facebookmetapixel
Advertisement
मई में EV बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड, 45% उछाल से पहली बार 11% के पार पहुंची बाजार हिस्सेदारीTCS चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बड़ा बयान: 3 साल में कर्मचारियों के बराबर होंगे AI एजेंटवाहन निर्माताओं का नीति आयोग को जवाब- पुराने वाहन कहां हैं, पता नहींEditorial: हादसों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और लापरवाह शहरी शासन की कहानीशास्त्री भवन को अलविदा: सत्ता के गलियारों की अनगिनत गाथाएं समेटे, खुले और जनसुलभ शासन की पहचानक्या तेल संकट के दौर में भारत की महंगाई नियंत्रण नीति जरूरत से ज्यादा सख्त है?रुपये की जोरदार वापसी, कच्चे तेल में गिरावट और RBI के कदमों से मिला सहाराखुदरा निवेशकों का उत्साह पड़ा फीका, लगातार तीसरे महीने धीमी रही नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तारAI जुनून का चरम है स्पेसएक्स का आईपीओ, जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने जताई बड़ी आशंकापैसिव फंड्स पर सेबी की सख्ती! ETF और इंडेक्स फंड्स के लिए भी आ सकता है 50% ओवरलैप नियम

US-Iran War: ईरान का प्रस्ताव ठुकराया! अमेरिका बोला- ये समझौता नहीं, हालात बिगड़ सकते हैं

Advertisement

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में गतिरोध बना हुआ है, जहां प्रस्तावों की अस्वीकृति और सख्त रुख के चलते तनाव बढ़ने की आशंका है।

Last Updated- May 19, 2026 | 3:21 PM IST
Iran's new proposal is 'insufficient' and may start conflict: US officials
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की। (25 अप्रैल 2026, फोटो: रॉयटर्स)

US-Iran War: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ओर से दिए गए हालिया शांति प्रस्ताव को “अपर्याप्त” करार दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़े बदलाव नहीं करता है, तो कूटनीतिक बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होने की संभावना भी बन सकती है।

पाकिस्तान के जरिए पहुंचा प्रस्ताव

अमेरिकी वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए भेजा था। लेकिन इस प्रस्ताव में पिछले रुख की तुलना में बहुत कम बदलाव किए गए थे। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस प्रस्ताव में सबसे बड़ी चिंता वाले मुद्दों, खासकर यूरेनियम संवर्धन और परमाणु गतिविधियों पर स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल अमेरिका और ईरान किसी अंतिम समझौते की विस्तृत शर्तों पर बातचीत नहीं कर रहे हैं। दोनों पक्ष अभी केवल आगे की संभावित वार्ता के लिए एक शुरुआती ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी कुछ दिनों तक ईरान में रहे और वहां से लौटने के बाद उन्होंने दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान किया।

Also Read: US-Iran War: ईरान पर हमला टला! ट्रंप का बड़ा फैसला, गल्फ देशों की अपील के बाद रोकी स्ट्राइक योजना

परमाणु कार्यक्रम बना मुख्य विवाद

बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को या तो सीमित करे या रोक दे और कड़ी निगरानी स्वीकार करे। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम उसका संप्रभु अधिकार है और वह इसे पूरी तरह छोड़ने या कमजोर करने को तैयार नहीं है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें कमजोर होती दिख रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब समय तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है और कार्रवाई और सख्त हो सकती है।

ईरान की प्रमुख शर्तें सामने आईं

रिपोर्ट्स के मुताबिक Iran ने किसी भी बड़े परमाणु समझौते से पहले कुछ अहम शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि पहले उसके खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं। इसके साथ ही वह चाहता है कि उसे तेल निर्यात दोबारा शुरू करने की पूरी आजादी मिले।

ईरान की मांग है कि भविष्य में उस पर किसी तरह के हमले न हों और सुरक्षा की पक्की गारंटी दी जाए। तेहरान का कहना है कि बिना इन शर्तों के वह किसी बड़े समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा।

संघर्ष की आशंका पर ईरान का रुख

ईरानी अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो देश किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।

दूसरी तरफ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अभी किसी बड़े समझौते की संभावना दूर नजर आ रही है। उनका कहना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है ताकि वह एक व्यापक और स्पष्ट प्रस्ताव के साथ बातचीत की मेज पर आए।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन स्थिति अब भी जटिल बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान की राह आसान नहीं दिख रही है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

Advertisement
First Published - May 19, 2026 | 3:21 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement