बिहार में विधान सभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को वोट डाले जाएंगे। इस चरण में नीतीश कुमार सरकार के आधे दर्जन से अधिक मंत्रियों सहित 1,302 उम्मीदवार मैदान में हैं। कुल 243 सीटों में से 122 सीटों पर 3.7 करोड़ मतदाता प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला करेंगे। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर वोट डाले गए थे, जिसमें रिकॉर्ड 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ था।
दूसरे चरण में 45,399 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें से 40,073 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया को सुचारु और आरामदायक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की है और सुविधाएं जोड़ी हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव द्वारा बिहार विधान सभा चुनाव के पहले चरण में पुरुष और महिला मतदाताओं के वोट डालने का आंकड़ा साझा नहीं करने के लिए निर्वाचन आयोग पर हमला बोला है। लेकिन आयोग के अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि पुरुष एवं महिला मतदाताओं का आंकड़ा आम तौर पर अंतिम मतदान के समय दिया जाता है। पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग पहले प्रत्येक चरण के समापन के बाद मतदाताओं के वोट डालने के आंकड़े साझा करता था, इस बार ऐसा नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों से सुरक्षा कर्मियों की कुल 208 कंपनियों को चुनाव ड्यूटी के लिए बिहार में तैनात किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया, ‘लगभग 68 प्रतिशत पुलिस पर्यवेक्षक भाजपा शासित राज्यों से हैं। ऐसा क्यों किया
गया है?’आरोपों का जवाब देते हुए निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत पुलिस बल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) से तैनात किए जाते हैं और केवल लगभग 20 प्रतिशत पुलिस बल राज्य सशस्त्र पुलिस (एसएपी) से तैनाती में शामिल किए जाते हैं, जिन्हें उनकी उपलब्धता के अनुसार विभिन्न राज्यों से आनुपातिक रूप से लाया जाता है।
जिन जिलों में इस चरण में मतदान होना है, उनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। ये सभी नेपाल के साथ लगी सीमा पर हैं। सीमांचल क्षेत्र में कई सीटों पर मुसलमानों की अच्छी-खासी आबादी है। इस लिहाज से यह चरण सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए काफी महत्त्वपूर्ण हो गया है। दोनों ही पक्षों ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
राज्य में दूसरा और अंतिम चरण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के छोटे घटकों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। गठबंधन के हिस्से के रूप में भाजपा जिन 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनमें से उसके 57 उम्मीदवार दूसरे चरण में मैदान में हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की सभी छह सीटों पर भी इसी चरण में मुकाबला होना है। इनमें चार सीटें ऐसी हैं, जिन पर पिछले चुनाव में उसके विधायक जीतकर आए थे। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उम्मीदवारों में पार्टी प्रमुख और राज्य सभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता शामिल हैं। पार्टी द्वारा मैदान में उतारे गए छह उम्मीदवारों में से चार दूसरे चरण में चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल दलों को सीमांचल क्षेत्र में सीटें जीतने की उम्मीद है। इसके लिए प्रचार में इंडिया घटक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के बढ़ते प्रभाव को कम करने की कोशिश के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जैसे अपने दिग्गज नेताओं को प्रचार के लिए मैदान में उतारा है। एआईएमआईएम ने 2020 में इस क्षेत्र में पांच सीटें जीती थीं और कुछ सीटों पर विपक्षी गठबंधन की संभावनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया था।
इस चरण में भाजपा और राजद की साख दांव पर लगी है। वर्ष 2020 के विधान सभा चुनाव में भाजपा को कुल 74 सीटें हासिल हुई थीं। खास यह कि जिन 122 सीटों पर दूसरे चरण में मतदान हो रहा है, उनमें से 42 पर उसके विधायक जीत कर आए थे। इसके बाद राजद के पास कुल जीती 75 में से 33 सीटें इसी क्षेत्र से थीं। जदयू को मिलीं कुल 43 सीटों में से सीमांचल से आधी यानी 20 सीटें थीं। कांग्रेस के भी 19 में से 11 विधायक सीमांचल से ही मिले थे।