बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों और उनके कॉरपोरेट बैंकिंग से संबंधित करीब 1 टेराबाइट (टीबी) ब्योरा कथित रूप से डार्क वेब पर मुफ्त उपलब्ध है। इस सरकारी बैंक पर साइबर हमला हुआ है। डेटा चोरी होने के कथित मामले में ग्राहकों के बचत व चालू खाता, ऋण खाते, नेट बैंकिंग यूजर्स, एनआरआई व कॉरपोरेट बैंकिंग की सेवाओं के साथ बैंक की शाखा और एटीएम से संबंधित आंकड़े शामिल हैं।
मुंबई मुख्यालय वाले इस बैंक ने बयान में कहा कि पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। बैंक लागू नियामकीय जरूरतों के अनुरूप संबंधित अधिकारियों के साथ कार्य कर रहा है। सरकारी बैंक ने सोमवार को बयान में कहा, ‘इस घटना में एक कर्मचारी का ईमेल अकाउंट हैक हुआ। इससे कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुंच बन गई। मामले की तुरंत पहचान की गई और तुरंत रोकथाम के उपाय लागू किए गए। बैंक के मुख्य बैंकिंग सिस्टम तक कोई पहुंच नहीं बनी और वे सुरक्षित हैं।”
बैंक ने कहा, ‘बैंक के पास मजबूत सूचना सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं।’ उसने कहा कि वह सूचना सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और अपने ग्राहकों और हितधारकों के भरोसे की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इससे पहले भी कई बैंक डेटा लीक का शिकार हो चुके हैं। येस बैंक के मल्टी करेंसी प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड के 5,000 ग्राहक 24 फरवरी, 2026 के शुरुआती घंटों में धोखाधड़ी वाले लेन देन की चपेट में आ गए थे। येस बैंक ने यह कार्ड बुक माई फॉरेक्स के साथ साझेदारी कर जारी किए थे। इस घटना के दौरान 2,80,000 डॉलर मूल्य के लेन देन को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, बैंक 688 अनधिकृत लेन देन के प्रयासों को अस्वीकार करने में सफल रहा और इससे लगभग 1,00,000 डॉलर की राशि सुरक्षित रही।
आईसीआसीआई बैंक ने 2024 में डेटा में गड़बड़ी की बात मानी। इससे बैंक के लगभग 17,000 नए जारी किए गए क्रेडिट कार्ड प्रभावित हुए। बैंक के डिजिटल चैनलों पर ये कार्ड गलती से गलत यूजर्स से लिंक हो गए थे।
हिताची पेमेंट सर्विसिज द्वारा प्रबंधित किए जाने वाले येस बैंक के 32 लाख ग्राहकों के कार्ड के आंकड़े 25 मई से 10 जुलाई के बीच चोरी हो गए थे। मैलवेयर ने येस बैंक के 90 एटीएम और पाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल को निशाना बनाया था। इसके परिणामस्वरूप भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी बैंक और येस बैंक के ग्राहकों के डेटा चोरी हो गए थे। इनमें वीजा और मास्टरकार्ड प्लेटफॉर्म के 26 लाख कार्ड और रुपे प्लेटफॉर्म के 6,00,000 लाख कार्ड थे। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कार्ड भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, येस बैंक और ऐक्सिस बैंक के थे।