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ल्यूपस नेफ्राइटिस मरीजों के लिए दवा का परीक्षण

Last Updated- December 11, 2022 | 10:39 PM IST

अमेरिका की दवा कंपनी इक्विलियम ने भारतीय दवा महा नियंत्रक (डीसीजीआई) की मंजूरी के बाद ल्यूपस नेफ्राइटिस मरीजों के लिए आइटोलिजुमैब के लिए चिकित्सकीय परीक्षण शुरू कर दिया है।
आइटोलिजुमैब को बायोकॉन द्वारा तैयार किया गया था और इसने वर्ष 2013 में भारत में सोरायसिस उपचार के लिए मंजूरी हासिल की थी। इक्विलियम ने मई 2017 में अमेरिका और कनाडाई बाजारों के लिए बायोकॉन की आइटोलिजुमैब के विकास एवं बिक्री के लिए विशेष अधिकार हासिल किया था। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को शामिल करने के लिए दिसंबर 2019 में आइटोलिजुमैब के लिए लाइसेंस समझौता किया गया था।
बायोकॉन बायोलॉजिक्स के मुख्य चिकित्सा अधिकारी संदीप अठाल्ये ने कहा, ‘हम ल्यूपस नेफ्राइटिस उपचार में बायोकॉन बायोलॉजिक्स की नई एंटीबॉडी, आइटोलिजुमैब की सुरक्षा एवं दक्षता का आकलन करने के लिए भारत में अपने भागीदार इक्विलियम के फेज 1बी क्लीनिकल स्टडीज की शुरुआत कर बेहद उत्साहित हैं।’
सिस्टेमिक ल्यूपस अर्थमेटोसस, या ल्युपस एक ऑटोइम्यून क्रोनिक इन्फ्लेमेटरी डिजीज है। अमेरिका में सिस्टेमिक ल्यूपस अर्थमेटोसस (एसएलई) का प्रसार प्रति 100,000 में 20 से 150 मामलों के बीच दर्ज किया गया है।
वहीं भारत में एसएलई की प्रसार प्रति 100,000 पर 3.2 प्रतिशत है। अठाल्ये ने कहा, ‘भारत में करीब 45,000 मरीजों में एसएलई की जांच हुई है, जिनमें से 20,000 मरीज किडनी से संबंधित (नेफ्राइटिस) श्रेणी के हैं और इनमें से कई के लिए स्टेरॉयड और इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं वाली थेरेपी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।’
 

First Published - December 23, 2021 | 11:20 PM IST

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