भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा लेनदेन पर नए नियमों का मसौदा तैयार किया है, जो रिटेल ग्राहकों के लिए विदेशी भुगतान का अनुभव बदल सकता है। इस प्रस्ताव के तहत, अधिकृत डीलरों को लेनदेन से पहले पूरी लागत ग्राहकों को दिखानी होगी। यानी अब ग्राहक को फीस या छुपी हुई लागत के बारे में लेनदेन के बाद नहीं, बल्कि पहले ही पता चल जाएगा।
बॉर्डरलैस के सीईओ और संस्थापक सिताश्वा श्रीवास्तव के अनुसार, इस बदलाव का मकसद फीस कम करना नहीं है, बल्कि ग्राहकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करना है।
इस पहल से विदेशी मुद्रा लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय भुगतान अधिक पारदर्शी और समझने में आसान हो जाएगा।
अब विदेशी लेन-देन (जैसे ट्यूशन फीस या पैसे ट्रांसफर) में ग्राहक को पूरी लागत पहले ही पता चल जाएगी। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की योजना के तहत, बैंक और अधिकृत डीलर को अब ट्रांज़ैक्शन के समय सभी शुल्क और दरें साफ-साफ दिखानी होंगी।
पहले, ग्राहक को अक्सर केवल अनुमानित एक्सचेंज रेट और कभी-कभी ट्रांसफर फीस ही दिखाई देती थी। वास्तविक खर्च बाद में सामने आता था, जैसे:
मुद्रा विनिमय दर में छिपे अतिरिक्त शुल्क
मध्यवर्ती बैंक द्वारा ली जाने वाली फीस
प्राप्तकर्ता खाते से कटने वाली राशि
कार्ड पर डायनामिक करेंसी कन्वर्जन फीस
उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र $10,000 की ट्यूशन फीस भरना चाहता है, तो पहले केवल रेट दिखता था, लेकिन विश्वविद्यालय को कम राशि मिलती थी। अब नए नियम के तहत छात्र को पहले ही यह पता चलेगा कि कितने रुपये खर्च होंगे, विश्वविद्यालय को कितनी राशि मिलेगी और कुल शुल्क कितना लगेगा।
RBI का यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों का विश्वास मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
आगामी नियमों के तहत मुद्रा लेनदेन में शुल्क और रेट की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बैंक तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के बीच प्रतिस्पर्धा बेहतर ‘ऑल-इन’ रेट पर केन्द्रित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन बैंकों ने अब तक ज्यादा मार्जिन पर काम किया, उन्हें अपने रेट को सही ठहराना या कम करना पड़ सकता है। वहीं, फिनटेक प्लेटफॉर्म्स, जो एक ही स्क्रीन पर साफ-सुथरी जानकारी देते हैं, उपभोक्ताओं का विश्वास जीत सकते हैं।
हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि विभिन्न देशों और बैंक नेटवर्क के अनुसार फीस और रूटिंग का अनुमान पहले से लगाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एक बार यह खुलासा नियम बन जाने के बाद, उपभोक्ताओं को लेनदेन की तुलना करने का तरीका बदल देना चाहिए। विशेषज्ञ श्रीवास्तव के अनुसार, अब सवाल यह होना चाहिए कि ‘मुझे अंतिम रूप से कितना पैसा मिलेगा?’ न कि ‘मुझे कौन सा रेट मिल रहा है?’।
छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे ऐसे विकल्प चुनें जो पूरी रकम सुनिश्चित करें।
परिवार जो भरण-पोषण के लिए पैसे भेजते हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि निश्चित रुपये में कितना पैसा असल में पहुंचता है।
यात्रियों को डायनामिक करेंसी कन्वर्ज़न से सावधान रहना चाहिए और स्थिर ‘ऑल-इन’ रेट पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञ का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं के लिए अप्रत्याशित खर्च कम होंगे और विदेशी मुद्रा बाजार अधिक पारदर्शी और तुलना योग्य बनेगा।