भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई और निफ्टी गिरावट वाले भंवर में फिसल गया। पश्चिम एशिया में जहाजों पर ईरान के लगातार हमलों ने संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीदों को झटका दिया है। तनाव बढ़ने से होर्मुज स्ट्रेट से तेल के परिवहन में लंबे समय तक व्यवधान की आशंका भी बढ़ गई है।
सेंसेक्स 829 अंक यानी 1.08 फीसदी गिरकर 76,034 पर बंद हुआ। निफ्टी 228 अंक यानी 1 फीसदी फिसलकर 23,639 पर टिका। संघर्ष शुरू होने के बाद से सेंसेक्स में 6.5 फीसदी और निफ्टी में 6.1 फीसदी की गिरावट आई है। अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से सेंसेक्स 11.4 फीसदी और निफ्टी 10.2 फीसदी नीचे है। हाल के उच्चतम स्तर से 10 फीसदी की गिरावट को आमतौर पर गिरावट वाला जोन कहा जाता है, जो बाजार में कमजोरी के दौर का संकेत देने वाला तकनीकी संकेतक है।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 1.8 लाख करोड़ रुपये घटकर 440 लाख करोड़ रुपये रह गया। लड़ाई की शुरुआत से लेकर अब तक कुल बाजार पूंजीकरण में 23.4 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है। बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा और बीएसई पर 1,598 शेयरों में बढ़त और 2,645 में गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया में तेल परिवहन सुविधाओं पर ईरानी हमलों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। खबरों में बताया गया है कि गुरुवार को विस्फोटकों से भरी ईरानी नौकाओं ने इराकी जलक्षेत्र में दो टैंकरों पर हमला कर आग लगा दी। पूरे इलाके में जहाजों पर हमलों की अतिरिक्त खबरों ने निवेशकों के भरोसे को और भी झटका दिया।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले बंद नहीं हो जाते, तब तक वह होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल की आपूर्ति रोके रखेगा। इस बीच, लेबनान में ईरान समर्थित आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह ने बुधवार को उत्तरी इज़रायल पर ड्रोन और रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इज़रायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों और दक्षिणी लेबनान पर हमले किए। इस तनाव में इजाफे से यह आशंका भी बढ़ी है कि यमन के हूती ईरान के समर्थन में संघर्ष में शामिल हो सकते हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील हो गया है क्योंकि देश अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस आयात करता है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जंग चली तो भारत का चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति दबाव तेज हो सकता है। तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 92.37 के नए निम्न स्तर पर पहुंचने के बाद 92.19 पर स्थिर हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव दुनिया भर में जोखिम लेने की दिलचस्पी घटा रहा है। तेल परिवहन जहाजों पर हुए नए हमलों ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा दिया है, जिससे मुद्रास्फीति और गैस आपूर्ति की कमी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा, निकट भविष्य में जोखिम से बचने की निरंतर भावना और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से शेयर बाजार और रुपये पर दबाव रह सकता है। हालांकि, इस वर्ष भारत का मूल्यांकन प्रीमियम कम हुआ है, जिससे बाजार दीर्घकालिक निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन गया है और गिरावट के जोखिम सीमित हुए हैं।
एसबीआई सिक्योरिटीज में तकनीकी और डेरिवेटिव अनुसंधान प्रमुख सुदीप शाह ने कहा, आगे चलकर 23,550-23,500 का स्तर निफ्टी के लिए समर्थन का अहम स्तर रहेगा। 23,500 से नीचे लगातार गिरावट से निफ्टी 23,350 की ओर जा सकता है। ऊपर की ओर, 23,800-23,850 का स्तर प्रतिरोध का तात्कालिक स्तर होगा जबकि 23,850 से ऊपर निर्णायक तेजी से 23,970-24,000 के स्तर की ओर वापसी को लेकर तेजी शुरू हो सकती है। सेंसेक्स में शामिल आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 2.2 फीसदी टूटा और सूचकांक की गिरावट में इसका योगदान सबसे ज्यादा रहा।