पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के बीच मार्च में पश्चिम एशियाई देशों से भारत में रेमिटेंस तेजी से बढ़ा है। उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि यह आम महीनों की आवक की तुलना में लगभग 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा है।
जानकारों का कहना है कि घबराहट फैलने के साथ पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय अपने घरों को ज्यादा पैसे भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट की वजह से भी रेमिटेंस का मूल्य बढ़ा है।
पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से भारतीय रुपये में 1.32 प्रतिशत गिरावट आई है और डॉलर के मुकाबले रुपया 92 रुपये प्रति डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है तनाव बढ़ने से पहले घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 91 के करीब था।
बहरहाल उद्योग के जानकारों ने चेतावनी दी है कि यह एक कम अवधि की घटना है। उनका कहना है कि अगर लड़ाई लंबी चली तो इन देशों में नौकरियां जाने से भारत में आने वाले रेमिटेंस पर बुरा असर पड़ सकता है। प्रवासी भारतीय भारत में बड़ी मात्रा में धन भेजते हैं।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का ज्यादातर रेमिटेंस अमेरिका से आता है, जो कुल आवक का 27.7 प्रतिशत हिस्सा) है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (19.2 प्रतिशत), ब्रिटेन (10.8 प्रतिशत), सऊदी अरब (6.7 प्रतिशत) और सिंगापुर (6.6 प्रतिशत) का स्थान है।
निजी क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ बैंकर ने कहा, ‘मार्च में पश्चिम एशिया से रेमिटेंस काफी बढ़ा है।’ उन्होंने कहा कि वृद्धि 25-30 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि पिछले 2 सप्ताह से वृद्धि देखी जा रही रही है, खासतौर पर पिछले हफ्ते तेजी से रेमिटेंस बढ़ा है।
उन्होंने कहा, ‘अगर यही स्थिति बनी रहती है तो पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती और छंटनी हो सकती है। ऐसे में दीर्घावधि के हिसाब से रेमिटेंस में कमी आ सकती है। आतिथ्य जैसे क्षेत्रों पर उल्लेखनीय असर पड़ सकता है और कंपनियां अपना कार्यबल घटाने की कवायद शुरू कर सकती हैं। इसी तरह से निर्माण क्षेत्र दुबई जैसे शहरों में व़ृद्धि का बड़ा चालक रही है और इसकी रफ्तार सुस्त पड़ सकती है। इनका असर दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।’
हालांकि उन्होंने कहा कि कम अवधि के हिसाब से रेमिटेंस में बढ़ोतरी हुई है। ईएसएएफ स्मॉल फाइनैंस बैंक के एमडी और सीईओ पॉल थॉमस ने कहा, ‘पश्चिम एशियाई संकट और रुपये की गिरावट के कारण इस साल मार्च में अब तक भारत में रेमिटेंस औसत से लगभग 15 से 20 प्रतिशत बढ़ा है।’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक वित्त वर्ष 2026 में (वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती 9 महीनों में) विदेश में रहने वाले भारतीयों ने 107 अरब डॉलर से ज्यादा भेजे हैं। वित्त वर्ष 2025 में प्रवासी भारतीयों ने भारत में 132 अरब डॉलर से अधिक भेजे थे, जो रिकॉर्ड उच्च स्तर है। वित्त वर्ष 2024 में प्रवासियों ने 117 अरब डॉलर से कुछ अधिक भेजे थे।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2026 में रेमिटेंस सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025 में 3.3 प्रतिशत था। कुशल कामगारों की बढ़ती हिस्सेदारी से धनप्रेषण को समर्थन मिला है।’
उद्योग के जानकारों ने कहा कि जिन बैंकों को आमतौर पर पश्चिम एशिया से रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है, उनमें भी आवक में तेजी देखने को मिल रही है। खासकर फेडरल बैंक में रेमिटेंस बढ़ा है, जिसकी रेमिटेंस बाजार में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से ज्यादा है और इस बैंक में रेमिटेंस की आवक में 85 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है।