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जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला से मादुरो को उठा लिया, क्या उसी तरह चीन ताइवान के साथ कर सकता है?

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बता दें कि अमेरिका ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अगवा कर लिया था

Last Updated- January 04, 2026 | 3:58 PM IST
Nicolás Maduro
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी दोनों इस समय अमेरिका की हिरासत में हैं | फोटो: X

अमेरिका ने वेनेजुएला पर अचानक हमला करके वहां के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। ये घटना शनिवार को हुई, और अब मादुरो और उनकी पत्नी न्यूयॉर्क में हिरासत में हैं, जहां उनका ट्रायल होना है। इस कदम से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे चीन को अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने का मौका मिलेगा, जैसे ताइवान और साउथ चाइना सी के हिस्से। लेकिन वे ये भी मानते हैं कि ताइवान पर कोई हमला जल्दी होने की संभावना नहीं है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ताइवान को लेकर सोच-विचार लैटिन अमेरिका की इस घटना से अलग है। ये ज्यादा चीन की अपनी घरेलू हालत पर निर्भर करता है, न कि अमेरिकी कार्रवाई पर।

ट्रंप प्रशासन की ये चाल ने चीन के लिए एक अनचाहा लेकिन फायदेमंद मौका पैदा कर दिया है। बीजिंग अब निकट भविष्य में अमेरिका की ज्यादा आलोचना कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत बना सकता है। लंबे समय में, चीन इस घटना का इस्तेमाल करके ताइवान, तिब्बत और ईस्ट व साउथ चाइना सी के द्वीपों पर अपने रुख को बचाने में कामयाब हो सकता है।

मादुरो की गिरफ्तारी से ठीक पहले, उन्होंने काराकास में एक ऊंचे स्तर के चीनी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इसकी तस्वीरें उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कीं। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन के लैटिन अमेरिकी और कैरिबियन मामलों के विशेष प्रतिनिधि किऊ शियाओकी भी शामिल थे। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस प्रतिनिधिमंडल की मौजूदा स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

चीन की अमेरिका पर तीखी प्रतिक्रिया

चीन ने अमेरिका के इस हमले की कड़ी निंदा की है। बीजिंग का कहना है कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका में शांति व सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। चीन ने मांग की है कि अमेरिका मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे।

रविवार को चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इसे “नग्न हेगेमोनी व्यवहार” करार दिया। शिन्हुआ ने लिखा कि अमेरिका के मुंह से निकलने वाला “रूल्स-बेस्ड इंटरनेशनल ऑर्डर” असल में “अमेरिकी हितों पर आधारित लूटमार का ऑर्डर” है। इस हमले ने सबको ये साफ दिखा दिया है कि अमेरिका के नियम सिर्फ उसके फायदे के लिए हैं।

एक्सपर्ट विलियम यांग, जो ब्रसेल्स स्थित एनजीओ इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में काम करते हैं, कहते हैं कि वाशिंगटन हमेशा चीन की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताता रहा है। लेकिन अब खुद अमेरिका ने ऐसा करके अपनी साख को नुकसान पहुंचाया है।

यांग के मुताबिक, ये चीन के लिए कई दरवाजे खोल रहा है और सस्ता हथियार दे रहा है, जिससे वो भविष्य में अमेरिका पर पलटवार कर सके। चीन ताइवान को अपना प्रांत मानता है, जबकि ताइवान की सरकार इससे इनकार करती है। साउथ चाइना सी के ज्यादातर हिस्से पर भी चीन का दावा है, जो कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ टकराव पैदा करता है। ये इलाका व्यापार के लिए बेहद अहम है। चीनी विदेश मंत्रालय, ताइवान मामलों का कार्यालय और ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Also Read: ट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि की

ताइवान पर बढ़ता दबाव, लेकिन हमले की जल्दबाजी नहीं

ताइवान पर चीन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले हफ्ते बीजिंग ने द्वीप के चारों तरफ अपने अब तक के सबसे बड़े युद्ध अभ्यास किए। इनमें दिखाया गया कि संघर्ष की स्थिति में चीन ताइवान को बाहरी मदद से काट सकता है। फिर भी, एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेनेजुएला की घटना से चीन ताइवान पर हमला करने की जल्दी नहीं करेगा।

रेनमिन यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर शी यिनहोंग कहते हैं कि ताइवान पर कब्जा चीन की बढ़ती लेकिन अभी अपर्याप्त क्षमता पर निर्भर करता है, न कि ट्रंप ने दूर के महाद्वीप में क्या किया।

एशिया सोसाइटी में चीनी राजनीति पर फेलो नील थॉमस का कहना है कि चीन ताइवान को अपना आंतरिक मामला मानता है। इसलिए वो वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को ताइवान पर हमले का बहाना नहीं बनाएगा। थॉमस के अनुसार, बीजिंग अमेरिका से अलग दिखना चाहता है ताकि वो शांति, विकास और नैतिक नेतृत्व की बात कर सके। शी जिनपिंग को वेनेजुएला से ज्यादा चीन की चिंता है। वो उम्मीद करेंगे कि ये अमेरिका के लिए दलदल बन जाए।

ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ सांसद वांग टिंग-यू, जो संसद की विदेश मामलों और रक्षा समिति में हैं, ने फेसबुक पर लिखा कि चीन ने कभी ताइवान के प्रति दुश्मनी की कमी नहीं दिखाई, लेकिन उसके पास असल में सक्षम तरीके नहीं हैं।

वांग ने कहा, “चीन अमेरिका नहीं है, और ताइवान निश्चित रूप से वेनेजुएला नहीं है। अगर चीन ये कर सकता, तो कब का कर चुका होता!”

सोशल मीडिया पर गर्मागर्म बहस और आगे की चुनौतियां

चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर अमेरिकी हमले की चर्चा रविवार को जोरों पर थी। कई यूजर्स कह रहे थे कि बीजिंग को ट्रंप से सीखना चाहिए। नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर लेव नाचमैन कहते हैं कि वो उम्मीद करते हैं कि ताइवान सरकार वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई का हल्का समर्थन करेगी। हालांकि, ताइवान ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।

नाचमैन के मुताबिक, ट्रंप की कार्रवाई शी जिनपिंग के नैरेटिव को मजबूत कर सकती है, जिससे भविष्य में ताइवान के खिलाफ कार्रवाई का ज्यादा औचित्य बनाया जा सके।

कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये स्थिति ताइवान के लिए जोखिम बढ़ाती है और ताइवान को ट्रंप प्रशासन से ज्यादा समर्थन मांगने पर मजबूर कर सकती है। कुल मिलाकर, अमेरिका की ये चाल ने वैश्विक राजनीति में नई उथल-पुथल पैदा की है, जहां चीन को अपनी स्थिति मजबूत करने के नए रास्ते मिल रहे हैं। 

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - January 4, 2026 | 3:58 PM IST

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