facebookmetapixel
Advertisement
US-Iran War: 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया, ईरान ने ट्रंप को दिया करारा जवाबसावधान! भारत लौट रहे हैं तो जान लें गोल्ड और लैपटॉप के नए कस्टम नियम, वरना एयरपोर्ट पर होगी मुश्किलट्रंप की ईरान को नई धमकी: समय खत्म हो रहा है, 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो बरेपगा कहरयुद्ध लंबा चला तो प्रभावित होगा भारत का निर्यात, अर्थव्यवस्था और व्यापार पर सीधा असर: राजेश अग्रवाल‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी और पलटवार: ईरान की गिरफ्त में अमेरिकी पायलट? बढ़ी व्हाइट हाउस की बेचैनीLPG को लेकर डर के बीच यह सरकारी योजना बनी बड़ी राहत, 300 रुपये सस्ता मिल रहा सिलेंडर; ऐसे उठाएं लाभयुद्ध की मार: संकट में बीकानेर का नमकीन कारोबार, निर्यात में भारी गिरावट; व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलेंबोर्डिंग से पहले कैश बदलना भूल गए? अब एयरपोर्ट पर फ्लाइट पकड़ने से ठीक पहले भी बदल सकेंगे रुपयेअब माता-पिता रखें बच्चों के खर्च पर नजर, UPI Circle से दें डिजिटल पॉकेट मनी और बनाएं पेमेंट आसानTRAI का जियो पर बड़ा एक्शन! ‘डिस्क्रिमिनेटरी’ टैरिफ पर सख्ती, 14 अप्रैल तक देना होगा जवाब; जानें पूरा मामला

संपादकीय: नीतिगत संतुलन जरूरी

Advertisement

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि नीतिगत दरों में कमी करने में मौद्रिक नीति समिति ने जो देरी की है वह भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार है।

Last Updated- December 08, 2024 | 11:01 PM IST
Reserve Bank of India

हाल ही में जारी आधिकारिक अनुमान दर्शाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जताए गए अनुमान की तुलना में काफी धीमी गति से विकसित हो रही है। देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 5.4 फीसदी की दर से बढ़ी हालांकि रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में समान अवधि में इसके 7 फीसदी की दर से विकसित होने का अनुमान जताया था।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि नीतिगत दरों में कमी करने में मौद्रिक नीति समिति ने जो देरी की है वह भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार है। शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने भी हाल के सप्ताहों में नीतिगत ब्याज दरों को कम रखने के पीछे तर्क दिए हैं। इस परिदृश्य में मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत रीपो दर को अपरिवर्तित रखकर गत सप्ताह अच्छा काम किया। इस दौर में अगर अचानक कोई कदम उठाया जाता तो शायद उससे मदद नहीं मिलती। अपस्फीति की प्रक्रिया से निपटना महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।

इसके बावजूद रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में 50 आधार अंकों की कमी की जो दो हिस्सों में प्रभावी होगी और जिसकी बदौलत बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये की नकदी आएगी। हालांकि रिजर्व बैंक ने दरों में कटौती को नकदी के संभावित दबाव के चलते उचित ठहराया है लेकिन केंद्रीय बैंक के पास नकदी के अस्थायी संकट से निपटने के लिए अन्य उपाय मौजूद हैं।

सीआरआर में कटौती मौद्रिक नीति व्यवहार को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। हालांकि मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में ही सहिष्णु दायरे के ऊपरी स्तर के पार चली गई थी लेकिन अब अनुमान जताया जा रहा है कि यह 2025-26 की दूसरी तिमाही में घटकर 4 फीसदी के वांछित लक्ष्य के आसपास आ जाएगी।

ताजा मौद्रिक नीति रिपोर्ट (अक्टूबर में जारी) ने दिखाया कि रिजर्व बैंक का अनुमान है कि 2025-26 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति की दर 4.1 फीसदी रहेगी। ऐसे में वर्ष 2025-26 में मुद्रास्फीति संबंधी नतीजे 4 फीसदी के लक्ष्य के करीब रह सकते हैं और इससे नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश बनेगी।

बहरहाल इसकी मात्रा और इसका समय विभिन्न कारकों पर निर्भर करेगा। उदाहरण के लिए यह बात ध्यान देने लायक है कि मुद्रास्फीति संबंधी नतीजों ने बीते कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक को सकारात्मक रूप से चौंकाया है। ऐसे में आदर्श स्थिति में मौद्रिक नीति समिति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुद्रास्फीति की दर टिकाऊ आधार पर लक्ष्य के साथ सुसंगत रहे।

इसके अलावा रिजर्व बैंक के अर्थशास्त्रियों ने दिखाया कि गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में तटस्थ दर 1.4 से 1.9 फीसदी थी जबकि 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह दर 0.8 से एक फीसदी रही थी। ऐसे में इजाफे को देखते हुए नीतिगत दरों में कटौती की संभावना सीमित होगी। इसकी दरों में कटौती के उचित समय के निर्धारण में भी उचित भूमिका होगी। मौद्रिक नीति समिति शायद ब्याज दरों में कटौती को आगे बढ़ाने में अनिच्छुक हो तथा अनिश्चितताओं से निपटने के लिए कुछ नीतिगत गुंजाइश बचाकर रखना चाहे।

वृद्धि के संदर्भ में जहां मौद्रिक नीति समिति ने चालू वित्त वर्ष के वृद्धि अनुमान को गत नीतिगत बैठक के 7.2 फीसदी से कम करके 6.6 फीसदी कर दिया है वहीं चालू तिमाही सहित आगामी चार तिमाहियों के लिए इसने सात फीसदी का औसत अनुमान लगाया है। स्पष्ट है कि समिति का अनुमान है कि माहौल सुधरेगा हालांकि अनुमान कुछ विश्लेषकों को आशावाद लग सकता है।

चाहे जो भी हो नीतिगत दरों में कटौती की सीमित गुंजाइश शायद आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ ढंग से आगे बढ़ाने में मदद नहीं कर पाए। सरकार को अन्य कारकों पर नजर डालनी होगी ताकि आर्थिक वृद्धि टिकाऊ रखी जा सके। एक असंबद्ध कदम में रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा पर ब्याज दर बढ़ा दी। हालांकि विदेशी पूंजी हाल के महीनों में बाहर गई है लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार के मौजूदा स्तरों को देखते हुए यह निर्णय दिलचस्प है। वास्तव में रुपया जो कि वास्तविक संदर्भों में अधिमूल्यित है उसका भी अवमूल्यन होने देना चाहिए।

Advertisement
First Published - December 8, 2024 | 11:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement