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Market Outlook: नए साल से पहले बाजार की चाल तय करेंगे मैक्रो आंकड़े और वैश्विक संकेत

Market Outlook: इस सप्ताह निवेशकों की नजर घरेलू औद्योगिक उत्पादन, ऑटो बिक्री और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर होगी।

Last Updated- December 28, 2025 | 5:13 PM IST
Market Outlook
Representative Image

इस सप्ताह शेयर बाजार में निवेशकों की निगाहें कई बड़ी घटनाओं पर टिकी रहेंगी। घरेलू आर्थिक आंकड़े, विदेशी निवेशकों की चाल और वैश्विक बाजार की हलचल इस बार बाजार का मूड तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह भारत और वैश्विक बाजार नए साल 2026 में प्रवेश करेंगे और दिसंबर के F&O (फ्यूचर्स और ऑप्शन्स) एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के एसवीपी, अजित मिश्रा ने बताया कि घरेलू स्तर पर नवंबर के औद्योगिक उत्पादन (IIP) और अंतिम HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI (खरीद प्रबंधक सूचकांक) आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नजर अमेरिका के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतों पर रहेगी, जिसमें FOMC (फेडरल ओपन मार्केट कमिटी) की मीटिंग मिनट्स और फेडरल रिजर्व के बैलेंस शीट अपडेट शामिल हैं। ये डेटा वैश्विक जोखिम भावना, तरलता और आर्थिक विकास के अनुमान को प्रभावित कर सकते हैं।

बीते सप्ताह, छुट्टियों के कारण कम ट्रेडिंग के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स में 112 अंक (0.13%) की बढ़त रही, जबकि निफ्टी 76 अंक (0.29%) ऊपर बंद हुआ। हालांकि, विदेशी निवेशकों की निकासी लगातार जारी रही।

एनरिच मनी के सीईओ पोन्मुदि आर के अनुसार, साल 2025 के आखिरी कुछ ट्रेडिंग सेशंस में भारतीय बाजार अधिकतर सीमित दायरे में रहने की संभावना है, लेकिन सामान्य तौर पर सकारात्मक रुख रहेगा। इस सप्ताह निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर होगी।

देश में नवंबर का औद्योगिक उत्पादन डेटा, माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली उत्पादन की दिशा का संकेत देगा। इसके अलावा, नवंबर में ऑटोमोबाइल बिक्री के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे, ताकि यह पता चल सके कि जीएसटी सुधार के बाद ऑटो डिमांड में स्थिरता बनी हुई है या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते कुछ अहम आर्थिक डेटा रिलीज होने वाले हैं, जो घरेलू और वैश्विक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। IIP (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के साथ-साथ अन्य रिली घरेलू खपत के रुझानों को समझने में मदद करेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह देखना अहम होगा कि जीएसटी रेशनलाइजेशन के बाद ऑटो सेक्टर में आई तेजी 2026 में भी कायम रह रही है या नहीं।

दूसरी ओर, वैश्विक निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स पर भी ध्यान रखेंगे। ये मिनट्स केंद्रीय बैंक की नीतियों के भविष्य की दिशा को लेकर स्पष्टता देंगे।

मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने बताया कि निवेशकों को अमेरिकी प्रारंभिक बेरोजगारी दावों, अमेरिका और चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI और भारत की मासिक ऑटो बिक्री के आंकड़ों पर भी नजर रखनी होगी।

First Published - December 28, 2025 | 3:51 PM IST

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