भारत में शादी का सीजन चल रहा है। इसका मतलब है कई पारिवारिक कार्यक्रम और साथ ही घरों में लॉकर से सोना निकालकर दुल्हन के गहनों में शामिल किया जाना। आम धारणा के उलट, भारत में किसी व्यक्ति या परिवार के पास सोने की मात्रा पर कोई कानूनी सीमा नहीं है। शर्त सिर्फ यह है कि सोना खरीदने या पाने का स्रोत बताया जा सके। ज्यादातर लोग जिन सीमाओं का जिक्र करते हैं, वे सीबीडीटी (CBDT) की नॉन-सीजर गाइडलाइंस से जुड़ी हैं। ये गाइडलाइंस आयकर विभाग की तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान लागू होते हैं। ये सोना रखने की सीमा नहीं हैं, बल्कि वे मात्रा हैं जिनके भीतर होने पर, दस्तावेज न होने की स्थिति में भी आमतौर पर गहने जब्त नहीं किए जाते।
चार्टर्ड अकाउंटेंट मोहम्मद एस चोखावाला के अनुसार, “अगर सोने के गहने या आभूषण वैध आय से प्राप्त किए गए हैं और करदाता उसका स्रोत समझा सकता है, तो उन्हें रखने पर कोई पाबंदी नहीं है। इसमें विरासत में मिला सोना भी शामिल है। हालांकि, एक तय मात्रा तक सोना रखने के लिए स्रोत बताने की जरूरत नहीं होती।”
विवाहित महिला: 500 ग्राम तक सोने के गहने रख सकती है।
अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक सोने के गहने रख सकती है।
पुरुष: 100 ग्राम तक सोने के गहने रख सकते हैं।
हिंदू अविभाजित परिवार (HUF): सोने की मात्रा का आकलन परिवार की आय और सामाजिक स्थिति के आधार पर किया जाता है, इसके लिए कोई तय सीमा नहीं है
ये सीमाएं भारतीय सामाजिक परंपराओं- जैसे शादी, विरासत और पारिवारिक उपहार- को ध्यान में रखकर तय की गई हैं और इन्हें घरों में रखे जाने वाले सोने की उचित मात्रा माना जाता है।
ये तय सीमाएं केवल उसी व्यक्ति के परिवार के सदस्यों पर लागू होती हैं, जिसके खिलाफ आयकर विभाग की तलाशी (टैक्स सर्च) की कार्रवाई की जाती है।
यदि तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों के अलावा किसी और के आभूषण पाए जाते हैं, तो उन्हें कर अधिकारियों द्वारा जब्त किया जा सकता है।
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फाइनेंशियल एक्सपर्ट और Stocktick Capital के फाउंडर विजय महेश्वरी बताते हैं कि आज के समय में इसका मतलब रुपये के लिहाज से क्या होता है।
एक सामान्य परिवार, जिसमें पति, पत्नी और एक अविवाहित बेटी शामिल हों, उसके लिए कानूनी रूप से स्वीकार्य सोने की मात्रा इस प्रकार है:
पत्नी: 500 ग्राम
पति: 100 ग्राम
बेटी: 250 ग्राम
इस तरह कुल सोना 850 ग्राम होता है।
मौजूदा 22 कैरेट सोने की कीमतों के हिसाब से, मेकिंग चार्ज जोड़ने के बाद भी इसकी कीमत 1.2 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। यह सोना घर में कानूनी रूप से रखा जा सकता है। भले ही उसके बिल न हों, बशर्ते वह घरेलू इस्तेमाल के गहने हों और कमर्शियल स्टॉक न हों।
इन सीमाओं को भारतीय परिवारों के लिए सांस्कृतिक रूप से उचित माना जाता है और आमतौर पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान इन्हें लागू किया जाता है।
यह अंतर परिवारों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे:
अधिकांश गलतियां दो छोरों पर होती हैं- या तो लोग मान लेते हैं कि बिना बिल का कोई भी सोना अवैध है, या फिर बड़ी मात्रा में रखे गए, बिना स्रोत बताए गए सोने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं।
सिंघानिया एंड कंपनी में पार्टनर रितिका नैय्यर के अनुसार, “यदि कोई व्यक्ति वर्षों में घोषित आय से खरीदे गए सोने का स्रोत साबित कर सकता है, तो वह कितनी भी मात्रा में सोना रख सकता है। इसी तरह, उपहार या विरासत में मिले सोने के मामले में भी संबंधित बिल, वसीयत, डीड या अन्य दस्तावेज होने चाहिए। इसलिए, अगर तय सीमा से ज्यादा सोना रखा गया है, तो खरीद या प्राप्ति से जुड़े सभी दस्तावेज और सबूत संभालकर रखना बेहद जरूरी है। उपहार के मामलों में मौके, रिश्तेदार, राशि और बिल जैसी जानकारी दर्ज होनी चाहिए, ताकि टैक्स जांच से बचा जा सके या आयकर विभाग की किसी भी तलाशी या आकलन प्रक्रिया के दौरान अपने दावे को सही तरीके से साबित किया जा सके।”
उन्होंने कहा कि तय सीमा से ज्यादा और बिना हिसाब-किताब वाला सोना टैक्स चोरी माना जा सकता है। ऐसे मामलों में सोने की कीमत के करीब 60 फीसदी तक टैक्स, इसके अलावा सरचार्ज और सेस लगाया जा सकता है। साथ ही अतिरिक्त ब्याज और जुर्माना भी देना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में, परिस्थितियों के आधार पर सोने की जब्ती भी हो सकती है।
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ये लचीले नियम सिर्फ व्यक्तिगत और घरेलू इस्तेमाल के गहनों पर लागू होते हैं, न कि इन मामलों में:
अगर सोने की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है और उसका स्रोत नहीं बताया जा सकता, तो अतिरिक्त सोना अघोषित निवेश माना जा सकता है। ऐसे में भारी टैक्स और जुर्माना लगाया जा सकता है।