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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: करीब ढाई साल की सुस्ती के बाद भारतीय आईटी उद्योग में सुधार के शुरुआती संकेत

बाजार की गतिविधियों, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजों और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबद्ध अनुमान से पता चलता है कि यह उद्योग शुरुआती सुधार की दिशा में है। यह अभी शुरुआत है। हालांकि, भू-राजनीतिक अशांति, मुद्रा अस्थिरता, अमेरिका की वीजा प्रक्रियाओं में प्रमुख बदलाव और व्यापक रूप से डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन का अलग-थलग रहना, आदि […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कर अनिश्चितता — विदेशी निवेश के लिए नया खतरा

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में भारतीय कर प्राधिकरणों और टाइगर ग्लोब एवं अन्य (निर्धारिती) से संबंधित मामले में जो निर्णय दिया है, उसे देश के कर न्यायशास्त्र में एक ऐतिहासिक फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इस निर्णय का भारत में मौजूदा विदेशी निवेशों और भविष्य के निवेश प्रवाह पर महत्त्वपूर्ण असर […]

ऑटोमोबाइल, लेख, संपादकीय

शहरी भारत में किफायती आवास संकट: नीति आयोग के सुझाव समाधान हैं या आधा-अधूरा इलाज?

भारत की शहरी आवास संबंधी चुनौती केवल अपर्याप्त ऋण उपलब्धता या गृह-स्वामित्व योजनाओं से ही संबंधित नहीं है। हमारे शहर इस तरह की परिस्थितियां बनाने में विफल हो रहे हैं जहां किफायती घर बनाना आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो। इसके परिणामस्वरूप परिवारों को अनौपचारिक बस्तियों में रहना पड़ता है, लंबी दूरी तय करनी पड़ती है […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष के पीछे चीन की कमजोर अर्थव्यवस्था और अधूरे सुधारों की सच्चाई

चीन के आधिकारिक सांख्यिकीविदों ने घोषणा की है कि निर्यात की महाशक्ति माने जाने वाले इस देश का व्यापार अधिशेष 2025 में रिकॉर्ड 1.2 लाख करोड़ डॉलर हो गया। ऐसा तब हुआ जबकि घरेलू कमजोरी, वैश्विक वृद्धि में धीमापन और अमेरिका की नई सरकार द्वारा चीन के निर्यात को निशाना बनाए जाने जैसे प्रतिकूल हालात […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: कंपनियों के पास पैसा भरपूर, फिर भी निवेश सुस्त

भारत की गैर सूचीबद्ध कंपनियां वित्तीय रूप से दशकों की सबसे मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं। इतनी मजबूत वे पहले कभी नहीं रही हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि उन पर ऋण का भार 35 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर है, साथ ही उनका ब्याज कवरेज अनुपात […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: जर्मन चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा से भारत-ईयू एफटीए को मिली नई रफ्तार

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की दो दिवसीय भारत यात्रा ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संपन्न होने को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मैर्त्स ने कहा कि एफटीए को उनके देश का तगड़ा समर्थन है। उन्होंने इसके शीघ्र होने की बात भी कही। जानकारी के मुताबिक भारत और यूरोपीय […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: फेड की आजादी पर ट्रंप का दबाव, वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए बढ़ता खतरा

बड़े केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों का बिना पूर्व नियोजित कार्यक्रम के सामने आना या बयान देना सामान्य बात नहीं है। यदि वे ऐसा करते हैं (भले ही कम समय के नोटिस पर) तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत होता है कि हालात सामान्य नहीं हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: ट्रंप की नई टैरिफ धमकी से भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों पर गहराया संकट

भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्याप्त असहजता कम होती नहीं दिख रही है। हाल के दिनों में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के सदस्यों द्वारा भारत के बारे में दिए गए बयान निराश करने वाले हैं। भारत की प्रतिक्रिया इस बारे में उचित ही संयमित रही है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: ट्रंप का बहुपक्षीय संस्थाओं से हटना, वैश्विक व्यवस्था का विखंडन

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कुछ मामलों में हमेशा स्पष्ट रहे हैं। उनके दृष्टिकोण में बहुपक्षीय मंच अमेरिका की संप्रभुता को कमजोर करते हैं और सीधे उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के एजेंडे से टकराते हैं। इसी सोच के चलते उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से बाहर निकलने का निर्णय लिया, जिनमें से अनेक संयुक्त राष्ट्र की […]

आज का अखबार, लेख

Editorial: केंद्र प्रायोजित योजनाओं की छंटनी पर जोर

वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों और मंत्रालयों से कहा है कि वे केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं और केंद्रीय योजनाओं को तर्कसंगत बनाएं। इसके पीछे इरादा यह है कि एक दूसरे का अतिक्रमण करने वाली योजनाओं का विलय किया जाए और क्रियान्वयन की दक्षता में सुधार किया जाए। सरकार 54 केंद्र प्रायोजित योजनाएं चलाती […]

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