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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: भारतीय कंपनियों की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रहा है कॉरपोरेट शासन

जब भी भारत में कोई कंपनी तेजी से उभरती है तब लोगों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि पहले थोड़ी देर रुककर उसके प्रदर्शन को देखा जाए। ज्यादातर मामलों में, ये कंपनियां आर्थिक सुधारों के नए अवसरों का लाभ उठाकर अपना अ​स्तित्व बनाए रखती हैं और तरक्की करती हैं। लेकिन अक्सर भारत में उद्यमिता वाले […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: तेल संकट और महंगे ईंधन की दोहरी मार, बेकाबू हो सकती देश में महंगाई की रफ्तार

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने गत सप्ताह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया। चार साल में यह पहला मौका था जब तेल कीमतें बढ़ाई गईं। गैस वितरण कंपनियों ने भी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। वैश्विक बाजारों […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: जजों की कमी और बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझ रही न्यायिक प्रणाली, सुधार की जरूरत

भारत की अदालतों में बहुत बड़ी संख्या में लंबित मामले देश की न्यायिक प्रणाली की एक सर्वविदित कमजोरी है। लंबित मामलों की संख्या लगभग 5.5 करोड़ है। इस समस्या का मुख्य कारण अदालतों में कर्मचारियों की भारी कमी बताया जाता है। मुख्य रूप से न्यायाधीशों की, साथ ही स्टेनोग्राफर और क्लर्क जैसे अधीनस्थ कर्मचारियों की […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: सोने पर बढ़ा शुल्क मांग घटाने में कितना असरदार होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं। एक ओर जहां सरकार कई स्तरों पर ईंधन खपत कम करने का प्रयास कर रही है वहीं केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: अर्थव्यवस्था को चाहिए स्थिर नीति

भारत द्वारा आर्थिक सुधारों की राह अपनाने के करीब 35 वर्ष बाद भी देश की अर्थव्यवस्था द्वारा पूरी संभावनाओं का दोहन करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गाैबा ने इस सप्ताह भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई के सालाना व्यापार सम्मेलन में भारतीय नीति निर्माण की एक बड़ी […]

आज का अखबार, लेख

Editorial: राजकोषीय घाटा 5% तक पहुंचने की आशंका, पटरी से उतर सकता है देश का बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन और सोने सहित कई वस्तुओं की खपत कम करने की अपील की है जिसके चलते देश में एक दिलचस्प बहस आरंभ हो गई है। प्रधानमंत्री की इस अपील के पीछे इरादा यह है कि आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम की जाए और विदेशी मुद्रा बचाई जाए। कच्चे तेल की कीमतों […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: PM मोदी का विदेशी मुद्रा बचाने के लिए देश को एकजुट होने का आह्वान

होर्मुज स्ट्रेट संकट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार यह मुद्रास्फीति, उत्पादन और वृद्धि पर भी असर डालेगा। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि संकट कब तक जारी रहेगा। यह बात सराहनीय है कि केंद्र सरकार इस खतरे को गंभीरता से ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: चीन से निवेश पर सरकार की नरमी और FDI को मंजूरी में बड़ी ढील

केंद्र सरकार ने हाल ही में एक निर्णय लिया है, जिसके तहत चीन और भू-सीमा वाले अन्य पड़ोसी देशों से 40 विनिर्माण उपक्षेत्रों में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 60 दिन के भीतर मंजूरी देने की बात कही गई है। इससे पता लगता है कि भारत मान रहा है कि उसकी औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: क्या Vodafone Idea वापसी कर पाएगी? कर्ज, 5G और भरोसे की बड़ी चुनौती

वोडाफोन आइडिया (वी) ने उद्योग जगत और ऋणदाताओं को संकेत दिया है कि उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के कंपनी में गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में वापस आने के साथ वह अपनी रणनीति को और मजबूत कर रही है। हालांकि बिड़ला ने दूरसंचार क्षेत्र के दो कंपनियों के एकाधिकार में तब्दील होने की आशंकाओं को दूर […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: हार के बाद ममता बनर्जी की सियासत ने फिर बढ़ाया टकराव

अपनी पराजय में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति की उस हिंसक प्रकृति को ही उजागर किया है, जहां उन्होंने 15 वर्षों तक शासन किया। हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में अपनी पार्टी की पराजय के बाद उन्होंने चुनावी लोकतंत्र के परंपरागत शिष्टाचार का पालन करने और राज्यपाल को अपना त्यागपत्र […]

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