं?

हमारा एरोस्पेस व्यवसाय महाराष्ट्र में नए संयंत्र के साथ विस्तार कर रहा है, जो 2027 में शुरू होने वाला है। बंबई से लगभग 70 किमी दूर 100 एकड़ की यह परियोजना हमारी वर्तमान जगह से तीन गुना है। यह ग्रीनफील्ड परियोजना है जो बंजर भूमि को दो बड़े संयंत्रों में बदल देगी। इनमें से प्रत्येक संयंत्र 650,000 वर्ग फीट में होगा। इसमें भविष्य में तीसरे के लिए प्रावधान होगा। गोदरेज एंटरप्राइजेज समूह ने संपूर्ण विस्तार पर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

First Published - March 2, 2025 | 10:27 PM IST

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