सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को परीक्षण के तौर पर 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर बैंक नोट जारी करने की अनुमति दी है। परीक्षण सफल रहने पर आरबीआई इन दोनों मूल्यवर्गों में नियमित तौर पर पॉलिमर नोट जारी करेगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज संसद को इस बात की जानकारी दी।
मंत्री ने लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा, ‘आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत फील्ड ट्रायल के लिए 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर बैंक नोट जारी करने और सफल फील्ड ट्रायल के बाद इन दोनों मूल्यवर्गों में नियमित तौर पर पॉलिमर बैंक नोट जारी करने के लिए सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।’
मंत्री ने कहा कि पॉलिमर बैंक नोट कागज सबस्ट्रेट आधारित बैंक नोटों के साथ जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कपास की लुगदी और पादप फाइबर सामग्री के उपयोग से तैयार पारंपरिक कागज के नोटों को पूरी तरह पॉलिमर सबस्ट्रेट आधारित बैंक नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड ने मई में खबर दी थी कि आरबीआई ने नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और पिछले कुछ वर्षों के दौरान मांग में हुई वृद्धि को पूरा करने के लिए प्रचलन में पॉलिमर बैंक नोट जारी करने पर विचार कर रहा है। जून में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की थी कि पॉलिमर बैंक नोट के लिए एक प्रस्ताव विचाराधीन है और बैंकिंग नियामक इसके फायदे एवं नुकसान का आकलन कर रहा है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कागज के करेंसी नोटों को सुरक्षित रूप से छापने पर किया गया व्यय 4,875.2 करोड़ रुपये था। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह रकम 6,372.8 करोड़ रुपये थी और इसकी मुख्य वजह बैंक नोटों की छपाई मांग में कमी थी।
चौधरी ने कहा, ‘आरबीआई ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलिमर बैंक नोटों का जीवनकाल कागज के बैंक नोटों की तुलना में काफी अधिक है।’
वित्त राज्य मंत्री ने कहा, ‘पॉलिमर बैंक नोटों की शुरुआत फिलहाल शुरुआती चरण में है। डिजिटल भुगतान पर इसका प्रभाव इन नोटों के नियमित जारी होने के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है। कुल मिलाकर बैंक नोट और डिजिटल भुगतान प्रणालियां जनता के लिए उपलब्ध पूरक भुगतान उपकरण हैं।’
भारत ने 2012 में पहली बार शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलिमर बैंक नोट पेश करने का प्रयास किया। मगर उस समय कुछ तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना को टाल दिया गया था।
दुनिया भर में अब तक लगभग 60 देशों ने प्रचलन में पॉलिमर बैंक नोट पेश किए हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में पॉलिमर बैंक नोट पेश करने वाली पहली अर्थव्यवस्था थी। उसने 10 डॉलर के नोट के साथ शुरुआत की थी। उसके बाद सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया ने पहल की। यूरोपीय देशों में रोमानिया 1998 में प्लास्टिक नोट का उपयोग करने वाला पहला देश बना। कनाडा ने भी 2011 में ऐसे ही नोट जारी किए।