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महत्त्वपूर्ण खनिजों पर चीन का प्रभुत्व बना हुआ: WEF रिपोर्ट

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चीन महत्त्वपूर्ण खनिजों के शोधन में वैश्विक प्रभुत्व बनाए हुए है, जिससे ईवी, डेटा सेंटर और बिजली ग्रिड की आपूर्ति श्रृंखला जोखिम में है।

Last Updated- December 27, 2025 | 1:21 PM IST
China Flag
Representative Image

महत्त्वपूर्ण खनिजों के मामले में चीन पर निर्भरता घटाने की पूरी दुनिया की कवायद अपर्याप्त साबित हो रही है जबकि इस देश के बाहर भी इन खनिजों की खानें विकसित हो रही हैं। यह जानकारी विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की नवीनतम रिपोर्ट में दी गई है। यह रुझान भारत के बिजली वाहनों (ईवी), आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटा सेंटरों और बिजली ग्रिड के आधारभूत ढांचे की आपूर्ति श्रृंखला के जोखिम को उजागर करता है।
भारत में प्रमुख खनिज जैसे

एल्युमीनियम, लौह, जस्ता और सीसा पर्याप्त मात्रा में हैं लेकिन भारत में लीथियम, रेयर अर्थ और ग्रेफाइट जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों के शोधन में उपस्थिति नगण्य बनी हुई है। हालांकि भारत तेजी से ईवी को अपनाने वाला है और डेटा सेंटरों में निवेश बढ़ाने को तैयार है।

रिपोर्ट के अनुसार महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन पर आश्रित रहने की जगह विविधतापूर्ण बनाने के वैश्विक प्रयास विफल हो रहे हैं। इससे आपूर्ति श्रृंखलाएं असुरक्षित हो रही हैं। वह भी ऐसे दौर में जब ईवी, डेटा सेंटर और बिजली ग्रिड से रणनीतिक खनिजों की मांग में भारी वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट ने इंगित किया कि वैश्विक खनिज शोधन करने वाले शीर्ष के तीन देशों की हिस्सेदारी वर्ष 2020 के 82 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024 में 86 प्रतिशत हो गई। यह आंकड़ा दिखाता है कि विविधीकरण के प्रयास भी चीन के प्रभुत्व को कम नहीं कर पाए हैं।

रिपोर्ट के विश्लेषण से जानकारी मिलती है कि चीन ने सभी 19 महत्त्वपूर्ण खनिजों के शोधन पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है। चीन का वैश्विक स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण खनिजों के शोधन के 75 प्रतिशत से अधिक पर नियंत्रण है। इन खनिजों में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), गैलियम, ग्रेफाइट, मैग्नीशियम और जर्मेनियम हैं।

चीन ने हाल में आरईई के निर्यात पर लगाम लगाई हैं। इससे विश्व के देशों ने रणनीतिक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला के प्रयास तेज कर दिए हैं। बहरहाल, भारत ने देश व विदेश में महत्त्वपूर्ण खनिज ब्लॉक के खनन से सुरक्षित आपूर्ति हासिल करने के लिए राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू कर दिया है।

सरकार ने महत्त्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण पार्क के लिए 500 करोड़ रुपये आबंटित कर दिए हैं ताकि शोधन और उसके बाद प्रसंस्करण को बढ़ावा मिले। रिपोर्ट ने इंगित किया है कि खनन और शोधन के अलावा बिजली के ग्रिड का आधारभूत ढांचा भी तात्कालिक बाधा के रूप में उभरा है। महत्त्वपूर्ण खनिजों पर ही ट्रांसफार्मर, तारों और इलेक्ट्रिक्ल स्टील आश्रित हैं और इनकी कमी से ईवी चार्जिंग शुरू करने, नवीकरणीय ऊर्जा से समन्वय और डेटा सेंटरों को जोड़ने की गति धीमी पड़ रही है। ट्रांसफॉर्मर के दाम बीते तीन वर्षों में 50 से 80 प्रतिशत बढ़ गए हैं और उनका डिलीवरी समय बढ़कर 18 से 36 माह हो गया है।

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First Published - December 27, 2025 | 1:21 PM IST

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