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डॉलर के मुकाबले 92.37 के नए निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, RBI के हस्तक्षेप से कुछ हद तक सुधार

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पश्चिम एशिया में लड़ाई की शुरुआत के बाद से रुपये में अन्य एशियाई मुद्राओं के अनुरूप 1.32 फीसदी की गिरावट आई है

Last Updated- March 12, 2026 | 10:09 PM IST
Rupee VS Dollor

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और शेयर बाजार में बिकवाली के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया 92.37 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। लेकिन डॉलर बिक्री के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने से कारोबार खत्म होने तक स्थानीय मुद्रा में कुछ सुधार हुआ। पश्चिम एशिया में लड़ाई की शुरुआत के बाद से रुपये में अन्य एशियाई मुद्राओं के अनुरूप 1.32 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, संघर्ष शुरू होने से पहले भी यह कैलेंडर वर्ष 2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्रीय बैंकों के समर्थन और तेल सूचकांकों में गिरावट के कारण रुपये ने कुछ हद तक मजबूती हासिल की। ​​हालांकि रुपये में स्थिरता आई है, लेकिन समग्र रुझान अभी भी गिरावट की ओर है। हाजिर रुपये को 92.50 के आसपास प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है जबकि 91.60 के स्तर पर गिरावट से बचाव की संभावना बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती से भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे घरेलू मुद्रा के प्रति बाजार का रुख और भी नकारात्मक हो गया है। तेल परिवहन सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें दिन के दौरान बढ़कर 101.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जबकि एक दिन पहले यह कीमत 92.06 डॉलर प्रति बैरल थी।

पिछले दो हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है और कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। इस कारण रुपये और अन्य एशियाई मुद्राओं पर लगातार दबाव बना हुआ है।

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक के अत्यधिक अस्थिरता रोकने के लिए डॉलर की बिक्री के जरिये संभावित हस्तक्षेप के कारण सत्र के अंत में रुपये ने कुछ हद तक अपनी गिरावट थामी। आंशिक सुधार के बावजूद रुपये के प्रति निकट भविष्य का दृष्टिकोण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर संवेदनशील बना हुआ है और बाज़ार में अस्थिरता जारी रहने की आशंका है।

गुरुवार को डॉलर सूचकांक 99.29 पर स्थिर रहा। यह छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापता है। सरकारी बॉन्ड यील्ड में 2 आधार अंक की वृद्धि हुई और यह पिछले बंद भाव 6.64 फीसदी के मुकाबले 6.66 फीसदी पर पहुंच गई।

बाजार के जानकारों का कहना है कि बॉन्ड यील्ड सीमित बनी रही क्योंकि हाल में हुई ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) नीलामी में कटऑफ उम्मीद से बेहतर रहा। इससे शुक्रवार को होने वाली आगामी नीलामी में भी इसी तरह के परिणाम की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्रीय बैंक ने बाजार के मौजूदा स्तर से अधिक कीमत पर प्रतिभूतियां खरीदीं, जिससे बाजार के सेंटिमेंट को स्थिर करने में मदद मिली।

केंद्रीय बैंक सेकंडरी बाजार में सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहा है। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, गुरुवार को बॉन्ड बाजार ने कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का अनुसरण किया। ओएमओ नीलामी में कट-ऑफ से आगे की चाल तय होगी।

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First Published - March 12, 2026 | 10:05 PM IST

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