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क्या बीमा कंपनियां ग्राहकों को गलत पॉलिसी बेच रही हैं? IRDAI ने कहा: मिस-सेलिंग पर लगाम की जरूरत

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IRDAI की ताजा रिपोर्ट बताती है कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की संख्या पिछले साल से लगभग वैसी ही बनी हुई है

Last Updated- January 04, 2026 | 4:51 PM IST
Insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बीमा कंपनियां ग्राहकों को गलत तरीके से पॉलिसी बेच रही हैं, और इसकी जड़ तक पहुंचने के लिए कंपनियों को गहराई से जांच करनी चाहिए। ये बातें इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने अपनी नई सालाना रिपोर्ट में कही हैं। रिपोर्ट बताती है कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की संख्या पिछले साल से लगभग वैसी ही बनी हुई है। 2023-24 में 1,20,726 शिकायतें आई थीं, जो 2024-25 में 1,20,429 हो गईं। लेकिन अनफेयर बिजनेस प्रैक्टिस (UFBP) वाली शिकायतें बढ़कर 23,335 से 26,667 हो गईं। इसका मतलब है कि कुल शिकायतों में UFBP का हिस्सा 19.33 फीसदी से बढ़कर 22.14 फीसदी हो गया।

मिस-सेलिंग का मतलब है कि बीमा पॉलिसी बेचते वक्त ग्राहकों को शर्तें, नियम या उसकी जरूरत के बारे में ठीक से नहीं बताया जाता। इससे ग्राहक ठगे महसूस करते हैं। IRDAI ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे ऐसी गड़बड़ियां रोकने के लिए कदम उठाएं। जैसे, पॉलिसी ग्राहक के लिए सही है या नहीं, ये जांचें। अलग-अलग बिक्री चैनलों पर कंट्रोल रखें और शिकायतों की जड़ तक पहुंचने के लिए नियमित जांच करें। वित्त मंत्रालय भी बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों को बार-बार चेता चुका है कि ग्राहकों को गलत पॉलिसी न बेचें और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का पालन करें।

अक्सर मिस-सेलिंग की वजह से ग्राहकों को ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ता है। नतीजा ये होता है कि वे पॉलिसी रिन्यू नहीं कराते और लैप्स के मामले बढ़ जाते हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि देश में इंश्योरेंस की पहुंच अभी भी कम है।

Also Read: प्रीमियम चूका? पॉलिसी हो गई बंद! LIC के खास ऑफर से करें रिवाइव, लेट फीस में 30% तक की छूट

इंश्योरेंस की पहुंच और आंकड़ों की हकीकत

इंश्योरेंस पेनेट्रेशन, यानी GDP के मुकाबले बीमा प्रीमियम का प्रतिशत, 2024-25 में 3.7 फीसदी पर ही अटका रहा। ये दुनिया के औसत 7.3 फीसदी से काफी कम है। लाइफ इंश्योरेंस का पेनेट्रेशन 2.8 फीसदी से घटकर 2.7 फीसदी हो गया, जबकि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस का 1 फीसदी पर ही टिका रहा।

वहीं, इंश्योरेंस डेंसिटी, जो प्रति व्यक्ति प्रीमियम है, वो थोड़ी बढ़ी है। 2023-24 में ये 95 डॉलर थी, जो 2024-25 में 97 डॉलर हो गई। लाइफ इंश्योरेंस की डेंसिटी 70 से 72 डॉलर पहुंची, जबकि नॉन-लाइफ की 25 डॉलर पर ही बनी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 से इंश्योरेंस डेंसिटी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ये दोनों आंकड़े देश में इंश्योरेंस सेक्टर की हालत बताते हैं। पेनेट्रेशन प्रीमियम को GDP से जोड़कर देखता है, जबकि डेंसिटी आबादी के हिसाब से प्रीमियम मापती है।

IRDAI की रिपोर्ट से साफ है कि सेक्टर में सुधार की जरूरत है, खासकर मिस-सेलिंग रोकने के लिए। कंपनियां अगर जड़ तक जांच करेंगी, तो ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और शिकायतें कम होंगी। लेकिन अभी आंकड़े बताते हैं कि चुनौतियां बनी हुई हैं।

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First Published - January 4, 2026 | 4:51 PM IST

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