Editorial: क्या सब्सिडी की राजनीति देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रही है?
सर्वोच्च न्यायालय ने मुफ्त योजनाओं के बढ़ते चलन पर पिछले हफ्ते नाराजगी जताई। अदालत की चिंता जायज है और इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों की सामूहिक प्रतिक्रिया जरूरी है। तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अंधाधुंध मुफ्त योजनाओं के […]
Editorial: एग्रीस्टैक बनेगा ‘अगला UPI’? किसानों के लिए डिजिटल क्रांति
इस सप्ताह आयोजित बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि क्षेत्र के लिए विकसित की जा रही डिजिटल अधोसंरचना ‘एग्रीस्टैक’ को भावनात्मक रूप से ‘अगला यूपीआई’ करार दिया। वह उस यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस का हवाला दे रही थीं जिसने न केवल देश में खुदरा भुगतान प्रणाली को क्रांतिकारी ढंग से बदल दिया […]
Editorial: नीति आयोग का NMP 2.0 जारी, एसेट मोनेटाइजेशन पर फिर जोर
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) का दूसरा संस्करण जारी कर दिया है। इसे सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने कई संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर तैयार किया है। ये वे मंत्रालय हैं जिनके पास ऐसी परिसंपत्तियां हैं जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है। एनएमपी 2.0 के लिए दिए गए आंकड़े अनुमान […]
Editorial: डेटा सेंटर की होड़, अवसरों के साथ संसाधन और स्थिरता की चुनौती
गत सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में निवेश के वादों की बाढ़ आ गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई और डेटा अधोसंरचना विकास) में 110 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज ने कहा कि वह अगले एक दशक में हरित ऊर्जा संचालित डेटा सेंटर्स में 100 अरब […]
Editorial: पैक्स सिलिका में भारत के प्रवेश से रणनीतिक औद्योगिक समन्वय को नई दिशा
भारत पैक्स सिलिका में शामिल हो गया है। यह अमेरिकी नेतृत्व वाला प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला का गठबंधन है। भारत औपचारिक रूप से दिसंबर 2025 में बने इस समूह का हिस्सा बन गया है जो सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अधोसंरचना और अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए […]
Editorial: ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘हथौड़ा’ और आगे की राह
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्कों को लेकर जो निर्णय दिया है उसे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल मे अब तक का सबसे बड़ा झटका करार दिया जा सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि जरूरी नहीं कि प्रशासन द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को न्यायिक मंजूरी […]
Editorial: शहरी निकायों को रिकॉर्ड फंडिंग, लेकिन संस्थागत सुधार के बिना असर सीमित
सोलहवें वित्त आयोग ने शहरी स्थानीय निकायों या प्रशासनों (यूएलजी) को राजकोषीय आवंटन बढ़ाया है। उसने यूएलजी के समग्र अनुदान में 130 फीसदी इजाफा किया है। पंद्रहवें वित्त आयोग के 1.55 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर यह राशि 2026 से 31 तक की अवधि के लिए 3.56 लाख करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके […]
Editorial: IBC में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल, CoC के कामकाज में सुधार से घटेगी देरी?
आधुनिक और गतिशील बाजार अर्थव्यवस्था में परिणामों को बेहतर बनाने के लिए कानूनों और विनियमों का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। संभव है कि बाजार संबंधी बदलती परिस्थितियां समायोजन की मांग करें, या कार्यान्वयन का अनुभव स्वयं विनियमन में खामियों को उजागर कर दे। ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 का कार्यान्वयन […]
Editorial: चीनी निवेश पर भारतीय रणनीति की समीक्षा की जरूरत
चीन के साथ दुनिया भर की मझोली शक्तियां अपने आर्थिक रिश्तों का पुनर्परीक्षण कर रही हैं। कनाडा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री तथा फ्रांस के राष्ट्रपति ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की है और वे आपसी रिश्तों को नए सिरे से बहाल करने की उम्मीद कर रहे हैं। यूरोपीय समुदाय […]
Editorial: उपभोक्ताओं पर ध्यान, मिस-सेलिंग और जबरन वसूली पर नकेल कसेगा रिजर्व बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में ‘विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री’ तथा ‘ऋण की वसूली और रिकवरी एजेंटों की नियुक्ति में विनियमित संस्थाओं के आचरण’ को लेकर मसौदा संशोधन निर्देश जारी किए हैं। इनके 1 जुलाई 2026 से लागू होने की उम्मीद है। यह उपभोक्ता केंद्रित बैंकिंग […]









