मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 27 लाख आयकर रिफंड आवेदनों को निपटाने में मानक 90 दिन से अधिक समय लग गया। यह जानकारी संसद में गुरुवार को पेश रिपोर्ट में दी गई। वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अनुदान मांगों पर अपनी 30वीं रिपोर्ट (2026-27) में कहा कि वर्ष 2023-24 में लगभग 12.7 लाख रिफंड मामलों में 90 दिनों से अधिक की देरी हुई। यह संख्या 2024-25 में बढ़कर 17.1 लाख हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष के तर्क को स्वीकार करती है कि फर्जी 80जी दान जैसे व्यापक धोखाधड़ी वाले दावों की जांच के कारण गहन जांच जरूरी हो गई थी।’ इसमें आगे कहा गया है कि औसत निपटान समय वर्ष 2025-26 (31 जनवरी तक) में बढ़कर 35 दिन हो गया। यह बीते वर्षों में 24-25 दिन थे और कुल 1.62 लाख करोड़ रुपये के 3.38 करोड़ रिफंड जारी किए गए थे। सीबीडीटी के अध्यक्ष ने समिति को आयकर रिफंड में देरी के कारणों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया, ‘हमें अभी तक रिफंड जारी करने के मामले में अधिक समय लग रहा है। इस साल, जुलाई 2025 में रिफंड जारी करने में अधिक समय लगा। हमने बिरयानी मामले की तरह अन्य मामलों को भी देखा है। इसके तहत आयकर विभाग फर्जी कटौतियों, दान, धारा 80जी आदि के संबंध में सत्यापन किया।’ उन्होंने बताया कि 50 लाख से अधिक अद्यतन और संशोधित रिटर्न के कारण स्वैच्छिक रूप से रिफंड दावों में 2,000 करोड़ रुपये की कमी आई है। उन्होंने मुकदमेबाजी के बिना अनुपालन को प्रोत्साहित करने के ‘नए दृष्टिकोण’ पर जोर दिया।
इस रिपोर्ट में 31 जनवरी, 2026 तक कर बकाया के संबंध में 47.42 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर बकाया का खुलासा हुआ। इसमें से 76% (36.27 लाख करोड़ रुपये) करदाताओं के लापता होने, दिवालियापन या संपत्ति की कमी के कारण ‘असंग्रहणीय’ वर्गीकृत किया गया है। विभाग ने समिति को बताया, ‘करदाताओं का पता न चल पाना, कंपनियों का परिसमापन या दिवालियापन और कुर्की योग्य संपत्तियों की कमी जैसी व्यावहारिक बाधाओं के कारण ये बकाया राशि अटकी हुई है।’