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Explainer: फ्रीलांसिंग से हुई कमाई? ‘Section 44ADA’ का उठाएं फायदा और समझें टैक्स छूट के सभी नियम

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फ्रीलांसर्स के लिए सही ITR फॉर्म चुनने, सेक्शन 44ADA का फायदा उठाने, छूट क्लेम करने और टैक्स नोटिस से बचने के लिए नियमों को समझना बेहद जरूरी है

Last Updated- August 10, 2026 | 4:30 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

ITR Filing 2026-27: आज के समय में फ्रीलांसिंग सिर्फ पॉकेट मनी कमाने का तरीका नहीं रह गया है। अब लाखों लोग इसे फुल-टाइम करियर के तौर पर अपना रहे हैं। IT कंसलटेंट, ग्राफिक डिजाइनर और वकील से लेकर कंटेंट राइटर और चार्टर्ड अकाउंटेंट तक, बड़ी संख्या में फ्रीलांसर्स देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं। लेकिन जब कमाई पर टैक्स देने और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की बात आती है, तो कई फ्रीलांसर्स के लिए यह काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

कई बार फ्रीलांसर्स खुद को आम सैलरीड टैक्सपेयर्स की तरह समझ लेते हैं। इसी वजह से वे गलत ITR फॉर्म चुन लेते हैं या रिटर्न गलत तरीके से फाइल कर देते हैं। इसका नतीजा यह हो सकता है कि उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिल जाए।

यहां फ्रीलांसर्स के लिए ITR से जुड़े नियम, सही ITR फॉर्म, टैक्स में छूट और आम तौर पर होने वाली गलतियों को टैक्स मामलों के एक्सपर्ट ने विस्तार से समझाया है।

फ्रीलांसर्स के लिए कौन सा ITR फॉर्म है सही?

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट CA चांदनी आनंदन कहती हैं कि फ्रीलांसिंग से होने वाली कमाई को इनकम टैक्स के कानून के तहत ‘बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम’ (PGBP) माना जाता है, न कि ‘अदर सोर्सेज’ से इनकम। इसलिए फ्रीलांसर्स के लिए सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम सही ITR फॉर्म का चुनाव करना होता है। उनके मुताबिक, फ्रीलांसर्स को मुख्य रूप से ITR-3 और ITR-4 के बीच चुनाव करना होता है।

ITR-4 (सुगम): यह फॉर्म उन रेजिडेंट फ्रीलांसर्स के लिए सबसे आसान विकल्प है, जो सेक्शन 44ADA के तहत ‘प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम’ (Presumptive Taxation Scheme) का फायदा लेना चाहते हैं। अगर आपकी सालाना कुल कमाई तय सीमा के अंदर है और ज्यादातर कमाई डिजिटल माध्यम से होती है, तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें खर्चों का विस्तृत हिसाब रखने की जरूरत नहीं होती।

ITR-3: अगर कोई फ्रीलांसर सेक्शन 44ADA के दायरे में नहीं आता, अपने वास्तविक खर्चों का पूरा हिसाब दिखाकर छूट लेना चाहता है, बिजनेस में हुए नुकसान को आगे के सालों में कैरी-फॉरवर्ड करना चाहता है, या उसके पास विदेश में संपत्ति और कैपिटल गेन्स जैसी मुश्किल जानकारी है, तो उसे ITR-3 ही चुनना होगा।

Taxspanner के CEO और को-फाउंडर सुधीर कौशिक का कहना है कि फ्रीलांसर्स को अपनी रिटर्न कभी भी नौकरीपेशा लोगों की तरह ITR-1 में फाइल नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना सीधे तौर पर गलत फाइलिंग माना जाएगा।

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सेक्शन 44ADA का पर क्या है टैक्स का हिसाब-किताब?

फ्रीलांसर्स के लिए इनकम टैक्स एक्ट के लिए सेक्शन 44ADA काफी मददगार है। SK Patodia & Associate LLP में डायरेक्ट टैक्सेस के एसोसिएट डायरेक्टर, मिहिर तन्ना कहते हैं कि यह सेक्शन खास तौर पर लीगल, मेडिकल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, अकाउंटेंसी, टेक्निकल कंसल्टेंसी और इंटीरियर डेकोरेशन जैसे तय पेशों पर लागू होती है।

नियम क्या कहता है?

इस योजना के तहत फ्रीलांसर्स अपनी कुल ग्रॉस कमाई का 50% हिस्सा मुनाफा मानकर उस पर टैक्स दे सकते हैं। बाकी 50% को बिना किसी बिल या रसीद के बिजनेस खर्च मान लिया जाता है।

कमाई की सीमा:

सुधीर कौशिक बताते हैं कि आमतौर पर सेक्शन 44ADA का फायदा लेने के लिए सालाना ग्रॉस कमाई की सीमा 50 लाख रुपये है। हालांकि, डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसमें एक बड़ी राहत दी है। अगर आपकी कुल कमाई में नकद लेनदेन 5% या उससे कम है, तो यह सीमा बढ़कर 75 लाख रुपये हो जाती है।

यह विकल्प उन फ्रीलांसर्स के लिए काफी फायदेमंद है, जिनके वास्तविक खर्चे बहुत कम होते हैं, जैसे घर से काम करने वाले IT कंसलटेंट, और जिनकी ज्यादातर कमाई बैंक अकाउंट या UPI के जरिए आती है।

क्या 44ADA चुनने वालों को भी रखना होगा रिकॉर्ड?

चांदनी आनंदन बताती हैं कि अक्सर फ्रीलांसर्स को लगता है कि सेक्शन 44ADA चुनने के बाद उन्हें किसी भी तरह का रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं है। 44ADA में भले ही विस्तृत ‘बुक्स ऑफ अकाउंट्स (Books of Accounts)’ रखने से छूट मिलती है, लेकिन फ्रीलांसर को ‘पार्टी-वार बिक्री (Party-wise Sales)’ और मिले या किए गए पेमेंट का बुनियादी रिकॉर्ड जरूर रखना चाहिए।

वहीं कौशिक बताते हैं कि अगर किसी फ्रीलांसर का असली मुनाफा कुल कमाई के 50% से कम है और वह 50% से कम इनकम दिखाना चाहता है, तो इसके लिए सख्त नियम हैं। अगर उसकी कुल इनकम बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट से ज्यादा है, तो उसे पूरी ‘बुक्स ऑफ अकाउंट्स’ तैयार करनी होगी और सेक्शन 44AB के तहत टैक्स ऑडिट (Tax Audit) भी कराना होगा।

ITR-3 में कौन-कौन से खर्चे क्लेम किए जा सकते हैं?

सुधीर कौशिक बताते हैं कि अगर आप ITR-3 चुनते हैं, तो फ्रीलांसिंग से कमाई करने के लिए किए गए सभी वास्तविक और जरूरी खर्चों पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। चांदनी आनंदन और मिहिर तन्ना ने बताया कि किन-किन खर्चों को क्लेम किया जा सकता है:

  • डिजिटल और मार्केटिंग खर्च: Google/Meta Ads, डिजिटल विज्ञापन, प्रिंट मीडिया और प्रमोशन पर हुआ खर्च।
  • सॉफ्टवेयर और टूल्स: काम के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर, SaaS टूल्स, डोमेन, होस्टिंग और बिजनेस से जुड़े सब्सक्रिप्शन का खर्च।
  • वर्क फ्रॉम होम और ऑफिस खर्च: को-वर्किंग स्पेस या ऑफिस का किराया, इंटरनेट और बिजली का बिल। घर से काम करने पर इन खर्चों का एक अनुपातिक (Proportionate) हिस्सा बिजनेस खर्च के तौर पर क्लेम कर सकते हैं।
  • कंसल्टेंसी और ट्रैवल: सब-कॉन्ट्रैक्टर या कंसल्टेंट को दी गई फीस, प्रोफेशनल संगठनों की मेंबरशिप फीस और काम के सिलसिले में की गई यात्राओं का खर्च।

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किन खर्चों पर नहीं मिलेगी छूट?

चांदनी आनंदन और मिहिर तन्ना सलाह देते हैं कि व्यक्तिगत खर्चों, बिना बिल वाले क्लेम और किसी भी तरह के जुर्माने या पेनल्टी को बिजनेस खर्च में शामिल न करें।

साथ ही, जिन चीजों का फायदा 12 महीने से ज्यादा समय तक मिलता है, जैसे लैपटॉप या फर्नीचर, उनका पूरा खर्च एक साथ क्लेम नहीं कर सकते। इन पर सिर्फ मूल्यह्रास (Depreciation) का दावा किया जा सकता है। वहीं, सेक्शन 44ADA चुनने वाले लोग इन खर्चों को अलग से क्लेम नहीं कर सकते, क्योंकि 50% की छूट में ये सभी खर्च शामिल माने जाते हैं।

TDS कटौती के अलग-अलग हैं नियम

फ्रीलांसिंग में अक्सर कमाई के एक से ज्यादा रास्ते होते हैं। सुधीर कौशिक के मुताबिक, अगर किसी फ्रीलांसर की पिछले वित्त वर्ष में कुल ग्रॉस रिसिप्ट्स 50 लाख रुपये से ज्यादा थीं, तो उसे वेंडरों या कंसल्टेंट्स को किए जाने वाले कुछ पेमेंट पर TDS काटने के नियमों का भी पालन करना होगा।

इसके अलावा, अगर फ्रीलांसर की दूसरे जरियों से भी कमाई होती है, तो ITR में उसे सही जगह दिखाना जरूरी है:

  • फ्रीलांस इनकम: इसे PGBP (बिजनेस या प्रोफेशन से लाभ) शेड्यूल में दर्ज करें।
  • बैंक ब्याज और डिविडेंड: बचत खाते, FD के ब्याज और शेयर डिविडेंड को Schedule OS (Income from Other Sources) में दिखाएं।
  • शेयर और म्यूचुअल फंड: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड बेचने से हुए मुनाफे या नुकसान को Schedule CG (Capital Gains) में दर्ज करें।
  • किराया या सैलरी: पार्ट-टाइम जॉब से मिलने वाली सैलरी या मकान से आने वाले किराये को संबंधित शेड्यूल में दिखाएं।

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फ्रीलांसर्स को इन 7 बड़ी गलतियों से बचना जरूरी

सुधीर कौशिक और चांदनी आनंदन कहती हैं कि फ्रीलांसर्स को ITR जमा करने से पहले जरूरी कागजी तैयारी पूरी रखनी चाहिए। उन्होंने 7 ऐसी आम गलतियां बताई हैं, जिनसे हर फ्रीलांसर को बचना चाहिए:

  1. गलत ITR फॉर्म भरना: फ्रीलांसिंग इनकम को ‘Salaried Income’ समझकर ITR-1 में भर देना।
  2. निजी खर्चों को मिलाना: पर्सनल और बिजनेस के खर्चों और बैंक ट्रांजैक्शंस को आपस में मिला देना।
  3. एडवांस टैक्स न देना: अगर TDS कटने के बाद आपकी सालाना टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा बनती है, तो समय पर एडवांस टैक्स न भरने पर सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज लग सकता है।
  4. AIS/TIS की अनदेखी: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), TIS और Form 26AS में दिए आंकड़ों का अपने बैंक खातों से मिलान न करना।
  5. सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स न रखना: खर्चों के बिल, इनवॉइस या रसीदें संभालकर न रखना।
  6. इनकम गलत तरीके से दिखाना: फ्रीलांसिंग से हुई पूरी कमाई को ‘Income from Other Sources’ में दिखाकर गलत क्लेम करना।
  7. डेडलाइन मिस करना: तय तारीख के बाद ITR फाइल करना।

कौन-कौन से डॉक्यूमेंट रखें तैयार?

तीनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेडलाइन से पहले फ्रीलांसर्स को सभी क्लाइंट इनवॉइस, एग्रीमेंट्स, बैंक स्टेटमेंट्स, Form 26AS, AIS/TIS स्टेटमेंट, TDS सर्टिफिकेट्स (Form 16A), खर्चों के बिल, कैपिटल गेन स्टेटमेंट्स, बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट्स, GST रिटर्न्स (अगर लागू हो) और एडवांस टैक्स जमा करने की रसीदें तैयार रखनी चाहिए।

साथ ही समय पर और सही जानकारी के साथ ITR फाइल न करने पर लेट फीस, बकाया टैक्स पर ब्याज, रिफंड में देरी और नुकसान को आगे कैरी-फॉरवर्ड करने का फायदा खोने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। गलत जानकारी देने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से डिफेक्टिव रिटर्न या टैक्स डिमांड का नोटिस भी आ सकता है।

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First Published - August 10, 2026 | 4:21 PM IST

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