भारत में क्रेडिट कार्ड का उपयोग महानगरों के परे भी तेजी से बढ़ रहा है। एसबीआई कार्ड की रिपोर्ट के अनुसार क्रेडिट कार्ड का उपयोग बढ़ती आय, डिजिटल जागरूकता में सुधार और भुगतान अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ यूपीआई के साथ रुपे क्रेडिट कार्ड के एकीकरण के कारण बढ़ा है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में ईएमआई से संबंधित खर्चों में पिछले वर्ष की तुलना में दो अंकों की वृद्धि देखी गई है।
यूपीआई के साथ रुपे क्रेडिट कार्ड का एकीकरण इस प्रवृत्ति को और गति दे रहा है। लिहाजा छोटे शहरों के ग्राहक भी अपने रोजमर्रा के खर्चों के साथ छोटी-मोटी खरीदारी के लिए भी आसानी से क्रेडिट का उपयोग कर सकते हैं। एसबीआई कार्ड के आंकड़ों के अनुसार लगभग 77 प्रतिशत यूपीआई-सक्रिय क्रेडिट कार्ड ग्राहक और लगभग 81 प्रतिशत यूपीआई-क्रेडिट खर्च मझोले और छोटे शहरों से होते हैं।
यह उभरते बाजारों में डिजिटल क्रेडिट को तेजी से अपनाने को दर्शाता है और वित्तीय समावेशन में क्रेडिट कार्ड की भूमिका को मजबूत करता है। भारत के दूसरे सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता और सबसे बड़ी क्रेडिट कार्ड कंपनी ने कहा कि पिछले एक दशक में बढ़ती आय, बढ़ते शहरीकरण और महत्त्वाकांक्षी मध्यम वर्ग के कारण लोगों के खर्च करने के तरीके और स्थान में बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2026 में लगभग 11.86 करोड़ क्रेडिट कार्ड प्रचलन में थे और क्रेडिट कार्ड से 23.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हुआ। इससे पता चलता है कि क्रेडिट कार्ड प्रणाली विस्तार से उपयोग की ओर स्पष्ट रूप से बढ़ रही है।
एसबीआई कार्ड के वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार खुदरा खर्च 3.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ऑनलाइन खर्च का खुदरा खर्च में लगभग 62.5 प्रतिशत योगदान रहा, जो गैर-विवेकाधीन और विवेकाधीन दोनों श्रेणियों में डिजिटल-प्रथम उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
एसबीआई कार्ड की एमडी व सीईओ सलिला पांडे ने कहा, ‘बढ़ती आय व आकांक्षाएं, प्रगतिशील नीतियां, डिजिटलीकरण और बढ़ता भुगतान ढांचा क्रेडिट कार्ड लेनदेन को नया रूप दे रहे हैं। ग्राहक तेजी से अनुभवों, जीवनशैली से प्रेरित खरीदारी और निर्बाध दैनिक लेनदेन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।