पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है। देश के कई शहरों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। गैस की सप्लाई में देरी और सीमित स्टॉक के कारण रेस्तरां, ढाबे, होटल और कैटरिंग कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में शामिल है। ऐसे में आयात या सप्लाई चेन में जरा सी भी रुकावट पूरे सिस्टम को प्रभावित कर देती है। हाल के दिनों में कई शहरों में सिलेंडर के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में कई-कई दिन लग रहे हैं।
चंडीगढ़ और मोहाली में गैस एजेंसियों के बाहर बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर लेने के लिए पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हो गए कि भीड़ संभालने और कालाबाजारी रोकने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग नंबर भी अक्सर उपलब्ध नहीं रहते और गैस की डिलीवरी कई दिनों तक नहीं हो रही।
गैस संकट का सबसे ज्यादा असर खाने-पीने के कारोबार पर पड़ रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर की मशहूर चटोरी गली में करीब 40 फूड स्टॉल एक रात के लिए बंद करने पड़े, क्योंकि उनके पास गैस नहीं थी। छोटे दुकानदारों का कहना है कि रोज की बिक्री पर चलने वाले कारोबार के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल है।
कई रेस्तरां और ढाबे अब मजबूरी में लकड़ी, कोयले या ईंट के चूल्हों पर खाना बनाने लगे हैं ताकि कारोबार पूरी तरह बंद न करना पड़े। व्यापारियों ने यह भी बताया कि कुछ जगहों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में करीब 3500 रुपये तक में बिक रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने पहुंचे लोगों की भारी भीड़ के दौरान धक्का-मुक्की हो गई। इसी दौरान एक महिला बेहोश हो गई। अयोध्या में भी गैस न मिलने के कारण राम रसोई को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
चंडीगढ़ और मोहाली के होटल मालिकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें मेन्यू कम करना पड़ रहा है या वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में करीब 2000 होटल और खाने-पीने के प्रतिष्ठान हैं, लेकिन केवल करीब 100 के पास ही पाइप गैस (PNG) कनेक्शन है।
गैस संकट अब उद्योगों तक भी पहुंच गया है। इंदौर में कई उद्योगों ने बताया कि गैस सिलेंडर और पाइप गैस दोनों की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन कम करना पड़ा है। इसके साथ ही उद्योगों को मिलने वाली गैस की कीमत 6 रुपये प्रति यूनिट बढ़ा दी गई है और गैस खपत की सीमा 20 यूनिट से घटाकर करीब 13 यूनिट कर दी गई है।
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एलपीजी की कमी का असर सार्वजनिक संस्थानों तक भी पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट की कैंटीन में सिलेंडर की कमी के कारण फिलहाल मुख्य भोजन बनाना बंद कर दिया गया है। उपलब्ध गैस से सिर्फ जरूरी खाद्य पदार्थ ही बनाए जा रहे हैं।
बिहार के भागलपुर में लोगों को सिलेंडर मिलने के लिए 8 से 10 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। एक गैस एजेंसी को 11 दिन बाद केवल 1300 सिलेंडर मिले, जबकि उसके करीब 4400 ग्राहक हैं।
गैस की कमी से होटल, रेस्तरां और कैटरिंग कारोबार खासतौर पर परेशान हैं। कई कैटरर बड़े आयोजनों में खाना बनाने के लिए लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में उद्योग संगठनों का कहना है कि 800 से ज्यादा होटल और रेस्तरां प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनके पास केवल 5–6 दिन का गैस स्टॉक बचा है।
स्थिति को देखते हुए कई जिलों में प्रशासन ने गैस एजेंसियों को समय पर वितरण सुनिश्चित करने और सप्लाई पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सिलेंडरों की जमाखोरी और अवैध बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यानी साफ है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब सीधे भारत की रसोई और कारोबार तक पहुंचने लगा है। अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।